नेपाल ने काली नदी के ऊपर चट्टान काटकर बनाया रास्ता... पैदल आवाजाही के लिए भारत पर निर्भरता खत्म

घाटीबगड़ से छांगरु तक 550 मीटर के इस रास्ते की चौड़ाई 2 मीटर है. सीमा की सुरक्षा के लिहाज से भी यह रास्ता बेहद अहम है.
घाटीबगड़ से छांगरु तक 550 मीटर के इस रास्ते की चौड़ाई 2 मीटर है. सीमा की सुरक्षा के लिहाज से भी यह रास्ता बेहद अहम है.

अब तक भारत और नेपाल के बीच काली नदी पर बने पुल से नेपाली नागरिक धारचूला आते थे और फिर तिंकर, छांगरु जाते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 1:26 PM IST
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देहरादून. भारत के लिपुलेख तक सड़क का उद्घाटन करने के बाद चीन की शह पर नेपाल भारत से लगती सीमा पर तेज़ी से निर्माण कार्य कर रहा है. नेपाली सरकार तो भारतीय इलाकों को नेपाल में दिखाते हुए नए नक्शे तक जारी कर चुकी है. नेपाली सेना भारत से लगती सीमा पर 6 नई बीओपी बना चुकी है. अति-सक्रियता दिखाते हुए नेपाल ने काली नदी के ऊपर चट्टान काटकर साढ़े पांच सौ मीटर का एक रास्ता तैयार किया है. यह रास्ता तैयार होने के बाद अब नेपाल के दार्चुला से तिंकर और छांगरु जाने के लिए नेपाल की भारत पर निर्भरता खत्म हो जाएगी.

सुरक्षा के लिहाज से अहम 

नेपाल ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर इस बारे में बताया है. बता दें कि नेपाल के दार्चुला के लोग पहले तिंकर और छांगरु जाने के लिए भारत के धारचूला के रास्ते पर निर्भर थे. भारत और नेपाल के बीच काली नदी पर बने पुल से नेपाली नागरिक धारचूला आते थे और फिर तिंकर, छांगरु जाते थे. सदियों से यह ऐसे ही चला आ रहा था.



अब चीन के उकसावे की वजह से भारत के साथ रिश्तों में आई तल्खी के बाद नेपाली सेना ने दार्चुला से पैदल रास्ता तैयार किया है, जो छांगरु  तक जाता है. काली नदी के किनारे भारी चट्टान को काट कर यह रास्ता बनाया गया है. घाटीबगड़ से छांगरु तक 550 मीटर के इस रास्ते की चौड़ाई 2 मीटर है. सीमा की सुरक्षा के लिहाज से भी यह रास्ता बेहद अहम है.
क्या कह रहा है नेपाल

नेपाली भाषा में जारी इस वीडियो में कहा गया है, "नेपाली सेना ने घाटीबगड़ से छांगरु तक का रास्ता बना लिया है. इस रास्ते के बनने के बाद नेपाल के छांगरु और तिंकर गांव के लोग विदेशी रास्ते पर निर्भर नहीं रहेंगे." खास बात यह है कि करीब दो मिनट के इस वीडियो में कहीं भी भारत का नाम नहीं लिया गया है बल्कि भारत के लिए विदेश शब्द का इस्तेमाल किया गया है.

वीडियो में आगे कहा गया है, "अपने नागरिकों की दिक्कतों को देखते हुए नेपाली सरकार ने सेना के साथ अपने लोगों के लिए रास्ता बनाने का लक्ष्य इसी साल जून में लिया था. इस रास्ते को तैयार करने एक करोड़, 8 लाख, 36 हजार नेपाली रुपये खर्च हुए हैं. 4 महीने के समय में कई मुश्किलों के बीच यह रास्ता तैयार हुआ है. अब नेपाल के दार्चुला जिले के लोगों को विदेशी भूमि (भारत) का इस्तेमाल करने की बाध्यता नहीं रहेगी."
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