लिपुलेख रोड के बाद भी अटके हैं बॉर्डर में सामरिक महत्व के कई अहम प्रोजेक्ट

चीन और नेपाल बॉर्डर पर मौजूद पिथौरागढ़ में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो दशकों से पूरा होने की राह तक रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चीन और नेपाल बॉर्डर पर मौजूद पिथौरागढ़ में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो दशकों से पूरा होने की राह तक रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

टनकपुर-जौलजीबी मोटरमार्ग और टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन बनने से स्थानीय लोगों के साथ सेना को भी फ़ायदा मिलेगा.

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पिथौरागढ़. चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली लिपुलेख सड़क की कटिंग भले ही भारतीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो लेकिन चीन और नेपाल बॉर्डर पर मौजूद पिथौरागढ़ में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो दशकों से पूरा होने की राह तक रहे हैं. इनमें टनकपुर-जौलजीबी मोटरमार्ग और टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन तो है ही पिथौरागढ़ हवाई सेवा भी है. बॉर्डर को जोड़ने वाली सड़क और रेल लाइन बनने से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ तो मिलता ही सीमा की सुरक्षा भी बेहतर होती लेकिन यह सब ठंडे बस्ते में है. इससे भी कमाल की बात है कि पिथौरागढ़ रेल लाइन एक निजी कंपनी की वजह से ठप है और कोई कुछ करने की स्थिति में नज़र नहीं आ रहा.

राजनीति की भेंट चढ़ी अहम सड़क

टनकपुर-जौलजीबी मोटरमार्ग सामरिक महत्व से अति महत्वपूर्ण है. काली नदी के किनारे बनने वाले इस मोटरमार्ग से मैदानी क्षेत्र टनकपुर से जौलजीबी की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी. यही नहीं इस सड़क के बनने से नेपाल सीमा पर बनी एसएसबी की 31 बीओपी भी सड़क से जुड़ जाएंगी.



135 किलोमीटर की इस सड़क के लिए 733 करोड़ की धनराशि स्वीकृत भी है लेकिन राजनीति की भेंट चढ़ी इस सड़क में बीते 3 सालों से काम अटका है. टनकपुर से रुपालीगाड़ तक 55 किलोमीटर की कटिंग का काम ठेकेदार का टेंडर रद्द होने के बाद से ही बंद है.
क्यों अटकी रेल लाइन?

टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन को भी मनमोहन सिंह की सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का माना था. यही वजह थी कि तत्कालीन यूपीए सरकार में सामरिक महत्व की इस रेल लाइन के सर्वे को हरी झंडी मिली थी. लेकिन 10 साल बीतने के बावजूद धरातल पर कुछ नहीं हुआ.

टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन बनने से चीन और नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों की राह काफी आसानी हो जाती. यही नहीं बॉर्डर पर बसे सैकड़ों गांवों की भी तस्वीर बदल जाती. कुछ ऐसा ही हाल पिथौरागढ़ के लिए शुरू की गई हवाई सेवा का भी है.

एविएशन कंपनी के कारण 'उड़ान' ठप

बीते साल नैनी-सैनी एयरपोर्ट से दिल्ली और देहरादून के लिए हवाई सेवा शुरू की गई थी लेकिन हेरिटेज एविएशन की हवाई सेवा पूरी तरह हवाई साबित हुई है. अगर यह हवाई सेवा नियमित हो जाती तो आर्मी, आईटीबीपी और एसएसबी के जवान देश के किसी भी कोने से आसानी से पिथौरागढ़ पहुंच सकते थे.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा का आरोप है कि एनडीए सरकार उत्तराखंड के बॉर्डर इलाकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नही है. राज्यसभा सांसद का कहना है कि यूपीए के कार्यकाल में सड़क, रेल और हवाई सेवा को लेकर गंभीर प्रयास किए गए थे लेकिन बीते 6 सालों में सामरिक महत्व यह सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिए गए.

अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा से भाजपा के वर्तमान सांसद अजय टम्टा का कहना है कि केंद्र सरकार बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर गंभीर है. मोदी सरकार ने टनकपुर से पिथौरागढ़ तक ऑलवेदर रोड का काम शुरु कराया है जो पूरा होने के कगार पर है.

टम्टा कहते हैं कि सीमांत ज़िले पिथौरागढ़ को उड़ान योजना के तहत हवाई सेवा से भी जोड़ा गया है लेकिन हवाई सेवा संचालित करने वाली हैरिटेज एविएशन की कमियों के कारण इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
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