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नहीं रहे जमीन से जुड़ें उत्तराखंड के पहले मुख्य सचिव आरएस टोलिया
Pithoragarh News in Hindi

Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: December 6, 2016, 3:21 PM IST
नहीं रहे जमीन से जुड़ें उत्तराखंड के पहले मुख्य सचिव आरएस टोलिया
रिटायरमेंट के बाद पिथौरागढ़ से 130 किलोमीटर दूर मुनस्यारी में सूबे के सबसे बड़े नौकरशाह अपने अंतिम दिनों तक रहे टोलिया

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. आरएस टोलिया अब हमारे बीच नहीं रहे. 71 साल की उम्र में टोलिया जी का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया है. टोलिया जहां एक ईनानदार प्रशासक के रूप पूरे देश में जाने जाते थे, वहीं लेखक, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में भी उनका कोई सानी नहीं था. इस सबसे हटकर इस नौकरशाह को बेपनाह पहाड़ प्रेम के लिए भी जाना जायेगा.

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. आरएस टोलिया अब हमारे बीच नहीं रहे. 71 साल की उम्र में टोलिया जी का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया है. टोलिया जहां एक ईनानदार प्रशासक के रूप पूरे देश में जाने जाते थे, वहीं लेखक, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में भी उनका कोई सानी नहीं था. इस सबसे हटकर इस नौकरशाह को बेपनाह पहाड़ प्रेम के लिए भी जाना जायेगा.

रिटायरमेंट के बाद पिथौरागढ़ से 130 किलोमीटर दूर मुनस्यारी में सूबे के सबसे बड़े नौकरशाह अपने अंतिम दिनों तक रहे. टोलिया राज्य के पहले मुख्य सचिव रहने के साथ ही पहले मुख्य सूचना आयुक्त भी रहे. 1971 बैच के आईएएस टोलिया ने अन्य नौकरशाहों और राजनेताओं की तरह अपनी जमीन नहीं छोड़ी. 2006 में मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने के बाद टोलिया ने अपने पैतृक गांव में ही रहने का फैसला लिया, जिस पर वे अंतिम वक्त तक कायम भी रहे. रियाटरमेंट के बाद टोलिया भले ही कईं बड़े जिम्मेदार पदों पर रहे हों, लेकिन उन्होनें अपनी जमीन से नाता नहीं तोड़ा. बुद्विजीवी एवं समाजसेवी डॉ. अजय शुक्ल का कहना है कि टोलिया बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उन्होनें ताउम्र अपना काम सौ फीसदी ईमानदारी के साथ किया.

टोलिया का मानना था कि जब तक पहाड़ों के नेता और अफसर यहां स्थाई निवास नहीं करेंगे यहां की समस्याएं जस की तस रहेंगी. यही नहीं इस पूर्व नौकरशाह का ये भी मानना था कि बड़े ओहदों में रहें लोग अगर पहाड़ से पलायन नही करेंगे तो यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होगें. रिटायर होने के बाद टोलिया ने मुनस्यारी में रहते हुए एक बड़ी लाइब्रेरी बनाई है. जिसका शोध छात्र बेखुबी इस्तेमाल कर रहे हैं. यहीं नहीं हिमालय की वादियों रहकर इन्होनें दो दर्जन से अधिक किताबें भी लिखीं हैं.
ऐसे दौर में जब जरा सा सक्षम पहाड़ी पहाड़ छोड़ने पर आमादा हो, राज्य के इस पूर्व मुख्य सचिव ने लोगों को सीख दी थी कि 'भागो नहीं बल्कि हालातों को बदलों'. उम्मीद की जानी चाहिए कि टोलिया जैसों से आने वाली पीढ़ी प्रेरणा लेगी और वीरान होते पहाड़ों में बचाने के लिए आगे आयेगी.

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First published: December 6, 2016, 3:21 PM IST
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