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Uttarakhand Assembly Election : परेशान ग्रामीण अब नहीं डालेंगे वोट, झूठे वादों से टूट चुका है भरोसा

Uttarakhand Assembly Election : परेशान ग्रामीण अब नहीं डालेंगे वोट, झूठे वादों से टूट चुका है भरोसा

प्रदर्शन करते ग्रामीण.

प्रदर्शन करते ग्रामीण.

Elections 2022: उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में आज भी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। हर 5 साल में लोगों की जिंदगी बेहतर करने के साथ सरकार तो बनतीं हैं. लेकिन ग्रामीणों की जिंदगी मे कोई बदलाव नही दिखता। नतीजा ये हैं कि अब पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के बॉर्डर इलाकों के ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार (Election Boycott) को अपना हथियार बना लिया है।

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पिथौरागढ़. नेताओं और अधिकारियों की चौखट पर फरियाद करके थक चुके ग्रामीणों ने अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है. खासकर पिथौरागढ़ के बॉर्डर इलाकों के ग्रामीण जरूरी सुविधाओं के लिए लोकतंत्र के महापर्व से भी खुद को दूर करने का दावा कर रहे हैं. बॉर्डर तहसील मुनस्यारी के होकरा, गौला और जर्थी के ग्रामीणों ने मोबाइल सेवा के लिए 2019 में बड़ा आंदोलन किया था. उस वक्त अधिकारियों ने ग्राणीणों को भरोसा दिलाया था कि जल्द ही उनके गांव में भी मोबाइल की घंटी बजेगी. लेकिन 2 साल गुजरने पर भी नतीजा सिफर ही है. हालात ये हैं कि अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की वादाखिलाफी के विरोध में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है. होकरा के निवासी हरीश सिंह का कहना है कि 2019 में अधिकारियों ने उनके गांव को मोबाइल सेवा से जोड़ने का भरोसा दिलाया था लेकिन 2 साल गुजरने पर भी कुछ नही हुआ. अब उनके पास चुनाव बहिष्कार का ही रास्ता बचा है.

रोड नहीं तो वोट नहीं
जरूरी सुविधाओं की मांग को लेकर नामिक के ग्रामीणों ने 2012 में भी चुनाव का बॉयकाट किया था जबकि क्वीरी-जीमिया के ग्रामीणों ने 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में हिस्सेदारी नहीं की थी. अब बोना और गोल्फा के ग्रामीणों ने बहिष्कार का ऐलान किया है, जबकि बेलतड़ी के ग्रामीण रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ दो महीने से आंदोलन की राह पर हैं। इन सब आंदोलनों के बावजूद कहीं से भी बेहतरी की कोई सूरत नजर नही आ रही है. डीएम पिथौरागढ़ आशीष चौहान का कहना है कि जिले में अभी 27 गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है. उनकी ओर से सरकार को इस बारे में सूचना दी गई है. शासन के आदेश पर अगली कार्रवाई की जा सकेगी.

बॉर्डर के इलाकों में आज भी लोग आदिमयुग सा जीवन जीने को मजबूर हैं. हालात ये है कि बिजली, पानी, रोड और संचार इनके लिए किसी सपने जैसा हो गया है. हर चुनाव में नेता ग्रामीणों से वादे तो करते हैं लेकिन वादों को हकीकत में तब्दील होता गांव वालों ने कभी नही देखा. यही वजह है कि लोकतंत्र के महापर्व के बहिष्कार को अब ग्रामीण अपना हथियार बनाने को मजबूर हैं.

Tags: 2022 Assembly Elections, Election, Pithoragarh news, Uttrakhand

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