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पिथौरागढ़: नेपाल से भारत आने वालों का होगा कोरोना टेस्ट, फर्जी रिपोर्ट लाने की खबरों के बाद सख्ती

पिथौरागढ़: नेपाल से भारत आने वालों का होगा कोरोना टेस्ट, फर्जी रिपोर्ट लाने की खबरों के बाद सख्ती

सीएमओ डॉ. हरीश पंत ने बताया कि अब नेपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी को भी भारत में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा.

Indo-Nepal Border: कोरोना की फर्जी जांच रिपोर्ट लेकर नेपाल से भारत आने की खबरों के बाद प्रशासन ने की सख्ती. SSB की सूचना के आधार पर अब सिर्फ कोरोना निगेटिव रहने पर ही बाहरी लोगों को प्रवेश दिया जाएगा.

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पिथौरागढ़. प्रशासन ने नेपाल की कोविड जांच रिपोर्ट (Covid Test Report) मानने से साफ इंकार कर दिया है. नए फैसले के बाद अब नेपाल (Nepal) से आने वाले सभी लोगों की भारत में कोविड जांच होगी. जांच में नेगेटिव आने पर ही नेपाली नागरिकों को भारत आने दिया जाएगा. असल में बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट में कोरोना की पहली वेब में इंटरनेशनल बॉर्डर को पूरी तरह सील किया गया था. किसी को भी आने-जाने की परमिशन नहीं दी गई थी.

पहली वेब कम होने के बाद दोनों मुल्कों ने बॉर्डर को खोला गया. जबकि दूसरी वेब में इंटरनेशनल बॉर्डर पर दोनों मुल्कों ने एंटीजन रिपोर्ट के आधार पर अपने देश में आने की परमिशन दी थी. लेकिन अब नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल ने प्रशासन को जानकारी दी है कि नेपाल से आने वाले अधिकांश लोगों की कोविड जांच रिपोर्ट फर्जी है. एसएसबी की सूचना के बाद प्रशासन ने काफी सख्त रुख अपनाते हुए, नेपाल की जांच रिपोर्ट को अमान्य करार दिया है.

सीएमओ डॉ. हरीश पंत ने बताया कि अब नेपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी को भी भारत में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा. सभी इंटरनेशनल पुलों पर हेल्थ डिपार्टमेंट की टीमों को तैनात किया जा रहा है. ये टीमें नेपाल से आने वालों का एंटीजन टेस्ट करेंगी. नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही भारत में प्रवेश करने दिया जाएगा. पॉजिटिव आने वाले को पुल से ही नेपाल वापस भेजा जाएगा. पिथौरागढ़ डिस्ट्रिक में सीतापुल, धारचूला, जौलजीबी, बलुआकोट, डोडा और झूलाघाट में झूला पुलों की मदद से नेपाल जाया जा सकता है.

संक्रमित 7362 मरीजों की मौत भी अब तक हो चुकी है
बीते दिनों उत्तराखंड में कोरोना के 41 नए मामले आने की खबर आई थी, वहीं 64 मरीज स्वस्थ हुए हैं. शुक्रवार को कोरोना संक्रमित किसी मरीज की मौत नहीं हुई है. अब तक राज्य में कोरोना के 342023 मामले आए हैं. इनमें से 327979 (95.89 फीसद) लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं. फिलवक्त यहां पर कोरोना के 645 सक्रिय मामले हैं. कोरोना संक्रमित 7362 मरीजों की मौत भी अब तक हो चुकी है.

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Pithoragarh News : सैलरी मिली नहीं उल्टे एक झटके में गई JOB, सड़कों पर उतरे सैकड़ों हेल्थ वर्कर

Pithoragarh News : सैलरी मिली नहीं उल्टे एक झटके में गई JOB, सड़कों पर उतरे सैकड़ों हेल्थ वर्कर

उत्तराखंड सरकार नहीं चाहेगी कि चुनाव से पहले सैकड़ों 'कोरोना योद्धा' परिवारों को नाराज़ करे. एक तरफ ये परिवार सड़कों पर न्याय मांग रहे हैं तो सवाल ये भी है कि क्यों सिर्फ पिथौरागढ़ में हेल्थ वर्कर के साथ यह अन्याय हुआ!

