जिन्हें 45 दिनों तक बैठाकर खिलाया, अब वही लोग पिथौरागढ़ प्रशासन के लिए बने चुनौती, जानें वजह
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जिन्हें 45 दिनों तक बैठाकर खिलाया, अब वही लोग पिथौरागढ़ प्रशासन के लिए बने चुनौती, जानें वजह
घर जा रहे प्रवासियों की स्क्रीनिंग करते कोरोना वॉरियर्स

असल में लॉकडाउन के बाद जो बाहरी लोग यहां फंसे थे, उनके कोरोना पॉजिटिव (Corona positive) होने की कोई संभावना नहीं थी. लेकिन लौट रहे प्रवासियों के पॉजिटिव होने की पूरी आशंका है.

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पिथौरागढ़. लॉकडाउन (Lockdown) के बाद पिथौरागढ़ (Pithoragarh) प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती नेपाल और बाहरी राज्यों के नागरिक हैं. जिले में 10 हजार के करीब बाहरी नागरिकों को एक महीने से भी अधिक वक़्त तक प्रशासन ने न सिर्फ खाना खिलाया बल्कि इनके रहने का भी इंतजाम किया. प्रशासन को सबसे बड़ी राहत तब मिली जब नेपाल सरकार (Nepal Government ) ने अपने नागरिकों की वापसी पर हामी भरी. इसके बाद बाहरी प्रदेशों के मजदूरों को भी रवाना किया गया. करीब 45 दिनों तक हज़ारों लोगों को खिलाने-पिलाने के लिए प्रशासन की गैर सरकारी संस्थाओं ने भी भरपूर मदद की.

वहीं, राहत शिविरों में फंसे लोगों की मदद के लिए हजारों स्थानीय लोग भी दिखाई दिए. लेकिन जब ये  प्रवासी अपने घर वापसी कर रहे हैं तो दिक्कतें ज्यादा दिखाई दे रही हैं. ये दिक्कत इसलिए भी बढ़ रही है कि वापसी करने वालों की संख्या 20 हज़ार से भी अधिक हो सकती है. यही नहीं इनमें से अधिकांश लोग कोरोना रेड जोन से लौट रहे हैं, जिस कारण मदद के लिए आगे आने वाले भी डर रहे हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी जिले अभी तक ग्रीन जोन में शामिल हैं. यही नहीं डेढ़ महीने से अधिक वक़्त तक 10 हज़ार से अधिक बाहरी लोगों की मदद कर समाजसेवियों का भी उत्साह फीका पड़ गया है. सामाजिक कार्यकर्ता ललित मोहन भट्ट बताते हैं कि डिग्री कॉलेज राहत शिविर में उनकी टीम ने करीब 5 सौ नेपाली और बिहार के लोगों को डेढ़ महीने तक अपने संसाधनों से खाना खिलाया. लेकिन अब उनके लिए फिर से इंतजाम करना थोड़ा कठिन है.

उनके कोरोना पॉजिटिव होने की कोई संभावना नहीं थी
असल में लॉकडाउन के बाद जो बाहरी लोग यहां फंसे थे, उनके कोरोना पॉजिटिव होने की कोई संभावना नहीं थी. लेकिन लौट रहे प्रवासियों के पॉजिटिव होने की पूरी आशंका है. प्रशासन के लिए चुनौती ये है कि हज़ारों लोगों को उसे सिर्फ क्वारेंटाइन ही नहीं करना है, बल्कि उनका मेडिकल टेस्ट, कोरोना की जांच, क्वारेंटाइन पीरियड में रहने-खाने का इंतजाम भी करना है. वो भी अपने ही संसाधनों से. डीएम विजय जोगदंडे ने बताया कि हर ग्रामसभा में क्वारेंटिन सेंटर बनाये गए हैं. जिनका जिम्मा ग्राम सभाओं को दिया गया है. शहरों में नगर पालिका और  नगर पंचायतों की मदद से कवारन्टीन सेंटर के अलावा खाने की भी व्यवस्था की गई है.



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