नेपाली लड़की की जिंदगी बचाने के लिए भारत में 20 मिनट तक खोल दिया अंतरराष्ट्रीय झूला पुल

नेपाल के समाजसेवियों के जरिये परिजनों ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई.  (फाइल फोटो)
नेपाल के समाजसेवियों के जरिये परिजनों ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई. (फाइल फोटो)

भारत से लगे नेपाल के मल्लिकार्जुन गांव (Mallikarjun Village) की एक बच्ची का लंबे समय से दार्चुला के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. इसी बीच बच्ची की आंतों में गांठें बनने के कारण उसकी हालत नाजुक हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 11:02 AM IST
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पिथौरागढ़. नेपाल (Nepal) चाहे जितना भी विवाद खड़ा करता रहे पर भारत उसके साथ हमेशा दोस्ती का हाथ ही बढ़ना चाहता है. कुछ इसी तरह का ताजा मामला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में भारत- नेपाल बॉर्ड (Indo-Nepal Border) पर सामने आया है. भारत ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक बीमार नेपाली बच्ची का इलाज कराने को लेकर भारत में आने के लिए अंतरराष्ट्रीय झूला पुल (International Jhula Bridge) खोल दिया. खास बात यह है कि भारत ने 20 मिनटों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय झूला पुल खोला था. इसके बाद परिजनों ने भारत में आकर अपनी बेटी का इलाज कराया.

जानकारी के मुताबिक, भारत से लगे नेपाल के मल्लिकार्जुन गांव की एक बच्ची का लंबे समय से दार्चुला के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. इसी बीच बच्ची की आंतों में गांठें बनने के कारण उसकी हालत नाजुक हो गई. उस बचना मुश्किल हो गया, क्योंकि नेपाल में आसपास के इलाके में इलाज का कोई साधन नहीं था. वहीं, भारत में अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद था. ऐसे में परिजन बच्ची को लेकर भारत में इलाज कराने नहीं आ पा रहे थे.

परिजनों ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई
इसी बीच नेपाल के समाजसेवियों के जरिये परिजनों ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई. फिर, भारतीय अफसरों ने मासूम की जिंदगी बचाने के लिए तुरंत झूला पुल खोलने के आदेश दे दिए. वहीं, बच्ची का इलाज हो जाने के बाद परिजनों ने भारतीय अफसरों को आभार जताते हुए कहा कि सच में भारत महान देश है. फिलहाल, प्राथमिक उपचार के बाद बीमार मासूम को धारचूला के बलुवाकोट में रखा गया है. आज बच्ची को बेहतर इलाज के लिए पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा.
पुल से 138 लोगों ने की आवाजाही


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महज 20 मिनट के लिए झूला पुल को खोला गया था. इस दौरान दोनों देशों के 138 लोगों ने पुल से आवाजाही की. एसएसबी के इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह ने बताया कि बीमार बच्ची को इलाज के लिए भारत लाया जाना था. इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी भारत और नेपाल में आवाजाही करनी थी. ऐसे में मामले की गंभीरता को समझते हुए भारत और नेपाल प्रशासन के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई. और उसके बाद दोनों देशों की सहमति से पुल को 20 मिनट के लिए खोल दिया गया.
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