बर्फीले तूफान में यूं चली गई पर्वतारोहियों की जान! पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसपल और फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सीपी भैसोड़ा के मुताबिक, अधिकतर पर्वतारोहियों के छाती और रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी. साथ ही शरीर की कई हड्डियों में फ्रेक्चर थे. यही नहीं फेफड़े भी फट चुके थे.

Shailendra Singh Negi | News18 Uttarakhand
Updated: July 16, 2019, 11:16 PM IST
बर्फीले तूफान में यूं चली गई पर्वतारोहियों की जान! पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा
पर्वतारोहियों की मौत की गुत्‍थी सुलझी.
Shailendra Singh Negi
Shailendra Singh Negi | News18 Uttarakhand
Updated: July 16, 2019, 11:16 PM IST
पिछले दिनों भारत के दूसरे सबसे ऊंचे पर्वत नंदा देवी पर चढ़ाई कर रहे आठ पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी. सात पर्वतारोहियों की बॉडी जल्‍दी रिकवर हो गई थी, तो टीम के लीडर रहे मशहूर ब्रिटिश पर्वतारोही मार्टिन मोरान की बॉडी रिकवर नहीं की जा सकी है. जबकि लोगों के दिमाग में पर्वतारोहियों की मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. सवाल ये है कि आखिर मौत कैसे हुई होगी? बर्फीले तूफान यानि हिमस्खलन (एवलांच) में फंसने के बाद पर्वतारोहियों के साथ क्या हुआ होगा? कहीं नौसिखिए टीम लीडर की वजह से तो नहीं गई सबकी जान या फिर इनके पास बचाव का कोई रास्ता था? यही नहीं, आखिर 21 हजार 250 फीट की ऊंचाई में फंसी इन इंसानी जिंदगियों का अंतिम सामना किन चीजों से हुआ होगा. वहीं इस मामले में न्यूज़ 18 ने ऐसे ही सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की है.

13 मई को शुरु हुआ सफर 26 मई को हुआ खत्म
13 मई को चार ब्रिटिश, दो अमेरिकी, एक ऑस्ट्रेलियाई और एक भारतीय पर्वतारोही ने नंदा देवी ईस्ट पर चढ़ाई शुरु की, लेकिन 26 मई का दिन 'ऑल इज वैल' के साथ खत्म हुआ. इस दिन बेस कैंप में मौजूद साथियों को मार्टिन मोरान की टीम ने यही लास्ट मैसेज भेजा था.

माउंटेनिंग की दुनिया का जाना पहचाना नाम थे  मोरान

माउंटेनिंग के लिहाज से दुनिया के सबसे मुश्किल ट्रैक में से एक नंदा देवी ईस्ट में मारे गए आठ पर्वतारोहियों के दल का नेतृत्व कोई सामान्य पर्वतारोही नहीं कर रहा था बल्कि दल को लीड कर रहे थे दुनिया के टॉप चुनिंदा माउंनेटियर्स में शामिल मार्टिन मोरान. वह 80 से दशक से माउंटेनिंग की दुनिया का जाना पहचाना नाम थे.  मोरान कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और एक चार्टेड अकाउंटेंट थे. मोरान ने साल 1984-85 में स्कॉटिश माउंटेन से माउंटेनिंग की शुरुआत की. उसके बाद मोरान ने पीछे पलट कर नहीं देखा. उन्होंने अल्पाइन पीक, नॉर्वे, हिमालया से जुड़े पर्वतों में 150 से ज्यादा बार चढ़ाई की. खास बात ये है कि मार्टिन की पत्नी भी एक प्रोफेशनल माउंटेनियर हैं. जबकि पति-पत्नी मिलकर स्कॉटलैंड में मोरान मोउंटेन नाम से एडवेंचर कंपनी भी चलाते थे.

मशहूर ब्रिटिश पर्वतारोही मार्टिन मोरान.


यूं हुई मार्टिन और उनके साथियों की मौत!
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हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसपल और फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सीपी भैसोड़ा बताते हैं कि बर्फीले तूफान यानि एवलांच की चपेट में आने के चंद मिनटों बाद ही सातों पर्वतारोही दम तोड़ चुके होंगे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट इसी ओर इशारा कर रही है. हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज लाए गए सभी सात पर्वतारोहियों के शवों का पोस्टमार्टम खुद एचओडी डॉ. भैसोड़ा ने किया. न्यूज़ 18 से पोस्मार्टम रिपोर्ट का खुलासा करते हुए डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि अधिकतर पर्वतारोहियों के छाती और रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी. साथ ही शरीर के कई हड्डियों में फ्रेक्चर थे. यही नहीं फेफड़े भी फट चुके थे. एक पर्वतारोही का तो सिर ही फटा हुआ था.

डॉ. भैसोड़ा बताते हैं,'ऐसा तभी होता है जब कोई तेज रफ्तार चीज इंसान से टकराए, जिसका मतलब बेहद साफ है कि बर्फीला तूफान इतना तेज रहा होगा कि उसके थपेड़ों को पर्वतारोही सहन नहीं कर सके. यही वजह रही कि तूफान की चपेट में आते ही चंद मिनटों में पर्वतारोहियों की मौत हो गई होगी.

पर्वतारोहियों के दल ने बाबा नींब करोरी के दर्शन किए थे.


एवलांच के लिए हमेशा तैयार रहते हैं माउंटेनियर
आठ बार के एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही लवराज धर्मसत्तू बताते हैं कि हिमालय पर आने वाले एवलांच सैकड़ों किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्चार से आते हैं. चढ़ाई के दौरान आपको कुछ नहीं पता कि कब और कैसे हालातों से जूझना पड़ सकता है. कुछ एवलांच बहुत हल्के और कम समय के लिए आते हैं. इनसे उतना खतरा नहीं. हालांकि कुछ इतने तेज होते हैं कि एक्सपर्ट्स से एक्सपर्ट्स माउंटेनियर भी नहीं बच सकता, क्योंकि हालात आपके मुताबिक नहीं होते. इसके बावजूद अगर और फिक्स ट्रैक पर चल रहे हैं तो इस खतरे से थोड़ा बचा सकता है. धर्मसत्तू बताते हैं, 'वैसे भी माउंटेनियरिंग खतरों से खेलने के जूनून वाला खेल है. यहां आपको कई दफा मौत को मात देकर आगे बढ़ना पड़ता है.

नींब करोरी बाबा का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ा था दल
पर्वतारोहियों का दल नैनीताल से पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुआ तो भगवान का आशीर्वाद लेना नहीं भूले. खास बात ये है कि आगे बढ़ने से पहले दल के सभी सदस्य कैंची में बने बाबा नींब करोरी के दर्शन करने पहुंचे थे, जिसकी तस्दीक मार्टिन की कंपनी मोरान माउंटेन ने 13 मई को अपने फेसबुक में पेज में फोटो साझा करके की है.

मार्टिन के लिए परिवार के अंतिम शब्द
मार्टिन के परिवार वालों ने फेसबुक के जरिए आईटीबीपी, इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन और इंडियन एयर फोर्स का शुक्रिया अदा किया है. परिवार वालों ने लिखा हम मान चुके हैं कि जो 8वीं बॉडी रिकवर नहीं हो सकी वो मार्टिन की ही है. मार्टिन के लिए परिवार के लिखे कुछ शब्द इस तरह हैं, 'मार्टिन एक प्यारे पति, पिता, दोस्त और सहकर्मी थे. हम उसकी यादों का सम्मान करते हुए पहाड़ों पर अपनी यात्राएं जारी रखेंगे.'

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First published: July 16, 2019, 3:56 PM IST
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