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पिथौरागढ़. सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हेल्थ वर्करों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि रातों-रात उनकी नौकरी चली जाएगी. कोरोना संकट के दौरान काम कर कोरोना वॉरियर कहलाने वाले कर्मचारियों की नौकरी हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक झटके में खत्म कर दी. चुनाव में जबकि कुछ ही महीने बाकी हैं, तब उत्तराखंड सरकार के इस तरह के फैसले ने सबको चौंका ज़रूर दिया है और विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा दे दिया है. साल में सैकड़ों लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने पर सियासत भी तेज़ हो चुकी है जबकि सरकार को भरोसा है कि जल्द ही सभी को बहाल कर इस मुद्दे को संभाल लिया जाएगा.

असल में कोरोना की सेकेंड वेव में हेल्थ डिपार्टमेंट ने 284 लोगों को कॉंट्रेक्ट के तहत रखा था, जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और वॉर्ड बॉय शामिल हैं. लगातार 4 महीने तक काम करने पर भी इन्हें सैलरी तो नही मिली, लेकिन नौकरी से छुट्टी ज़रूर हो गई. ऐसे में सैकड़ों की संख्या में बेरोज़गार हुए युवाओं ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है. जॉब से हटाईं गईं रेनू सामंत कहती हैं कि विभाग ने उनके साथ ‘मजाक किया. 4 महीनों तक मानदेय भी नहीं दिया गया.

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अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखते नौकरी से हटाए गए स्वास्थ्यकर्मी.

सिर्फ पिथौरागढ़ में ही हटाए गए हेल्थ वर्कर
सूबे के अन्य ज़िलों में हेल्थ वर्कर पहले की तरह काम कर रहे हैं लेकिन पिथौरागढ़ के हेल्थ वर्करों के साथ ही यह ज़्यादती की गई. कोराना संकट के बीच जिनकी सेवाएं ली गईं, उन कर्मियों को सीएम केयर फंड से सैलरी मिलनी थी, लेकिन यहां न तो 4 महीने की सैलरी मिल पाई और न ही नौकरी बची. वहीं, सरकार की मानें तो हटाए गए सभी हेल्थ वर्करों की बहाली के लिए युद्धस्तर पर कोशिशें जारी हैं.

क्या कह रहे हैं ज़िम्मेदार?
सीएमओ डॉ. एचसी पंत का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्थानीय स्तर पर तय समय के लिए इन हेल्थ वर्करों को अस्थायी तौर पर ही रखा गया था. जब कोरोना के मामले नहीं के बराबर हो गए हैं, तो इनका हटाया जाना जायज़ कदम है. वहीं, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि हटाए गए हेल्थ वर्करों को बहाल करने का रास्ता तलाशा जा रहा है.

उत्तराखंड : चीन बॉर्डर की तीनों घाटियों का बुरा हाल, 75 दिनों से कटा है संपर्क

उत्तराखंड : चीन बॉर्डर की तीनों घाटियों का बुरा हाल, 75 दिनों से कटा है संपर्क

Uttarakhand Monsoon : पिथौरागढ़ की व्यास, दारमा और चौंदास घाटियों में इस बार बरसात ने जमकर कहर ढाया है. दारमा घाटी को जोड़ने वाली रोड 75 दिनों से बंद है. यहां हज़ारों की आबादी के​ लिए कैसे संकट खड़ा हो गया है, जानिए.

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पिथौरागढ़. चाइना बॉर्डर को जोड़ने वाली तीनों घाटियों का शेष दुनिया से सम्पर्क लम्बे समय से कटा हुआ है. हालात ये हैं कि दारमा घाटी को जोड़ने वाली रोड ढाई महीने से बंद है जबकि ब्यास और चौंदास घाटियों का भी बुरा हाल है. अब चिंता की बात ये है कि इन घाटियों में रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें भी खत्म होने लगीं हैं और नागरिकों के लिए सप्लाई तकरीबन ठप है. हज़ारों की आबादी बेहद मुश्किल स्थितियों में फंसी हुई है और बदतर हाल उनकी है, जो इन कठिन हालात में बीमारी की चपेट में हैं. यही नहीं, बॉर्डर की सुरक्षा पर तैनात जवानों को भी सप्लाई प्रभावित होने के चलते अब दिक्कतें पेश आ रही हैं.

