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भारत-नेपाल सीमा विवादः MLA ने कहा- बॉर्डर के 3 गांव हमारे देश का हिस्सा, चीन फैला रहा नफरत
Pithoragarh News in Hindi

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: May 23, 2020, 9:02 AM IST
भारत-नेपाल सीमा विवादः MLA ने कहा- बॉर्डर के 3 गांव हमारे देश का हिस्सा, चीन फैला रहा नफरत
यही नहीं उच्च हिमालयी इलाकों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी इस सड़क के कटने से राह बहुत आसान हो गई है.

बॉर्डर विधानसभा के एमएलए धामी (MLA Dhami) ये भी कहते हैं कि पूरे विवाद की असल जड़ चीन है. चीन के ही इशारों पर नेपाल भारत के खिलाफ आग उगल रहा है.

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पिथौरागढ़. लिपुलेख (Lepulekh) सड़क के उद्धघाटन के साथ शुरू हुई इंटरनेशनल सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. उत्तराखंड (Uttarakhand) की धारचूला विधानसभा के विधायक हरीश धामी (MLA Harish Dhami) ने नेपाल के कब्जे वाले लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर भारत का दावा जताया है. धामी का कहना है कि आज भी नेपाल के इन तीनों इलाकों में गर्ब्यांग के गुंज्याल जाति के लोगों की सैकड़ों नाली जमीन है. जबकि गर्ब्यांग गांव पूरी तरह भारतीय सीमा में मौजूद है. नेपाल लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर अपना दावा जता रहा है. ये तीनों इलाके वर्तमान में धारचूला विधानसभा के हिस्से हैं.

जानकारी के मुताबिक, बॉर्डर विधानसभा के एमएलए धामी ये भी कहते हैं कि पूरे विवाद की असल जड़ चीन है. चीन के ही इशारों पर नेपाल भारत के खिलाफ आग उगल रहा है. विधायक हरीश धामी ये भी आरोप लगा रहे हैं कि नेपाल पूरी तरह चीन का मोहरा बन गया है. जिस कारण दोनों मुल्कों की सदियों पुरानी सांझी संस्कृति को भी खतरा पैदा हो रहा है. 8 मई को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन सीमा को जोड़ने वाली लिपुलेख सड़क का उद्धघाटन किया था. ये सड़क भारत के लिए सामरिक दृष्टि से तो अहम है ही साथ ही मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन स्थलीय व्यापार के लिए भी खासी मददगार साबित होगी.

74 किलोमीटर की इस सड़क को सिर्फ काटने में बीआरओ को 12 साल लगे हैं
हिमालय में बनी 74 किलोमीटर की इस सड़क को सिर्फ काटने में बीआरओ को 12 साल लगे हैं. यही नहीं उच्च हिमालयी इलाकों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी इस सड़क के कटने से राह बहुत आसान हो गई है. लेकिन हैरानी इस बात है कि सड़क का उद्धघाटन होने के साथ ही नेपाल के भारत विरोधी रवैय्ये से हर कोई हैरान है. भले ही नेपाल भारत के इस भू-भाग पर 1991 के बाद से ही दावा जताता रहा हो. लेकिन ये पहली बार है कि भारत के किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि ने भी नेपाल के भू-भाग पर भारत का दावा जताया हो. विधायक हरीश धामी अपने दावे के पक्ष में धारचूला तहसील के राजस्व विभाग के भूमि दस्तावेजों का भी सहारा लेते हैं.



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First published: May 23, 2020, 5:58 AM IST
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