पिथौरागढ़: जमींदोज हुआ घर तो राहत शिविर में ली पनाह, बरसात के बाद अब ठंड से होगा सामना

सैकड़ों परिवार बीते दो महीने से राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
सैकड़ों परिवार बीते दो महीने से राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.

पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में आई आपदा के बाद कई लोगों के आशियाने जमींदोज हो गए. आपदा पीड़ित ने फिर राहत शिविर (Relief camp) में पनाह ली. बरसात के बाद अब इन्हें पहाड़ों की सर्दी का सामना करना है. 

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VIJAY UPRETI 

पिथौरागढ़. उत्तराखंड की बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के आपदा प्रभावितों का बरसात के बाद अब कुछ दिनों में आने वाली सर्दियां इम्तहान लेंगी. असल में धारचूला विधानसभा में सैकड़ों आपदा प्रभावित आज भी राहत शिविरों में दिन गुजारने को मजबूर हैं. लेकिन उच्च हिमालयी इलाकों में अब मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलने लगा है. ऐसे में कैसे प्रकृति के मारे सर्दी के सितम (Cold Weather) का सामना करेंगे, ये कोई नहीं जानता है. धारचूला (Dharchula) विधानसभा में आसमानी आफत ने इस बार जैसा तांडव मचाया वैसा कम ही देखने को मिलता है. बारिश के तांडव में जहां दो दर्जन से अधिक लोग अपनी जिंदगी गवां बैठे, वहीं हजारों लोगों की जिंदगी मौत से भी बदतर हो गई है.

आशियाने जमींदोंज होने से सैकड़ों परिवार बीते दो महीने से राहत शिविरों में रहने को मजबूर है. लेकिन अब बरसात खत्म होने से बाद इन्हें सर्दी का सामना करने का डर सता रहा है. आपदा प्रभावितों के लिए बने सभी राहत शिविर उच्च हिमालयी इलाकों में हैं जहां अभी से कड़कड़ाती ठंड सितम ढाने लगी है. स्थानीय विधायक हरीश धामी का कहना है कि सरकार प्रभावितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है. आपदा आने के 2 महीने बाद मुख्यमंत्री को प्रभावित इलाकों का दौरा करने की याद आई है जिससे समझा जा सकता है कि सरकार कितनी गंभीर है.



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राहत शिविर में 140 परिवार

फिलहाल प्रशासन ने बरम, मवानी-दवानी और सेरा के राहत शिविरों में 140 परिवारों को ऱखा है. जबकि धापा के प्राइमरी स्कूल में 60 से अधिक परिवार दिन गुजार रहे हैं. बरसात ने इन आपदा प्रभावितों का सबकुछ उजाड़ डाला है. लेकिन जिंदगी की असली जद्दोजहद अब सर्दी से निपटना है. हालांकि प्रशासन प्रभावितों के दर्द कम करने का दावा तो कर रहा है लेकिन ये दावा कितना धरातल पर उतरेगा कोई नही जानता. डीएम पिथौरागढ़ विजय जोगदंडे का कहना है कि राहत कैम्पों में सर्दी से निपटने के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं. किसी भी प्रभावित को कोई दिक्कत जाड़ो के सीजन में नहीं होगी. भारी बरसात के बाद अब ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इस बार की सर्दियां भी जमकर सितम ढाएंगी. ऐसे में कैसे आपदा प्रभावित इसका सामना करेंगे ये तो वक्त ही बताएगा. लेकिन ये तय है कि जब तक इन्हें स्थाई आशियाना नहीं मिलता है, ऐसी दिक्कतों से प्रभावितों को हर बार दो-चार होना ही पड़ेगा.
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