बीते 16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड तबाह कर डाली थी. बॉर्डर की इस अहम रोड पर दर्जनों जगह इतना भारी लैंडस्लाइड हुआ कि उसे हटाना भी आसान नहीं था. कई स्थानों पर बैली ब्रिज भी बरसात की भेंट चढ़ गए हैं. कुछ ऐसा ही हाल ब्यास घाटी का भी है. ब्यास घाटी से होकर ही लिपुलेख बॉर्डर की रोड निकलती है. लेकिन इस बरसात ने बीआरओ की इस रोड की पोल खोल दी. यहां भी एक नहीं, दर्जनों स्पॉट ऐसे हैं, जहां पूरी रोड ही बारिश ने निगल ली.

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तीनों घाटियों की बंद सड़कें सामरिक नज़रिये से भी अहम हैं. इन्हीं सड़कों से बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बल भी सीमाओं की सुरक्षा के लिए जाते हैं. दारमा घाटी के रहने वाले जयेन्द्र फिरमाल बताते हैं कि पूरी घाटी के लोग खासी दिक्कतों में हैं. धारचूला से लोग अपने गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन रोड और पैदल रास्तों का नामोनिशां तक नहीं है.

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उत्तराखंड में घाटियों के रास्ते खोले जाने के लिए काम जारी है, लेकिन हालात मुश्किल बताए जा रहे हैं.

कैसे संकट से जूझ रहे हैं लोग?
रोड बंद होने से तीनों घाटियों के 90 से अधिक गांवों का शेष दुनिया से सम्पर्क कटा है. कई गांवों के तो हालात इस कदर खराब हैं कि गांव की छोटी दुकानों में जो बचा-खुचा सामान है, उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई है. सबसे अधिक संकट में वो लोग हैं, जो बीमारी की चपेट में हैं. कहने को तो सरकार ने बॉर्डर की तीनों घाटियों के लिए एक हेलीकॉप्टर भी दिया है लेकिन हजारों की आबादी के लिए वो नाकाफी ही साबित हो रहा है.

एडीएम फिंचाराम चौहान का कहना है कि सड़कों को खोलने के लिए बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और सीपीडब्ल्यूडी तीनों एंजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं लेकिन तबाही इतनी ज्यादा हुई है कि कम समय में सड़कों को खोल पाना आसान नही है. इस साल की बरसात ने सबसे ज्यादा तांडव बॉर्डर के इलाकों में मचाया है. अधिकारियों और स्थानीय लोगों की बातों से अंदेशा यही है कि तीनों घाटियों को जोड़ने वाली अवरुद्ध सड़कों के जल्द खुल पाने के आसार नहीं हैं.

आपदाग्रस्त धारचूला में एक और आफत, एक गैस सिलेंडर के लिए चुकाने पड़ रहे 2500 रुपये

आपदाग्रस्त धारचूला में एक और आफत, एक गैस सिलेंडर के लिए चुकाने पड़ रहे 2500 रुपये

Uttarakhand News : आप धारचूला से चीन बॉर्डर से सटे गांवों तक जाते हैं, तो प्रति यात्री जितना खर्च होता है, एक एलपीजी सिलेंडर के लिए भी उतना ही भाड़ा लग रहा है. जानिए कैसे तीन गुनी कीमत में सिलेंडर लेने पर ग्रामीण मजबूर हैं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 02, 2021, 10:46 IST
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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत गांवों में ‘गरीबी में आटा गीला होने’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. पिथौरागढ़ ज़िले ने हाल में बादल फटने के चलते प्राकृतिक आपदा का दंश झेला है. हादसों में जानो माल का नुकसान होने के साथ ही यहां कई संपर्क मार्ग तक ध्वस्त हो चुके हैं. इसका असर यह है कि चीन सीमा से सटे गांवों तक एक रसोई गैस सिलेंडर पहुंच पाना या तो असंभव हो गया है या फिर ग्रामीणों को एक सिलेंडर के लिए 2500 से 3000 रुपये तक का खर्च उठाना पड़ रहा है. आपदा और महंगाई से पहले ही जूझ रहे ग्रामीणों के लिए ये नई आफत किस तरह खड़ी हो गई है, जानिए.

