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Pithoragarh News: विधायक निधि खर्च करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं विधायक, जानें कौन है सबसे पीछे

 पिथौरागढ़ के चारों विधायक सिर्फ 4 करोड़ 86 लाख के ही प्रस्ताव दे पाएं हैं.
पिथौरागढ़ के चारों विधायक सिर्फ 4 करोड़ 86 लाख के ही प्रस्ताव दे पाएं हैं.

पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के विधायक अपनी विधायक निधि (MLA Fund) खर्च करने के मामले में फिसड्डी साबित हो रहे हैं. जबकि जिले में अक्‍सर विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी की बात सामने आती है.

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पिथौरागढ़. भले ही उत्तराखंड (Uttarakhand) के विधायकों की विधायक निधि (MLA Fund)बढ़कर 3 करोड़ 75 लाख हो गई हो, लेकिन पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के विधायक इसे खर्च करने में कंजूस ही साबित हो रहे हैं. आलम यह है कि वित्तीय सत्र समाप्ति की कगार पर है, बावजूद इसके जिले के कई विधायक इसे पूरा खर्च नहीं कर पाएं हैं. साफ है कि विधायक भले ही हर साल अपनी निधि को बढ़ाने के लिए जमकर हो-हल्ला करते हों, लेकिन बात जब इसे समय से खर्च करने की आती है तो वे कंजूस ही साबित होते हैं.

विधायक निधि खर्च करने के मामले में पिथौरागढ़ के विधायक फिसड्डी साबित हो रहे हैं, वो भी तब जब आए दिन विकास कार्यों के लिए पैसों का रोना रोया जाता हो. पिथौरागढ़ जिले के चारों विधायकों को इस साल 7 करोड़ 84 लाख की धनराशि जारी की गई है, लेकिन अब तक माननीय विधायक सिर्फ 4 करोड़ 86 लाख के ही प्रस्ताव दे पाएं हैं. जिला सहायक परियोजना अधिकारी आशीष पुनेठा ने बताया कि जो प्रस्ताव विधायकों की ओर से विभागों को मिले हैं, उन पर प्रगति जारी है. शेष के लिए सभी विधायकों से समय पर प्रस्ताव दिए जाने का आग्रह किया गया है.

जानें कैसा है हाल
धारचूला के विधायक हरीश धामी अब तक सिर्फ 44 लाख के ही प्रस्ताव दे पाएं हैं. जबकि डीडीहाट के एमएलए बिशन सिंह चुफाल ने 1 करोड़ 62 लाख के प्रस्ताव दिए हैं. इसके अलावा गंगोलीहाट की एमएलए मीना गंगोला ने 1 करोड़ 24 लाख तो पिथौरागढ़ की विधायक चंद्रा पंत ने सिर्फ 1 करोड़ 56 लाख के प्रस्ताव दिए हैं. विधायक निधि का ये हाल तब है, जब इस साल कोरोना के कारण हर विधायक की निधि में भारी कटौती की गई है. निधि की इस कछुआ चाल के लिए विधायक स्टाफ की कमी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. भाजपा से लगातार पांचवीं बार विधायक बने बिशन सिंह चुफाल कहते हैं कि निधि का समय से सही इस्तेमाल हो, इसके लिए जरूरी है कि इसका अलग से विभाग खोला जाए. वह कहते हैं कि विधियक निधि से अधिकांश छोटी-छोटी योजनाएं बनती हैं, जिनके लिए डीपीआर आदि बनाने के लिए जरूरी स्टाफ की कमी हो जाती है.
बहरहाल, बात अगर प्रशासनिक स्वीकृति की करें तो चारों विधायकों के आधे ही के कार्यों को ही परमिशन मिल पाई है. विधायक निधि का यह हाल इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि विकास कार्यों के लिए पैसों से ज्यादा नियत का होना जरूरी है.
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