Exclusive: काली नदी के उद्गम स्रोत, कालापानी, पहुंचा न्यूज़ 18... जानिए यहां क्या है भारत-नेपाल के बीच विवाद

कालापानी को ही भारत काली नदी का उद्गम स्थल मानता है. यहां आईटीबीपी ने काली माता का मंदिर भी बनाया है जिसकी देखरेख आईटीबीपी ही करती है.
कालापानी को ही भारत काली नदी का उद्गम स्थल मानता है. यहां आईटीबीपी ने काली माता का मंदिर भी बनाया है जिसकी देखरेख आईटीबीपी ही करती है.

नेपाल 1990 के बाद से ही कालापानी को अपना बताता आ रहा है जबकि भारतीय सुरक्षा तंत्र यहाँ पर 1955 से ही काबिज है.

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पिथौरागढ़. लिपुलेख सड़क बनने के बाद न्यूज़ 18 ने लिपुलेख का दौरा कर ज़मीनी हक़ीकत को देखा और उसे एक सीरीज़ के रूप में हम आपके सामने पेश कर रहे हैं. आज हम बात कर रहे हैं भारत-नेपाल सीमा पर स्थित काला पानी की जो दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की जड़ है. इस बारे में और बात करने से पहले बता दें कि लिपुलेख का सफ़र कई तरह के रोमांच को खुद में समेटता है. यहां पहुंचना खतरों से खाली नहीं है. ख़ौफ़नाक रास्ते के साथ ही मौसम भी यहां आने वालों की हर पल परीक्षा लेता है लेकिन यह इलाका कई ऐतिहासिक जानकारियों को खुद में समेटे हुए है.

नेपाल का दावा, भारत के सबूत

नेपाल 1990 के बाद से ही कालापानी को अपना बताता आ रहा है जबकि भारतीय सुरक्षा तंत्र यहाँ पर 1955 से ही काबिज है. यही नहीं राजस्व विभाग के अभिलेखों में भी कालापानी की जमीन गर्ब्यांग गांव के नाम दर्ज है. वर्तमान में ये गर्ब्यांग गांव का तोक है जिसमें 1 से लेकर 711 नंबर तक के खेत हैं.



गुंजी से काला पानी की दूरी सिर्फ 10 किलोमीटर है. लिपुलेख की सबसे आसान यात्रा का आगाज़ गुंजी से ही होता है. काली नदी के किनारे कटी सड़क की मदद से सिर्फ आधे घंटे में कालापानी पहुंचा जा सकता है. गुंजी के राजस्व निरीक्षक दिनेश जोशी ने बताया कि ब्रिटिश शासन में 1865 में हुए विकट बंदोबस्त में भी कालापानी भारत का हिस्सा था.
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माना जाता है कि काली मंदिर के गर्भगृह से ही काली नदी निकलती है.


काली मंदिर 

कालापानी को ही भारत काली नदी का उद्गम स्थल मानता है. यहां आईटीबीपी ने काली माता का मंदिर भी बनाया है जिसकी देखरेख आईटीबीपी ही करती है. काली मंदिर के गर्भगृह से ही काली नदी निकलती है.

कालापानी में भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हर वक़्त मुस्तैद नजर आती हैं. यहां सीमाओं की सुरक्षा के लिए सेना के साथ आईटीबीपी और एसएसबी तैनात हैं. कालापानी में 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान बनाए गए बंकर आज भी मौजूद हैं.

नाभीढांग और ओम पर्वत 

कालापानी से करीब 12 किलोमीटर दूर चीन की ओर नाभीढांग है. यह इलाका भारत की सुरक्षा के लिहाज से सबसे अहम है. प्रसिद्ध ओम पर्वत भी यहीं मौजूद है. बर्फ़ से पटे नाभीढांग में साढ़े 17 हज़ार फीट की ऊंचाई पर मौजूद ओम पर्वत अद्भुत है. गगनचुंबी बर्फीले पहाड़ में साक्षात ओम लिखा देखकर कोई भी हैरान हो सकता है.

अत्यधिक ऊँचाई पर होने के कारण यहां माउंटेन सिकनेस का खतरा हर वक़्त बना रहता है. बावजूद इसके भारत के बहादुर सैनिक दिन-रात यहां मौजूद रहते हैं.

नाभीढांग के दाईं ओर करीब 3 किलोमीटर दूर भारत-नेपाल और तिब्बत का ट्राइ-जंक्शन मौजूद है. बर्फ़ से पटा होने के कारण यहां हर वक़्त सुरक्षा बल मौजूद नहीं रहते लेकिन तीनों मुल्कों के सैनिक यहां रेकी ज़रूर करते हैं.

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