भौगोलिक परिस्थितयों को पहले समझिए कि धारचूला से चीन सीमा से सटे अंतिम गांव कुटी तक की दूरी करीब 120 किलोमीटर की है. एक यात्री को धारचूला से कुटी तक जाने के लिए 1200 रुपये करीब खर्च करने पड़ते हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो अब एक यात्री जितना ही किराया सिलेंडर का देना पड़ रहा है. कई जगहें चूंकि सड़कें बंद पड़ी हैं, तो सिलेंडर ढोने के लिए मज़दूरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसका शुल्क अलग है.

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पिथौरागढ़ समेत उत्तराखंड के कई इलाकों में अनेक रास्ते बंद पड़े होने की खबरें हैं.

कैसे तीन गुना हो जाती है कीमत?
पिथौरागढ़ में भारी बारिश और भूस्खलन जैसी घटनाओं के चलते कई रास्ते बंद हैं यानी दूरस्थ सीमांत गांव संपर्क से तकरीबन कटे हुए हैं. एक स्थानीय व्यक्ति के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि 14 गांवों में यह आलम है कि एक सिलेंडर 2500 रुपये में पड़ रहा है. वहीं कुटी के एक निवासी की मानें तो सात गांवों में तो 900 रुपये के सिलेंडर के लिए 3000 रुपये तक की कीमत भी देनी पड़ रही है. सोबला के एक निवासी के अनुसार सिलेंडर ही नहीं, अन्य चीज़ें और खाद्य सामग्री के दाम भी तिगुने हो गए हैं.

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इस समस्या के समय में एक तरफ ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को कम से कम ​दो सिलेंडर सरकार मुफ्त दे, तो वहीं, प्रशासन इसे कुछ समय की दिक्कत बता रहा है. धारचूला के एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला के हवाले से अमर उजाला की खबर में लिखा गया कि ‘सड़कें खुलने के बाद यह दिक्कत नहीं होगी.’ लेकिन यह क्या इतनी आसान बात है? इसका अंदाज़ा इस फैक्ट से लगाइए कि तवाघाट-सोबला सड़क करीब ढाई महीने से बंद है.

सीएम धामी ने किया धारचूला के आपदाग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वे, केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट भी लेंगे जायजा

सीएम धामी ने किया धारचूला के आपदाग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वे, केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट भी लेंगे जायजा

Uttarakhand Calamity : पिथौरागढ़ में दो दिन पहले भारी बारिश के चलते जो तबाही हुई, उसका दर्द अभी कम नहीं हुआ है. यहां जनजीवन सामान्य नहीं हुआ है और ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीड़ितों से मिलने पहुंचे.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 01, 2021, 14:41 IST
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देहरादून. पिथौरागढ़ ज़िले के धारचूला में सोमवार को बादल फटने के बाद हुई तबाही का जायज़ा लेने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हवाई दौरा किया. हवाई सर्वे के माध्यम से धामी ने आपदा प्रभावित इलाकों में नुकसान का आंकलन किया. इस सर्वे के बाद धामी ने माना कि प्राकृतिक आपदा के चलते इलाके में जानो माल का भारी नुकसान हुआ और उन्होंने पुष्टि की कि सात लोगों का कोई पता नहीं है. धामी ने कहा कि ‘हम इस इलाके में जीवन के सामान्य गति पकड़ने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं.’

हवाई सर्वे के दौरान विमान से धारचूला के प्रभावित एलागाढ़ इलाके का दौरा करने के बाद जुम्मा एयरबेस पर उतरे धामी ने पीड़ितों से मुलाकात भी की. एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उन्होंने ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि तत्काल पीड़ितों को राहत देने के उपाय किए जाएं. जिन परिवारों के लोग मारे गए हैं, उन्हें 4 लाख रुपये की मुआवज़ा देने का ऐलान भी धामी ने किया. जुम्मा गांव से लौटकर धामी ने धारचूला में पीड़ितों से मुलाकात की. यहां उन्होंने पीड़ितों को 1 लाख रुपये की मदद का आश्वासन दिया.

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केंद्रीय मंत्री भट्ट भी करेंगे दौरा
पिथौरागढ़ में भारी बारिश से हुई तबाही का जायज़ा लेने के लिए रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट का भी कार्यक्रम है. खबरों के मुताबिक बुधवार को सांसद अजय टम्टा व सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ जीएम के साथ भट्ट को निरीक्षण करना है. बताया जाता है कि इस दौरे से पहले पिथौरागढ़-तवाघाट रोड के बारे में भट्ट मंगलवार को जानकारी लेकर चर्चा कर चुके थे.

