उत्तराखंड: भारतीय व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण नहीं खुल पाया इंटरनेशनल पुल

भारतीय व्यापारी पुल को रोज खास समय पर खोलने की मांग कर रहे हैं.
भारतीय व्यापारी पुल को रोज खास समय पर खोलने की मांग कर रहे हैं.

भारतीय व्यापारी (Indian Traders) सिर्फ कुछ समय के लिए पुल खुलने से खासे नाराज हैं. उनकी मांग है कि पुल को हर रोज नियमित समय के लिए खोला जाए, ताकि बॉर्डर इलाकों में कारोबार कुछ हद तक पटरी में लौट सके.

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पिथौरागढ़. भारतीय व्यापारियों (Indian Traders) ने भारत-नेपाल की सहमति होने के बाद भी इंटरनेशनल धारचूला झूलापुल (International Dharchula Jhulapul) को खुलने नहीं दिया. असल में भारतीय व्यापारी सिर्फ इमरजेंसी के लिए इंटरनेशनल पुल खोले जाने से खासे नाराज हैं. दर्जनों की संख्या में भारतीय व्यापारियों ने झूलापुल में पहुंचकर पुल खोलने की कोशिशों पर विराम लगा दिया. भारत-नेपाल को जोड़ने वाले सभी इंटरनेशनल पुल लॉकडाउन के बाद से ही बंद हैं. दोनों मुल्कों के बीच आवाजाही बंद होने के कारण बॉर्डर पर बसे व्यापारियों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है.

असल में दोनों देशों ने 13 नवंबर को एक घंटे के लिए इंटरनेशनल पुल को खोलने पर समहति जताई थी. दोनों मुल्कों के कई लोगों ने एक-दूसरे के देश में जरूरी कार्यों को लेकर जाने के लिए अपनी-अपनी सरकारों से गुहार लगाई थी. लेकिन भारतीय व्यापारियों के विरोध के कारण इंटरनेशनल पुल एक घंटे के लिए भी नहीं खुल पाया. जिस कारण जरूरी कार्यों से एक-दूसरे के मुल्क आने-जाने वालों को तो निराश होना ही पड़ा, साथ ही सैकड़ों लोग जो सुबह से पुल खुलने की आस में बैठे थे उन्हें भी वापस अपने घरों को लौटना पड़ा.

धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेन्द्र थापा का कहना है कि भारतीय व्यापारी सिर्फ कुछ समय के लिए पुल खुलने से खासे नाराज हैं. उनकी मांग है कि पुल को हर रोज नियमित समय के लिए खोला जाए, ताकि बॉर्डर इलाकों में कारोबार कुछ हद तक पटरी में लौट सके.



उत्तराखंड में 275 किलोमीटर के बॉर्डर इलाके में करीब दर्जनभर व्यापारिक मंडियां हैं, जिनका कारोबार दोनों देश के नागरिकों पर निर्भर है. भारतीय व्यापारी इस बात से भी नाराज हैं कि नेपाल ने पहले तो इंटरनेशनल पुल को 15 नवंबर से खोलने पर सहमति जताई थी, लेकिन अंतिम समय में फैसले को बदलते हुए पुलों को खोलने की समय सीमा 15 दिसम्बर कर डाली.
धारचूला में नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा पर तैनात एसएसबी के इंपेक्टर कश्मीर सिंह ने बताया कि दोनों मुल्कों के बीच 13 नवम्बर को 1 घंटे के लिए पुल को खोलने पर सममति हुई थी. जिसके बाद एसएसबी पूरी तैयारी के साथ निर्धारित समय पर पुल को खोलने के लिए पहुंची, लेकिन भारतीय व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण वे पुल को खोल नहीं पाए. जिस कारण नेपाल से भारत आने वाले और भारत से नेपाल जाने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा.
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