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उत्तराखंडः चीन बॉर्डर को भारत से जोड़ने वाली 3 घाटियों का संपर्क टूटा, संकट में हजारों लोग

उत्तराखंडः चीन बॉर्डर को भारत से जोड़ने वाली 3 घाटियों का संपर्क टूटा, संकट में हजारों लोग

उत्तराखंड में बॉर्डर इलाके की तीनों घाटियों की सड़कें बदहाल हैं.

उत्तराखंड में बॉर्डर इलाके की तीनों घाटियों की सड़कें बदहाल हैं.

Uttarakhand Landslides: उत्तराखंड स्थित भारत-चीन बॉर्डर (India-china Border) की दारमा, व्यास और चौदास घाटियों का सम्पर्क शेष दुनिया से पूरी तरह कट चुका है. सामरिक नज़रिये से देखें या हज़ारों लोगों के आम जीवन के या फिर मौसम के, लोग भारी संकट में घिर चुके हैं.

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पिथौरागढ़. चीन बॉर्डर पर मौजूद तीनों घाटियों का शेष दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है. इंटनेशनल बॉर्डर की लाइफलाइन बंद होने से जहां हज़ारों लोगों की जिंदगी पटरी से उतर गई है, सुरक्षा बलों को भी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं. 16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा, व्यास और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड को तबाह कर डाला था. तकरीबन चार महीने बाद खुली यह रोड एक बार फिर ध्वस्त हो गई है और यहां हालात ये हैं कि माइग्रेट करने वाली हज़ारों की आबादी के सामने कठिन मौसम खड़ा है तो दूसरी तरफ रोज़मर्रा की तमाम चीज़ों की सप्लाई ठप हो चुकी है.

दारमा और चौदास घाटी को जोड़ने वाली रोड को बमुश्किल 110 दिन बाद खोला जा सका था, लेकिन 17 अक्टूबर से हुई तबाही की बरसात ने इस रोड की हालत फिर पतली कर दी. हालात ये हैं कि बॉर्डर की अहम् रोड पर एक नहीं, दर्जनों जगह भारी लैंडस्लाइड हुई है. इस एक सड़क के कारण दर्जनों गांव संपर्क से कट चुके हैं.

तो विधायक धामी करेंगे भूख हड़ताल

कुछ ऐसा ही हाल लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली रोड का भी हो चुका है. ये रोड भी बरसात के बाद बमुश्किल खुल पाई थी. बॉर्डर की ये तीनों घाटियां सामरिक नज़रिए से भी अहम् हैं. इन्हीं सड़कों के ज़रिए बॉर्डर पर सुरक्षा बल भी पहुंचते हैं. क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने चेतावनी दी है कि अगर उनके क्षेत्र की सड़कों को 7 नवम्बर तक नही खोला गया तो वे 8 नवम्बर से डीएम दफ्तर पर भूख हड़ताल शुरू कर देंगे.

धारचूला और मुनस्यारी तहसीलों में सबसे बुरे हाल

कनार, मिलम, थल-मुनस्यारी और जौलजीबी-मुनस्यारी रोड का हाल भी बुरा है. इन इलाकों में फंसे सैलानियों को तो प्रशासन ने हेलीकॉप्टर की मदद से निकाल लिया है, लेकिन असल दिक्कत स्थानीय लोगों की है. इन तीनों घाटियों में 100 से अधिक गांव हैं. ये ग्रामीण सर्दियों में निचले इलाकों में माइग्रेट होते हैं, लेकिन रास्ते बंद होने से ग्रामीण घाटियों में कैद हो गए हैं. लम्बे समय तक रोड बंद होने से तीनों घाटियों में रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें लगभग खत्म हो चुकी हैं. ऐसे में गांवों की छोटी दुकानों में, जो बचा-खुचा सामान है, उसकी कीमतें आसमान पर हैं.

घाटियों को जोड़ने वाली सड़़कों के बुरे हाल, खुलने में लगेगा वक्त

डीएम आशीष चौहान ने बताया कि लिपुलेख बॉर्डर को जोड़ने वाली रोड कुछ दिनों में खुल जाएगी, जबकि दारमा घाटी की रोड को खोलने के लिए सीपीडब्ल्यूडी को कहा गया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि वे खुद मौके पर पहुंचकर हालात का जायज़ा लेने गए हैं. इस साल बारिश ने सबसे ज्यादा तांडव बॉर्डर के इलाकों में मचाया है. तीनों घाटियों को जोड़ने वाली सड़कों के इतने बुरे हाल हैं कि इन्हें खुलने में खासा वक्त लग सकता है.

Tags: India china border news, Uttarakhand landslide, Uttarakhand news

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