पिथौरागढ़ में भारी बारिश से 3 मकान ढहे, मलबे में दबने से 3 बच्चों समेत 5 लोगों की मौत

पिथौरागढ़ में भारी बारिश से 3 मकान ढहे, मलबे में दबने से 3 बच्चों समेत 5 लोगों की मौत

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि लापता दोनों लोगों के मिलने तक तलाशी अभियान जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि हादसे में मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है. क्योंकि प्रभावित गांव दूरस्थ क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला (Dharchula) क्षेत्र में भारी बारिश (Heavy Rain) से के एक गांव में तीन मकान ढह गए. इस हादसे में तीन बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई. जबकि दो अन्य लापता हो गए. घटनास्थल पर बचाव और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के जिलाधिकारी (डीएम) आशीष चौहान ने बताया कि रविवार देर रात जुम्मा गांव में यह हादसा हुआ.

सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट एम.पी सिंह ने बताया कि प्रभावित स्थल से तीन बच्चों समेत पांच व्यक्तियों के शव बरामद किए गए हैं. जबकि दो अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है. उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए एक हैलीपैड और एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है. साथ ही घायलों के इलाज के लिए एक चिकित्सकीय टीम भेजी गयी है.

डीएम आशीष चौहान ने कहा कि लापता लोगों के मिलने तक तलाशी अभियान जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि हादसे में मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है. क्योंकि प्रभावित गांव दूरस्थ क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है.  उन्होंने कहा, ‘हमने हैलीकॉप्टर से गांव का हवाई सर्वेक्षण किया है और पुलिस और राजस्व टीमों के साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ टीमों को भी गांव में भेजा गया है जिससे वहां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा सके.’

जिलाधिकारी ने जिला आपातकालीन केंद्र में अधिकारियों के साथ एक बैठक कर ग्रामीणों तक राहत सामग्री पहुंचाने के बारे में भी चर्चा की.

CM पुष्कर धामी ने अधिकारियों से हादसे के बारे में जानकारी ली

उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जुम्मा गांव में भारी वर्षा से हुए नुकसान के बारे में कुमाऊं के आयुक्त सुशील कुमार और मौके पर मौजूद जिलाधिकारी आशीष चौहान से फोन पर जानकारी ली. सरकारी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, उनके रहने, खाने के साथ ही दवाइयों और बच्चों के लिए दूध की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय की प्रभावित क्षेत्र में कोई न फंसे.

मुख्यमंत्री ने आयुक्त को प्रभावित क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के भी निर्देश दिए हैं. सीएम धामी ने कहा कि मौसम साफ होते ही वह प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे. (भाषा से इनपुट)

Pithoragarh Cloud Burst Video: पिथौरागढ़ के जुम्मा में बादल फटने से 3 लोगों की मौत और 7 लापता, दर्जनों घर जमींदोज

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Pithoragarh Cloud Burst: प्राकृति आपदा से स्थानीय लोग दहशत में हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ (NDRF And SDRF) टीम मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई है.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां के धारचूला स्थित जुम्मा गांव (Jumma Village) में बादल फट गया. बादल फटने (Cloud Burst) से व्‍यापक पैमाने पर नुकसान की सूचना है. दर्जनों घर जमीदोंज हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक, मलबे की चपेट में आने से 3 लोगों की मौत हो गई है, जबिक 7 लोग अभी भी लापता हैं. वहीं, इस घटना से स्थानीय लोग दहशत में हैं. जानकारी के मुताबिक, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंच कर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई है.

इससे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद ट्वीट कर इस घटना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया था कि पिथौरागढ़ जनपद के जुम्मा गांव के पास भूस्खलन की वजह से 2 लोगों की दुखद मौत हो गई एवं 5 अन्य की मलबे में दबे होने की खबर है. इस विषय में जिलाधिकारी से बात कर रेस्क्यू मिशन तेज करने का निर्देश दिया गया है. मैं वहां फंसे लोगों की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं.

