VIDEO: 146 साल पहले शुरू हुआ था जौलजीबी मेला, अब व्यापार के लिए फेमस

1962 से पहले तक तिब्बती व्यापारी इस मेले में स्वतंत्र रूप से शिरकत करते थे, लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद से तिब्बती व्यापारियों का जौलजीबी मेले में आना बंद हो गया.

Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 15, 2017, 2:41 PM IST
Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 15, 2017, 2:41 PM IST
उत्तराखंड में काली और गोरी नदी के संगम पर अन्तर्राष्ट्रीय जौलजीबी मेला शुरू हो गया है. ये मेला भले ही आज एक व्यापारिक मेले के रूप में विख्यात हो, मगर इसका आगाज 1871 में एक धार्मिक मेले के बतौर हुआ था. अस्कोट रियासत के राजा पुष्कर पाल ने 146 साल पहले ज्वालेश्वर महादेव के मंदिर की स्थापना की थी और तभी से यहां धार्मिक मेले की शुरूआत हुई. आज ये मेला अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक मेले में तब्दील हो गया है.

पिछले सौ सालों से जौलजीबी मेले को अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मेले के रूप में पहचान मिली हुई है. शुरुआत में इस मेले में भारत, नेपाल और तिब्बत के व्यापारी शिरकत करते थे. इस मेले का आगाज भले ही राजा पुष्कर पाल ने किया हो, लेकिन इसको व्यापारिक पहचान दिलाने का काम पुष्कर पाल के बाद गद्दी संभालने वाले व्रिकम और गजेन्द्र पाल ने किया.



1938 से 1947 के बीच 9 वर्षों तक किन्हीं कारणों से मेले का संचालन अंग्रेजी हुकूमत के हाथों में रहा था. स्वतंत्रता के बाद भी अस्कोट रियासत के भारत में विलय होने तक जौलजीबी मेला पाल राजवंश ही संचालित करता रहा, लेकिन 1975 में इसे यूपी सरकार ने अपने हाथों में ले लिया और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन से इसे मनाने की नई परम्परा का आगाज हुआ.

बता दें कि 1962 से पहले तक तिब्बती व्यापारी इस मेले में स्वतंत्र रूप से शिरकत करते थे, लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद से तिब्बती व्यापारियों का जौलजीबी मेले में आना बंद हो गया. आज भले ही तिब्बती व्यापारी इस मेले में शिरकत नहीं करते, लेकिन भारतीय व्यापारी तिब्बत से आयातित सामान यहां जमकर बेचते हैं.

जानकार बताते हैं कि राजशाही के दौर में जौलजीबी मेला स्थल में सेना भर्ती मेला भी लगा करता था. बहरहाल उत्तराखण्ड बनने के बाद इस ऐतिहासिक राजकीय मेले का आयोजन सप्ताह भर होता है, जबकि व्यापारिक गतिविधियां पूरे 10 दिनों तक जारी रहती है. राजकीय मान्यता प्राप्त इस अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में भारत और नेपाल के व्यापारी हर साल शिरकत करते हैं.
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