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फर्जी मुकदमे से बर्बाद हुई पिथौरागढ़ के मनोज की जिंदगी, बिच्छू घास पर बैठकर की ये मांग

फर्जी मुकदमे से बर्बाद हुई पिथौरागढ़ के मनोज की जिंदगी, बिच्छू घास पर बैठकर की ये मांग

अर्धनग्न

अर्धनग्न अवस्था में बिच्छू घास पर बैठा मनोज.

7 दिनों की भूख हड़ताल के बाद मनोज की नाजुक हालत को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया.

    साल 2010 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में पिथौरागढ़ के मुनस्यारी तहसील के गांव बंगापानी निवासी मनोज कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. 7 साल मुकदमा लड़ने के बाद सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया.

    मनोज अपने साथ हुए अत्याचारों के लिए न्याय की गुहार लगाता भटक रहा है, लेकिन उसे अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है. जिस वजह से मनोज ने अपने साथ हुई बदसलूकी से निराश होकर जिला कलेक्ट्रेट परिसर पिथौरागढ़ में आत्महत्या का प्रयास किया. जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. फिलहाल वह खतरे से बाहर है.

    शासन-प्रशासन की अनदेखी से निराश होकर बीते दिनों मनोज ने पिथौरागढ़ में न्याय की देवी मानी जाने वालीं देवी कोटगाड़ी के मंदिर में अर्धनग्न होकर बिच्छू घास पर बैठते हुए भूख हड़ताल शुरू की. 7 दिनों की भूख हड़ताल के बाद मनोज की नाजुक हालत को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया.

    अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मनोज ने अपनी अनदेखी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया. बिना जांच-पड़ताल के झूठे आरोपों में एक होनहार युवक की पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई. मनोज के साथ जनता दरबार में उस समय में पिथौरागढ़ के एसडीएम संतोष पांडे ने भी मारपीट की थी.

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