पिछले हफ्ते भी पिथौरागढ़ जिले की बॉर्डर तहसीलों में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई थी. बारिश की वजह से हो रहे लैंडस्लाइड के कारण कई रास्ते बंद हो गए थे. वहीं, आमलोगों को भी खतरों का सामना करना पड़ रहा था. बलुआकोट में एक महिला भारी मलबे में दब गई थी. धारचूला तहसील के अलघारा में भारी लैंडस्लाइड हुआ था, जिस कारण चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली तवाघाट रोड बंद हो गया था. लैंडस्लाइड में आए भारी मलबे के कारण निचले इलाकों के 20 मकानों पर खतरा मंडरा रहा था. स्थानीय प्रशासन ने 12 मकानों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया था.

बलुआकोट में इलाके में भी भूस्खलन हुआ था. जोशी गांव (Joshi Village) में हुए भूस्खलन के कारण 13 मकान खतरे की जद में आ गए थे. इसकी चपेट में आने से एक महिला लापता थी. महिला को खोजने के लिए एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन मलबा बहुत ज्यादा होने के कारण महिला को खोज पाना आसान नहीं था.

Pithoragarh Weather Update: भारी बारिश से धारचूला में कई जगह भूस्खलन, चीन सीमा से लगती सड़कों का बुरा हाल

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Uttarakhand News: लगातार मूसलाधार बारिश और भूस्‍खलन के चलते चीन सीमा तक जाने वाली कई सड़कें क्षतिग्रस्‍त हो चुकी हैं. कई इलाकों का तो सड़क संपर्क तक टूट गया है.

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पिथौरागढ़. उत्‍तराखंंड के पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh District) की बॉर्डर तहसीलों में लगातार आफत की बारिश बरस रही है. मूसलाधार बारिश से रास्ते तो बंद हैं ही साथ ही कई जगहों पर हो रहे लैंडस्लाइड (Landslide) के कारण आमलोगों को भी खतरों का सामना करना पड़ रहा है. बलुआकोट में एक महिला भारी मलबे में दब गई. धारचूला तहसील के अलघारा में भारी लैंडस्लाइड हुआ है, जिस कारण चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली तवाघाट रोड बंद है. लैंडस्लाइड में आए भारी मलवे के कारण निचले इलाकों के 20 मकानों पर खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय प्रशासन ने 12 मकानों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया है. बलुआकोट में इलाके में भी भूस्खलन हुआ है. जोशी गांव (Joshi Village) में हुए भूस्खलन के कारण 13 मकान खतरे की जद में आ गए हैं. इसकी चपेट में आने से एक महिला लापता है. महिला को खोजने के लिए एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन मलबा बहुत ज्यादा होने के कारण महिला को खोज पाना आसान नहीं है.

बॉर्डर की सड़कों का हो चुका बुरा हाल
मुनस्यारी के जैंती गांव में एक नाले में कार फंस गई. स्थानीय लोगों की मदद से जैसे-तैसे कार को निकाल गया. वहीं, टिमटिया में भी भारी लैंडस्लाइड हुआ है. पहाड़ से भरभराकर मलबा गिरने के कारण सड़क पूरी तरह से बोल्डर्स में दब गई है. खैरियत इस बात की थी कि जिस समय पहाड़ी भरभराकर गिरी, उस वक्त कोई वहां नहीं था. लगातार बारिश और भूस्‍खलन से चीन की सीमा से लगती सड़कें खस्‍ता हाल हो गई हैं.

चीन सीमा से लगते इलाकों में जीना मुहाल
जगह-जगह हुए लैंडस्लाइड के कारण दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क 68 दिनों से बंद हैं, जबकि चाइना बॉर्डर को जोड़ने वाली लिपुलेख रोड भी कई जगह लैंडस्लाइड होने से हफ्ते भर से बंद है.आसमान से बरस रही आफत ने बॉर्डर की तहसीलों में रहने वालों की जिंदगी पटरी से उतार दी है. आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेन्द्र महर का कहना है कि सभी तहसीलों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है. साथ ही एसडीआऱएफ को भी एक्टिव रहने को कहा गया है. सड़कों को खोलने काम युद्ध स्तर पर चल रहा है.

