25 हजार गंवाए, दर्ज हुआ मुकदमा फिर भी नहीं खा पाया मछली!

वन विभाग ने आरोपी नरेंद्र पर वन अधिनियम का धारा 1972 के तहत मुकदमा करने के साथ संरक्षित प्रजाति की महाशीर मछली का शिकार करने पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 15, 2019, 11:18 PM IST
25 हजार गंवाए, दर्ज हुआ मुकदमा फिर भी नहीं खा पाया मछली!
नरेंद्र चंद को महाशीर मछली खाने की चाहत पड़ी महंगी.
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 15, 2019, 11:18 PM IST
पिथौरागढ़ के नेपाल से सटे झूलाघाट में काली नदी किनारे पड़ी महाशीर मछली को खाने की चाह नरेंद्र चंद पर भारी पड़ गई. 3 किलो 9 सौ ग्राम की महाशीर मछली को वह अपने बैग में रख घर ले जा रहा था, लेकिन बॉर्डर पर तैनात एसएसबी के जवानों के हत्थे चढ़ गया. जबकि एसएसबी ने आरोपी नरेंद्र को महाशीर मछली के साथ वन विभाग के सुपुर्द कर दिया.

मुकदमा दर्ज होने के साथ लगा जुर्माना
वन विभाग ने आरोपी नरेंद्र पर वन अधिनियम का धारा 1972 के तहत मुकदमा करने के साथ संरक्षित प्रजाति की महाशीर मछली का शिकार करने पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया.

वन विभाग के रेंजर दिनेश जोशी ने बताया,' महाशीर मछली को संरक्षित प्रजाति में रखा गया, जिस कारण इसके शिकार पर रोक है. बरसात के सीजन में ही महाशीर प्रजनन करती हैं और इन्हें प्रजनन के लिए साफ और रेतीली जमीन चाहिए. ऐसे में ये सम्भावना भी है शिकार हुई महाशीर भी प्रजनन के लिए रेतीले मैदान में आई होगी.'

नरेंद्र ने कही ये बात
आरोपी नरेंद्र का कहना है कि उनसे नदी किनारे रेत पर महाशीर मछली को पड़ा देखा तो खाने के लिए अपने घर ले जा रहा था, लेकिन उसने ये सपने में भी नही सोचा था कि एक मछली को खाने की चाह में उसे इस कदर भारी पड़ेगी. जी हां, अब आरोपी को भारी जुर्माने के साथ मुकदमा भी झेलना पड़ेगा. फिलहाल वन विभाग ने आरोपी नरेंद्र को जमानत में रिहा कर दिया है.

आरोपी नरेंद्र का कहना है कि उनसे नदी किनारे रेत पर महाशीर मछली को पड़ा देखा तो खाने के लिए अपने घर ले जा रहा था.

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ऐसी होती है महाशीर मछली
भारत में महाशीर का अर्थ बड़े मुंहवाला से है. लम्बी पतले आकार वाली महाशीर ताजे पानी की सभी शिकारी मछलियों में सबसे लड़ाकू मानी जाती है. इसीलिए इसे नदियों का राजा भी कहा जाता है. महाशीर तेज बहाव वाली नदियों में ही पाई जाती है. ये प्रतिकूल धारा में 20 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से तैरती है. जबकि इसका वजन 7 से 8 किलो तक होता है और उम्र 20 से 25 साल तक होती है.

यहां मिलती है महाशीर मछली
पिथौरागढ़ की काली और सरयू नदी में महाशीर मछली काफी संख्या में पाई जाती है. यह आमतौर पर ठड़ें पानी में रहती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय में तापमान में आई तेजी के कारण महाशीर हिमालय की और जा रही है. साथ ही इसकी संख्या में कमी आ रही है.

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First published: July 15, 2019, 4:29 PM IST
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