पिथौरागढ: मवेशियों के साथ गुफा में रहने को मजबूर हैं आपदा प्रभावित

भूस्खलन में मकान गिरने के बाद पिथौरागढ़ की मुनस्यारी तहसील के बलवंत सिंह अपनी पत्नी, 5 गायों, 9 बछड़े और 9 बकरियों के साथ एक गुफा (Cave) में रहने को मजबूर हैं. पिथौरागढ़ सीडीओ (Chief Development Officer) ने अब सालभर बाद मदद का भरोसा दिलाया है

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 14, 2019, 5:10 PM IST
पिथौरागढ: मवेशियों के साथ गुफा में रहने को मजबूर हैं आपदा प्रभावित
अपने परिवार और मवेशियों के साथ एक गुफा में रहते हैं बलवंत सिंह
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 14, 2019, 5:10 PM IST
पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के आपदा (Disaster) प्रभावित बलवंत सिंह का मकान पिछली जुलाई में भूस्खलन (Landslide) में गिर गया था. सरकारी मानकों के मुताबिक उनके परिवार को जो पैसे मिले उसमें से आधे उनके भाई के हिस्से में आए. अब बलवंत के हिस्से में आए 50 हजार रूपयों में उनका मकान नहीं बन पाया इसलिए वो अपने परिवार और मवेशियों के साथ एक गुफा में रहने चले गए. पिथौरागढ़ सीडीओ ने मदद का भरोसा दिलाया है.

भूस्खलन में गिरा मकान
पिछले साल जुलाई में इस इलाके में भूस्खलन से कुछ मकान गिर गए थे. इन्हीं प्रभावितों में मुनस्यारी तहसील पापड़ी गांव के बलवंत सिंह भी हैं. बलवंत पिछले करीब साल भर से अपनी पत्नी और मवेशियों के साथ एक गुफा में रहने को मजबूर हैं. पिछले साल जुलाई में हुए भूस्खलन में बलवंत सिंह का मकान जमींदोज हो गया था. उनके परिवार को सरकारी मानकों के मुताबिक 1 लाख 19 सौ की आर्थिक मदद मिली थी, जो बलवंत और उनके भाई में बराबर बंट गई. इतने पैसों में बलवंत का घर नहीं बन पाया इसलिए वो अपने परिवार और मवेशियों के साथ पास की गुफा में रहने चला गया.

Help - भूस्खलन में गिर गया था बलवंत सिंह मकान
भूस्खलन में गिर गया था बलवंत सिंह का मकान


मवेशियों के साथ गुफा में रहने को मजबूर
आधे-अधूरे मकान को पूरा बनाने के लिए जब बलवंत को कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो उसने गांव के पास ही एक गुफा को अपना आशियाना बना लिया. बलवंत पिछले करीब 1 साल से गुफा में अपनी पत्नी, 5 गायों, 9 बछड़े और 9 बकरियों के साथ रहते हैं. बलवंत ने अपने एक बेटे को मुनस्यारी भेज दिया जहां वो मजदूरी करता है. जबकि दूसरा बेटे गोवा में छोटी-मोटी जॉब में है.

निर्धारित मानकों के आधार पर मदद
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इस मामले पर आपदा प्रबंध की तत्कालीन प्रभारी और पिथौरागढ़ सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) सुश्री वंदना का कहना है कि 2018 के सभी आपदा प्रभावितों को मानकों के मुताबिक आर्थिक मदद दे दी गई थी. चूंकि बलवंत का मामला अन्यों से अलग है इसलिए वो इस मामले की जानकारी जुटाकर प्रभावित परिवार को हरसंभव मदद दिलाने की कोशिश करेंगी.

HElp - पिछले करीब 1 साल से इस गुफा में रहते हैं बलवंत सिंह
पिछले करीब 1 साल से इस गुफा में रहते हैं बलवंत सिंह


ये कोई पहला मामला नही है, जब आपदा प्रभावितों को पिथौरागढ़ में घर न मिले हों, कनालीछीना तहसील के छड़नदेव में भी एक ऐसा ही मामला लम्बे समय तक सुर्खियों में रहा. छड़नदेव में करीब 6 साल तक 6 परिवार जंगलों के बीच टेंट में रहे. आखिरकार 6 परिवारों को तो अब पक्के मकान मिल गए हैं, अब ये देखना है कि बलवंत पर सिस्टम कब मेहरबान होता है.

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First published: August 14, 2019, 5:03 PM IST
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