Uttarakhand News : युवक की संदिग्ध मौत पर हंगामा, रास्ता जाम, पत्नी पर हत्या का आरोप

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जिस स्वास्थ्यकर्मी की मौत को आत्महत्या माना जा रहा था, उसके परिजनों ने इसे हत्या का मामला करार दिया है. पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम बनाई है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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पिथौरागढ़. अस्पताल में काम करने वाले एक युवक की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया. पहले इस मामले को आत्महत्या के एंगल से देखा जा रहा था, लेकिन परिजनों के आरोप के बाद इसमें हत्या का एंगल भी जुड़ गया है और आरोप किसी और पर नहीं बल्कि मृतक की गर्भवती पत्नी पर लगा है. मृतक के परिजनों ने हत्या का केस बताते हुए शव को रखकर पुलिस थाने के आगे प्रदर्शन किया. काफी देर तक चले इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने आरोपी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया, तब जाकर परिजन शांत हुए.

मामले के मुताबिक सुमित सिंह एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब करता था. हॉस्पिटल के पास ही उसने कमरा किराए पर लिया था. सोमवार को अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को जांच के लिए गांव से लाया था. जांच के बाद पति-पत्नी किराए के कमरे में ही थे, लेकिन सुबह सुमित का शव मिला. पहले माना जा रहा था कि आपसी झगड़े के चलते सुमित ने हाथ की नसों को काट दिया, लेकिन सुमित के परिजनों के सड़कों पर उतरने के बाद हत्या का एंगल सामने आया.

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पत्नी पर कैसे लगा आरोप?
मृतक के परिजनों ने शव के साथ घंटों थाने के सामने की रोड पर जाम लगाए रखा. सुमित की बुआ सुमित्रा सिंह का आरोप है कि सुमित की पत्नी मनीषा ने हत्याकांड को अंजाम दिया. सुमित्रा का ये भी कहना है कि पहले भी उन्होंने मनीषा के मायके वालों को कई बार फोन किए थे, लेकिन उन्होंने मायके पक्ष से कभी कोई सुलह समझाइश नहीं की गई. और सुमित की मौत के बाद मनीषा की मां उसे अपने साथ ले गई. बताया जाता है कि मनीषा फिलहाल बागेश्वर के बागनाथ में अपनी मां के साथ है.

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विरोध प्रदर्शन के बाद मृतक के परिजनों के साथ बातचीत करते पुलिस अधिकारी.

क्या पत्नी की गिरफ्तारी होगी?
इस केस में मृतक सुमित के परिजनों के हंगामे के बाद सीओ आरएस रौतेला ने बताया कि मनीषा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है. साथ ही, उसकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम भी बनाई गई है. पुलिस इस केस को सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है. गौरतलब है कि सुमित के शव पर चोटों के कई निशान मिले हैं. इसके अलावा हाथ की नसें कटी हुईं मिली हैं.

पिथौरागढ़: भारी बारिश से चीन बॉर्डर को जोड़ने वाला थल-मुनस्यारी रोड बर्बाद, जगह-जगह दरक रही सड़क

पिथौरागढ़: भारी बारिश से चीन बॉर्डर को जोड़ने वाला थल-मुनस्यारी रोड बर्बाद, जगह-जगह दरक रही सड़क

Uttarakhand News: थल से मुनस्यारी तक 70 किलोमीटर की यह सड़क इस बार बरसात में लगभग बंद रही. इस रोड पर एक नहीं बल्कि दर्जनों ऐसे डेंजर पॉइंट बन गए हैं, जो आए दिन दरक रहे हैं. हरड़िया नाले से जारी कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालात यह है कि हरड़िया नाला ने चार किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह प्रभावित किया है

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में भारी बरसात के कारण चीन बॉर्डर (China Border) को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क (Thal-Munsyari Road) पूरी तरह बर्बाद हो गई है. इस रोड के जगह-जगह जमींदोज होने से जहां हजारों की आबादी परेशान है, वहीं, पर्यटन नगरी मुनस्यारी का पर्यटन (Tourism) भी प्रभावित हो रहा है.

पिछले वर्ष थल-मुनस्यारी सड़क पर बरसी आसमानी आफत के जख्म भरे भी नहीं थे कि रही सही कसर जारी बरसात ने पूरी कर दी है. थल से मुनस्यारी तक 70 किलोमीटर की यह सड़क इस बार बरसात में लगभग बंद रही. इस रोड पर एक नहीं बल्कि दर्जनों ऐसे डेंजर पॉइंट बन गए हैं, जो आए दिन दरक रहे हैं. हरड़िया नाले से जारी कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालात यह है कि हरड़िया नाला ने चार  किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय निवासी जीवन दानू कहते हैं कि हरड़िया नाला का तेज बहाव इस सड़क के लिए अभिशाप बन गया है. यही नहीं, दरक रहे रोड से सफर करना भी आसान नहीं है.

