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Pithoragarh News : सैलरी मिली नहीं उल्टे एक झटके में गई JOB, सड़कों पर उतरे सैकड़ों हेल्थ वर्कर

विरोध प्रदर्शन करते स्वास्थ्यकर्मी.

विरोध प्रदर्शन करते स्वास्थ्यकर्मी.

उत्तराखंड सरकार नहीं चाहेगी कि चुनाव से पहले सैकड़ों 'कोरोना योद्धा' परिवारों को नाराज़ करे. एक तरफ ये परिवार सड़कों पर न्याय मांग रहे हैं तो सवाल ये भी है कि क्यों सिर्फ पिथौरागढ़ में हेल्थ वर्कर के साथ यह अन्याय हुआ!

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पिथौरागढ़. सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हेल्थ वर्करों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि रातों-रात उनकी नौकरी चली जाएगी. कोरोना संकट के दौरान काम कर कोरोना वॉरियर कहलाने वाले कर्मचारियों की नौकरी हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक झटके में खत्म कर दी. चुनाव में जबकि कुछ ही महीने बाकी हैं, तब उत्तराखंड सरकार के इस तरह के फैसले ने सबको चौंका ज़रूर दिया है और विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा दे दिया है. साल में सैकड़ों लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने पर सियासत भी तेज़ हो चुकी है जबकि सरकार को भरोसा है कि जल्द ही सभी को बहाल कर इस मुद्दे को संभाल लिया जाएगा.

असल में कोरोना की सेकेंड वेव में हेल्थ डिपार्टमेंट ने 284 लोगों को कॉंट्रेक्ट के तहत रखा था, जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और वॉर्ड बॉय शामिल हैं. लगातार 4 महीने तक काम करने पर भी इन्हें सैलरी तो नही मिली, लेकिन नौकरी से छुट्टी ज़रूर हो गई. ऐसे में सैकड़ों की संख्या में बेरोज़गार हुए युवाओं ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है. जॉब से हटाईं गईं रेनू सामंत कहती हैं कि विभाग ने उनके साथ ‘मजाक किया. 4 महीनों तक मानदेय भी नहीं दिया गया.

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अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखते नौकरी से हटाए गए स्वास्थ्यकर्मी.

सिर्फ पिथौरागढ़ में ही हटाए गए हेल्थ वर्कर
सूबे के अन्य ज़िलों में हेल्थ वर्कर पहले की तरह काम कर रहे हैं लेकिन पिथौरागढ़ के हेल्थ वर्करों के साथ ही यह ज़्यादती की गई. कोराना संकट के बीच जिनकी सेवाएं ली गईं, उन कर्मियों को सीएम केयर फंड से सैलरी मिलनी थी, लेकिन यहां न तो 4 महीने की सैलरी मिल पाई और न ही नौकरी बची. वहीं, सरकार की मानें तो हटाए गए सभी हेल्थ वर्करों की बहाली के लिए युद्धस्तर पर कोशिशें जारी हैं.

क्या कह रहे हैं ज़िम्मेदार?
सीएमओ डॉ. एचसी पंत का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्थानीय स्तर पर तय समय के लिए इन हेल्थ वर्करों को अस्थायी तौर पर ही रखा गया था. जब कोरोना के मामले नहीं के बराबर हो गए हैं, तो इनका हटाया जाना जायज़ कदम है. वहीं, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि हटाए गए हेल्थ वर्करों को बहाल करने का रास्ता तलाशा जा रहा है.

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