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Pithoragarh: सड़क का सर्वे करने के लिए JE को लग रही जोंक, डोली में जाते हैं मरीज

Pithoragarh: सड़क का सर्वे करने के लिए JE को लग रही जोंक, डोली में जाते हैं मरीज

Pithoragarh News: कई बार गंभीर मामलों में मरीजों को तत्काल उपचार नहीं मिल पाता, जिस कारण लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है. आजादी के बाद से ही उन्हें सड़क सेवा से वंचित रखने को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है.

रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाई जा रही है. हालांकि जहां आजादी को 75 साल पूरे होने को हैं, तो वहीं अभी भी उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के कई गांव ऐसे हैं, जो गुलामी जैसे हालातों में जी रहे हैं. ये गांव मूलभूत सुविधाओं से आज तक वंचित हैं. ऐसा ही एक गांव बेरीनाग विकासखंड के अंतर्गत आने वाला हिपा (Hipa Village in Pithoragarh) है. इस गांव में सड़क न होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

हिपा गांव के बच्चे हो या महिलाएं या फिर बुजुर्ग, उन्हें जरूरतों का भारी से भारी सामान सिर या पीठ पर ढोकर गांव तक पहुंचाना पड़ता है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के विकासखंड बेरीनाग का हिपा गांव 21 साल के विकास के दावों की पोल खोलता है, जहां आज भी महिलाओं के सिर का बोझ कम नही हो सका है. ग्रामीण चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करके सड़क मार्ग तक पहुंचते हैं. पहाड़ों की स्वास्थ्य सेवा पहले से ही बदहाल पड़ी है, ऐसे में यहां के लोगों द्वारा किसी बीमार या गर्भवती महिलाओं को लोग डोली के माध्यम सेखड़ी चढ़ाई पार करके अस्पताल पहुंचाया जाता है, जोकि वाकई दुखद और कष्टकारी है.

इसके अलावा कई बार गंभीर मामलों में मरीजों को तत्काल उपचार नहीं मिल पाता, जिस कारण लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है. आजादी के बाद से ही उन्हें सड़क सेवा से वंचित रखने को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है.

लोक निर्माण विभाग के एई (AE) संजीव भट्ट से जब इस विषय पर बात की गई, तो उन्होंने बरसात के बाद ही इस सड़क का सर्वे करने की बात कही है. वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि इंजीनियर द्वारा जोंक लगने का बहाना कर फिर से उस सर्वे को टाला जा रहा है.

किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़क संपर्क सबसे मददगार होता है. पिथौरागढ़ के ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां अभी तक लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और आए दिन सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी अनिवार्य जरूरतों की मांग करते आए हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया जाता है और फिर ऐसे में नेताओं द्वारा पलायन रोकने के प्रयास के दावे भी कर दिए जाते हैं.

 

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