इंडो-चाइना बॉर्डर पर पहाड़ काटकर बनी 74 km सड़क, रक्षा मंत्री ने किया लोकार्पण
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इंडो-चाइना बॉर्डर पर पहाड़ काटकर बनी 74 km सड़क, रक्षा मंत्री ने किया लोकार्पण
लिपुलेख रोड का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया लोकार्पण.

12 साल की मेहनत के बाद आखिरकार सीमा सड़क संगठन ने पहाड़ को काटकर 74 किलोमीटर लंबी लिपुलेख रोड का निर्माण कर लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज किया लोकार्पण.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड में चीन और नेपाल सीमा से सटे इलाके में वर्षों से कटी हुई सड़क (Indo-China Border Road) आखिरकार तैयार हो गई है. सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 12 साल की कठिन मेहनत के बाद पहाड़ को काटकर 74 किलोमीटर लंबी घटियाबगड़-लिपुलेख रोड तैयार कर दी है. सामरिक दृष्टि से अहम इस सड़क के बन जाने से न सिर्फ अब मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख पहुंचने में आसानी होगी, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में पर्यटन का भी विकास होगा. शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने दिल्ली से इस सड़क का ऑनलाइन लोकार्पण किया.

चीन और नेपाल सीमा पर वर्षों से कटी हुई 74 किलोमीटर की रोड देश की सुरक्षा के साथ-साथ मानसरोवर यात्रा, इंडो-चाइना ट्रेड और बॉर्डर पर बसे गांवों के लिए अहम साबित होगी. लिपुलेख रोड के उद्घाटन के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेहद कठिन हालात में पहाड़ को काटकर सड़क बनाने के लिए BRO की तारीफ की. उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से न सिर्फ सीमा पर तैनात जवानों को मदद मिलेगी, बल्कि मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की राह भी आसान हो जाएगी.

74 किमी की सड़क बनाने 408 करोड़ खर्च



कठिन पहाड़ियों को काटकर बनाई गई इस सड़क के निर्माण में बीआरओ को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. मात्र 74 किलोमीटर की सड़क काटने में ही अब तक 408 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. फिलहाल सड़क की सिर्फ कटिंग की गई है. वर्तमान में इस सड़क के जरिए सिर्फ सुरक्षाबलों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा. बीआरओ के मुताबिक उम्मीद है कि आने वाले 2 साल में यह सड़क पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी.



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दिल्ली से लिपुलेख रोड का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया.


10 से 12 मीटर चौड़ी होगी सड़क

बीआरओ के चीफ इंजीनियर बिमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क को 10 से 12 मीटर चौड़ा किया जाएगा. साथ ही मालपा और बूंदी में मोटर पुलों का निर्माण भी होना है, जो 2 से 3 महीने के भीतर हो जाएगा. सड़क के चौड़ीकरण के बाद ही डामरीकरण किया जाएगा. उन्होंने बताया कि सड़क से व्यास घाटी के 7 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा. अभी तक इन गांवों में पहुंचने में 2 से 3 दिन का दुर्गम रास्ता पैदल तय करना पड़ता था.

सांसद बोले- बॉर्डर इलाके में आएगा बदलाव

लिपुलेख रोड के निर्माण को लेकर स्थानीय सांसद अजय टम्टा ने भी खुशी जताई. उन्होंने कहा कि इस सड़क से पड़ोसी देश नेपाल से सटे छांगरु और तिंकर गांव में रहने वाले लोगों को भी लाभ होगा. इन दोनों गांवों में भोटिया जनजाति के भारतीय लोग रहते हैं. सांसद अजय टम्टा का कहना है कि लिपुलेख तक सड़क से बॉर्डर इलाकों में बहुत तेजी से बदलाव आएगा. जिस इलाके में बीआरओ सड़क निर्माण कर रहा है, वह सबसे सुंदर इलाकों में एक है. सड़क बनने से पर्यटन कारोबार भी बढ़ेगा और लोगों को रोजगार के मौके भी मिलेंगे.

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