कालापानी के समीप नेपाल ने शुरू की BOP खोलने की तैयारी, बॉर्डर पर रखना चाहता है नजर

नेपाल का उद्देश्य भारतीय सीमा के नजदीक बीओपी खोल भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है. (सांकेतिक फोटो)
नेपाल का उद्देश्य भारतीय सीमा के नजदीक बीओपी खोल भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है. (सांकेतिक फोटो)

नेपाल (Nepal) कालापानी क्षेत्र में बीओपी खोलने की तैयारी में है. वह जल्द दार्चुला जिले के व्यास गाऊपालिका एक स्थित तल्लोकोवा में बीओपी स्थापित करने जा रहा है

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पिथौरागढ़.  भारत नेपाल के साथ दोस्ती का संबंध रखना चाहता है, लेकिन नेपाल (Nepal) है कि अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा है. अब खबर है कि नेपाल उत्तराखंड के कालापानी (Kalapani) में बार्डर के करीब बीओपी (BOP)  खोलने की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहा है. ऐस कर के वह भारतीय सुरक्षा प्रहरियों पर अपनी नजर रखना चाहता है. साथ ही वह अपनी फौज की शक्ति भी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है. वहीं, उसके इस प्रयास से पहले ही भारतीय सेना (Indian Army) भी चौंकना हो गई है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल कालापानी क्षेत्र में बीओपी खोलने की तैयारी में है. वह जल्द दार्चुला जिले के व्यास गाऊपालिका एक स्थित तल्लोकोवा में बीओपी स्थापित करने जा रहा है. वहीं, सुरक्षा जानकारों का कहना है कि भारत की सैन्य गतिविधियां तेज करने के बाद नेपाल सरकार भी भारत को घेरने की तैयारी में है. यही वजह है कि वह जल्देबाजी में बॉर्डर पर काम कर रहा है. नेपाल के स्थानीय नेताओं के मुताबिक, नेपाल बीओपी खोलने के लिए भूमि चिह्नित कर रहा है. नेपाल का उद्देश्य भारतीय सीमा के नजदीक बीओपी खोल भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है.

नेपाल भारत से लगती सीमा पर तेज़ी से निर्माण कार्य कर रहा है
बता दें कि बीते 8 अक्टूबर को खबर सामने आई थी कि भारत के लिपुलेख तक सड़क का उद्घाटन करने के बाद चीन की शह पर नेपाल भारत से लगती सीमा पर तेज़ी से निर्माण कार्य कर रहा है. नेपाली सेना भारत से लगती सीमा पर 6 नई बीओपी बना चुकी है. अति-सक्रियता दिखाते हुए नेपाल ने काली नदी के ऊपर चट्टान काटकर साढ़े पांच सौ मीटर का एक रास्ता तैयार किया है. यह रास्ता तैयार होने के बाद अब नेपाल के दार्चुला से तिंकर और छांगरु जाने के लिए नेपाल की भारत पर निर्भरता खत्म हो जाएगी.
सुरक्षा के लिहाज से अहम


नेपाल ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर इस बारे में बताया है. बता दें कि नेपाल के दार्चुला के लोग पहले तिंकर और छांगरु जाने के लिए भारत के धारचूला के रास्ते पर निर्भर थे. भारत और नेपाल के बीच काली नदी पर बने पुल से नेपाली नागरिक धारचूला आते थे और फिर तिंकर, छांगरु जाते थे. सदियों से यह ऐसे ही चला आ रहा था.
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