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पिथौरागढ़ में इन्ही दिनों बहनों को भिटौला देने आते हैं शिव
Pithoragarh News in Hindi

Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 12, 2017, 8:31 PM IST
पिथौरागढ़ में इन्ही दिनों बहनों को भिटौला देने आते हैं शिव
फोटो- ईटीवी

सदियों से मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है. माना जाता है कि इन दिनों डोले में विराजमान भगवान भोले सोरघाटी के 22 गांवों में रहने वाली अपनी बहनों को भिटौला यानी भेंट देने कैलाश पर्वत से नीचे उतरते हैं.

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छत्तीसगढ़ के पिथौरागढ़ में इन दिनों चेतौल पर्व की धूम है. सदियों से मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है.  माना जाता है कि इन दिनों डोले में विराजमान भगवान भोले सोरघाटी के 22 गांवों में रहने वाली अपनी बहनों को भिटौला यानी भेंट देने कैलाश पर्वत से नीचे उतरते हैं.

आस्था और प्रेम का है यह पर्व

ह भोलेनाथ के प्रति आस्था के साथ भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भी है. आस्था और प्रेम के इस पर्व को लेकर यहां के लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता है.
कुमाऊं में चेतौल पर्व के इस महीने भाइयों द्वारा बहनों को भिटौला देने की सदियों से परंपरा चली आ रही है.

इस महीने भाई  बहनों को  देते हैं गिफ्ट 

भिटौले की इसी परम्परा को पिथौरागढ़ में चेतौल पर्व के रूप में मनाया जाता है. लोगों का विश्वास है कि भिटौले की परम्परा को भगवान शिव भी सदियों से निभाते आ रहे हैं.यह पर्व जहां आस्था और प्रेम को दर्शाता है, वहीं इसमें शिरकत करने वालों का जोश देखते ही बनता है.

डोले को कंधा देने के लिए भक्तों में  रहती है होड़भगवान भोले का डोला आस्था के इस पर्व का खास आकर्षण है, जिसे कंधा देने के लिए भक्तों में होड़ मची रहती है. पूरे चार दिनों तक 22 गांवों में होने वाले इस पर्व को देखने के लिए लोग आज भी दूर-दूर से आते हैं.आधुनिकता के दौर में भी यहां के लोग अपनी जड़ों से जुड़े हैं. शायद यही वजह है कि पहाड़ में आज भी परम्पराएं जिंदा है.

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First published: April 12, 2017, 8:31 PM IST
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