आपदा प्रभावितों को नहीं मिल रही हेली सेवा, पैदल रास्ते हुए तबाह

सरकार ने धारचूला से गुंजी और बूंदी पहुंचने के लिए 3100 रुपये किराया तय किया था. ऐसे में एक व्यक्ति को आने-जाने के लिए 6 हजार 2 सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इन इलाकों में बसे लोग सदियों से पैदल ही सफर कर रहे है, लेकिन इस बार रास्ते बंद होने के कारण इनके पास कोई चारा नहीं बचा.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2018, 2:38 PM IST
आपदा प्रभावितों को नहीं मिल रही हेली सेवा, पैदल रास्ते हुए तबाह
उत्तराखंड में हेली सेवा
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2018, 2:38 PM IST
मानसून के आगमन के बाद से ही धारचूला के उच्च हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोग हर समय मौत को मात दे रहे हैं. इन इलाकों में रास्ते आसमानी आफत के चलते पूरी तरह से जमींदोज है. कहने के लिए तो सरकार ने यहा हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया करायी है, लेकिन महंगी हवाई सेवा के चलते आपदा प्रभावितों के लिए सफेद हाथी ही साबित हो रही है.

चीन और नेपाल सीमा से सटे इन इलाकों में रास्ते पूरी तहर जमींदोज है. आलम यह है कि हजारों की आबादी आए दिन जान जोखिम में डालने के लिए मजबूर है. प्रशासन ने भी खराब रास्तों को देखते हुए नजंग से मालपा तक पैदल आवाजाही में पूरी तरह रोक लगाई है. ऐसे में सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की है, लेकिन महंगी हवाई सेवा होने के कारण प्रभावित इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं.

सरकार ने धारचूला से गुंजी और बूंदी पहुंचने के लिए 3100 रुपये किराया तय किया था. ऐसे में एक व्यक्ति को आने-जाने के लिए 6 हजार 2 सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इन इलाकों में बसे लोग सदियों से पैदल ही सफर कर रहे है, लेकिन इस बार रास्ते बंद होने के कारण इनके पास कोई चारा नहीं बचा. बूंदी में इस बाद दो सितंबर को 12 साल बाद किर्जी महोत्सव भी आयोजित होना है. इस महोत्सव में शामिल होने के लिए भोटिया समुदाय के लोग धारचूला पहुंचने लगे है, लेकिन महंगी हवाई सेवा और बंद पड़े रास्तों ने इन्हें हताश किया है.

2013 में आई त्रासदी में भी इन इलाकों में पैदल मार्ग तबाह हो गए थे, लेकिन तब सरकार ने दो माह तक प्रभावितों को मुफ्त हेली सेवा दी थी. इस बार भी सीमा पर दर्जनों गांव भारी त्रासदी से गुजर रहे हैं. ऐसे में मुफ्त हवाई सेवा की मांग को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों का दौर भी शुरू हो गया है.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर