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भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित गूंजी में होगा इंडो-चाइना ट्रेड

News18 Uttarakhand
Updated: June 24, 2019, 1:32 PM IST

लिपुलेख दर्रे को पार कर होने वाला इंडो-चाइना ट्रेड भले ही 28 वें साल प्रवेश कर गया हो, लेकिन इस ट्रेड में अब तक चीन का ही दबदबा कायम है.

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भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित गूंजी में  इंडो-चाइना ट्रेड का 28वां आयोजन किया जाएगा. लिपुलेख दर्रे को पार कर होने वाला इंडो-चाइना ट्रेड भले ही 28 वें साल प्रवेश कर गया हो, लेकिन इस ट्रेड में अब तक चीन का ही दबदबा कायम है. आलम ये है कि पिछले 27 सालों में इस इंटरनेशनल ट्रेड में भारतीय व्यापारियों ने निर्यात के मुकाबले आयात सात गुने से भी अधिक किया है. भारत ने जहां चीन से 74 करोड़ 87 लाख का आयात किया है. वहीं निर्यात अब तक सिर्फ 11 करोड़ 98 लाख तक ही सीमित रहा.

चीन के व्यापारी नहीं दिखाते आयात में रुचि

हर साल होने वाले इंडो-चाइना ट्रेड में जहां भारतीय व्यापारियों की मंडी गुंजी में सजती है. वहीं चीन तकलाकोट में अपनी मंडी लगाता है. चीनी मंडी में तो हर बार भारतीय व्यापारियों का तांता लगता है.  लेकिन भारतीय मंडी में 2002 के बाद से चीनी व्यापारी का आना ना के बराबर ही है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 7604 भारतीय व्यापारी चीनी मंडी में व्यापार कर चुके हैं, लेकिन चीन के सिर्फ 84 व्यापारी ही भारतीय मंडी में पहुंचे हैं. वहीं एक बार फिर विदेश मंत्रालय के अधीन होने वाले इस व्यापार के लिए भारत ने ट्रेड पास जारी करना शुरू कर दिए हैं.

वस्तु विनियम के आधार पर होने वाले इस इकलौते इंटरनेशनल ट्रेड को लेकर दोनों देशों के नियम भी काफी सख्त हैं. इस इंडो-चाइना ट्रेड में भारत से गुड़, मिश्री, माचिस, मोमो बनाने के बर्तन, रेडीमेट कपड़े और मसाले का निर्यात होता है तो वहीं चीन से कंबल, रजाई, जैकेट, जूते और गर्म कपड़ों का आयात किया जाता है. एक समय था जब भारतीय व्यापारी तिब्बत से भेड़ और बकरियों का भी आयात करते थे, लेकिन अब उस पर पूरी तरह रोक लग गई है.

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First published: June 24, 2019, 1:21 PM IST
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