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Pithoragarh: जमींदोज होने की कगार पर खड़े 30 गांव होंगे विस्‍थापित, 14 का बढ़ा इंतजार

पिथौरागढ़ के 30 गांवों के विस्थापन के लिए धनराशि मिल गई है.

पिथौरागढ़ के 30 गांवों के विस्थापन के लिए धनराशि मिल गई है.

Pithoragarh News: पहाड़ों में आपदा का सीजन सिर पर मंडरा रहा है. इस बीच शासन ने पिथौरागढ़ के सिर्फ 30 गांवों को विस्थापित करने की मंजूरी दी है. हालांकि अभी 14 गांवों को विस्थापन का इंतजार है. सरकार ने अब तक 30 गांवों के 321 परिवारों को 6.65 करोड़ की धनराशि जारी की है.

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पिथौरागढ़. पहाड़ों में आपदा का सीजन सिर पर मंडरा रहा है. ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत उन गांवों को है जिन्हें विस्थापित किया जाना है. वहीं, उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ में 44 गांव ऐसे हैं, जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं, लेकिन शासन से सिर्फ 30 गांवों को विस्थापित करने पर सहमती बनी है. हालांकि पिथौरागढ़ के डीएम आशीष चौहान ने बताया कि शेष गांवों के विस्थापन के लिए प्रक्रिया जारी है.

बता दें कि पहाड़ी इलाकों में शायद ही कोई ऐसी बरसात हो जब लोगों के लिए खौफ न बनी हो. बीते सालों में बादल फटने और भूस्खलन के चलते कई गांवों को नामो-निशान मिट चुका है. कुमाऊं में आपदा की सबसे अधिक मार पिथौरागढ़ पर पड़ी है. वहीं, पिथौरागढ़ में आज भी 44 गांवों को तत्काल विस्थापन की दरकार है, लेकिन शासन ने 30 गांवों के 321 परिवारों के विस्थापन को हरी झंडी दिखाई है.

जिला आपदा प्रबंधन ने कही ये बात
पिथौरागढ़ के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेन्द्र महर ने बताया कि 30 गांवों के प्रभावितों को विस्थापन की पहली किस्त जारी कर दी गई है. साथ ही कहा कि पहली किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी किस्त भी जारी की जाएगी. अब तक शासन से 6.65 करोड़ की धनराशि जारी की गई है.

14 गांवों को अभी है विस्थापन का इंतजार
पिथौरागढ़ में सबसे अधिक 8 गांव धारचूला और बंगापानी तहसील में विस्थापित होने हैं. जबकि मुनस्यारी तहसील में 7, तेजम में 4, डीडीहाट में 2 और कनालीछीना में एक गांव को विस्थापन के लिए प्रभावितों को पहली किस्त जारी हो गई है. बावजूद इसके 14 गांवों के लोगों को अभी भी विस्थापन की दरकार है. ये गांव इतने अधिक संवेदनशील हैं कि यहां कभी भी आसमानी आफत तांडव मचा सकती है. ऐसे में प्रशासन ने इन गांवों को विस्थापित करने का प्रस्ताव शासन को तो भेज दिया है, लेकिन शासन स्तर कब पहल शुरू होगी, यह कहना मुश्किल है. वहीं, इस मामले पर पिथौरागढ़ के डीएम आशीष चौहान ने बताया कि शेष गांवों के विस्थापन के लिए प्रक्रिया जारी है.

बहरहाल, दशकों से उत्तराखंड में एक ठोस विस्थापन नीति की दरकार रही है. हालांकि 2013 की आपदा के बाद सरकारें इस दिशा में कुछ गंभीर भी नजर आईं, लेकिन आज भी ऐसे कई गांव हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित नहीं किया जा सका है. हालांकि प्रशासन का दावा है कि विस्‍थापन की प्रक्रिया जारी है.

Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand Disaster

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