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पिथौरागढ़: चाइना बॉर्डर पर दो घाटियों में फंसी हजारों जिंदगियां; 100 दिन से सड़क बंद, खाने-पीने का संकट

16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड को तबाह कर डाला.

16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड को तबाह कर डाला.

Uttarakhand News: चाइना बॉर्डर पर मौजूद दो घाटियों का शेष दुनिया से सम्पर्क कटे 100 दिन पूरे हो गए हैं. बॉर्डर की लाइफ लाइन बंद होने से हजारों लोगों की जिंदगी पटरी से उतर गई है. रोजमर्रा की चीजों का संकट पैदा हो गया है. कार्यदाई संस्था के खिलाफ लोगों में गुस्सा है.

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पिथौरागढ़. चाइना बॉर्डर (China Border) पर मौजूद दो घाटियों का शेष दुनिया से सम्पर्क कटे 100 दिन पूरे हो गए हैं. बॉर्डर की लाइफ लाइन बंद होने से जहां हजारों लोगों की जिंदगी पटरी से उतर गई है, वहीं लम्बे समय से रोड बंद होने से इन इलाकों में रोजमर्रा की चीजों का संकट भी पैदा हो गया है. जो कार्यदाई संस्था इस रोड को सही करने में लगी है वह फेल साबित हुई है. सौ दिन में महज 8 किलोमीटर रोड साफ की जा सकी है.

16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड को तबाह कर डाला. बॉर्डर की इस अहम रोड में एक नहीं दर्जनों जगह भारी लैंडस्लाइड हुआ है. हालात ये हैं कि 70 किलोमीटर की इस रोड को कार्यदाई संस्थाएं 100 दिन में सिर्फ 8 किलोमीटर ही खोल पाईं हैं. इस रोड पर कई बैली ब्रिज भी जमींदोंज हुए हैं. कुछ ऐसा ही हाल ब्यास घाटी का भी है. ब्यास घाटी से होकर ही लिपुलेख दर्रे तक रोड पहुंचती है. लेकिन हल्की बारिश में ये रोड भी जगह-जगह बंद हो रही है. बॉर्डर की व्यास, दारमा और चौंदास घाटियां सामरिक नजरिए से भी अहम हैं. इन्हीं सड़कों के जरिए बॉर्डर पर सुरक्षा बल भी पहुंचते हैं.

कार्यदाई संस्थाओं को बदलने की मांग

क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी का कहना है कि कार्यदाई संस्था खासकर बॉर्डर रोड आर्गिनाइजेशन (बीआरओ) का काम काफी घटिया स्तर का है. बीआरओ की खराब कार्यप्रणाली के कारण हजारों की आबादी संकट में है. ऐसे में बेहतर यही होगा कि इन सड़कों को बीआरओ से हटाया जाए. कहने को तो बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और सीपीडब्ल्यूडी ने इन सड़कों में दर्जन भर से ज्यादा मशीनें लगाई हैं, लेकिन ये मशीनें और डेढ़ सौ से ज्यादा मजदूर भी नाकाफी साबित हो रहे हैं. अब हालात ये हैं कि सभी प्रभावित गांवों में रोजमर्रा की जरूरी चीजें लगभग खत्म हो गई हैं. ऐसे में गांवों की छोटी दुकानों में जो बचा-खुचा सामान है उसकी कीमत आसमान में पहुंच गई है.

हेलीकॉप्टर की मदद से पहुंच रहा सामान

सरकार ने बॉर्डर की तीनों घाटियों के लिए एक हेलीकॉप्टर भी दिया है. हेली की मदद से ग्रामीण कुछ जरूरी चीजों को धारचूला से मंगवा भी रहे हैं, लेकिन हजारों की आबादी के लिए ये भी नाकाफी ही साबित हो रहा है. डीएम आशीष चौहान का कहना है कि रोड खोलने के लिए तीनों कार्यदाई संस्थाएं काम कर रही है, लेकिन विषम भौगोलिक हालात होने से दिक्कतें आ रही हैं. इस साल की बरसात ने सबसे ज्यादा तांडव बॉर्डर के इलाकों में मचाया है. बॉर्डर में रहने वालों को अभी और दिक्कतें उठानी ही पड़ेंगी।

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