दो दशक से दरक रहा है हरड़िया नाला, लेकिन नहीं निकला समाधान
हरड़िया के पास बीते दो दशकों से पहाड़ी का दरकना जारी है. अब तक यहां पहाड़ी से गिरा मलबा कई पुलों को अपनी चपेट में ले चुका है. बावजूद इसके स्थाई समाधान नहीं खोजा जा सका है. नतीजा यह है कि हजारों की आबादी हर दिन अपनी जिंदगी दांव पर लगातार सफर करने को मजबूर है. खस्ताहाल हो चुकी इस सड़क से मुनस्यारी का पर्यटन कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. हर साल हजारों सैलानी मुनस्यारी घूमने आते हैं. पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता ई गुप्ता कहते हैं कि बरसात के दिनों में डेंजर जोन में जेसीबी मशीन रखी गई है, सड़क बंद होने पर इसे दुरुस्त कर दोबारा खोलने का काम शुरू कर दिया जाता है.

मुनस्यारी से आगे यही रोड चीन बॉर्डर को जोड़ती है. आम लोगों की लाइफलाइन होने के साथ-साथ चीन सीमा पर तैनात जवानों के लिए जरूरी साजो-सामान भी इसी सड़क के जरिए उन तक पहुंचता है. बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी इस महत्वपूर्ण रोड की कोई सुध नहीं ले रहा है. जबकि अब हालात यह है कि हल्की बारिश में भी सड़क जगह-जगह जमींदोज हो जा रही है.

उत्तराखंड: नए जिलों के गठन को लेकर प्रदेश में तेज हुई सियासत, जानें कब से उठ रही है मांग

उत्तराखंड: नए जिलों के गठन को लेकर प्रदेश में तेज हुई सियासत, जानें कब से उठ रही है मांग

डीडीहाट (Didihat) को जिला बनाने के सवाल पर बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के दामन पर भी दाग है. 2005 में 36 दिनों तक चले अनशन के बाद तब के सीएम एनडी तिवारी ने जिला बनाने का ऐलान किया था. लेकिन ये ऐलान भी हवाहवाई रहा.

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 पिथौरागढ़.  उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Elections) का समय नजदीक आने के साथ ही अब डीडीहाट (Didihat) को जिला बनाने की मांग तेज होने लगी है. विपक्षी दल जहां इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं  कैबिनेट मंत्री और 5 बार के एमएलए बिशन सिंह चुफाल के लिए ये मुद्दा गले की फांस से कम नहीं है. 1962 से ही पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से अलग डीडीहाट जिला बनाने की मांग उठती रही है. लगातार उठती मांग को देखते हुए 90 के दशक में तत्कालीन मुलायम सरकार ने जिले को लेकर दीक्षित आयोग बनाया था. यही नहीं निशंक सरकार में 15 अगस्त 2011 को डीडीहाट सहित रानीखेत, यमनोत्री और कोटद्वार को भी जिला बनाने की घोषणा हुई थी.

चुनावी साल में हुई इस घोषणा का शासनादेश भी जारी कर दिया गया था. लेकिन गजट नोटिफिकेशन नहीं हुआ है. नतीजा ये रहा कि जीओ जारी होने के 10 साल बाद भी चारों जिले अस्तित्व में नहीं आ पाए. ऐसे में एक फिर चुनावी साल में ये मुद्दा गरमाने लगा है. डीडीहाट से कांग्रेसी नेता और पूर्व दर्जाधारी मंत्री रमेश कापड़ी का आरोप है कि क्षेत्रीय विधायक बिशन सिंह चुफाल जिले के मुद्दे पर लगातार चुनाव तो जीतते आए हैं. लेकिन जिला अभी तक नहीं बना पाए. साथ ही कापड़ी का कहना है कि बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे पर जनता के साथ धोखा किया है.

जिले के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर सवाल
डीडीहाट को जिला बनाने के सवाल पर बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के दामन पर भी दाग है. 2005 में 36 दिनों तक चले अनशन के बाद तब के सीएम एनडी तिवारी ने जिला बनाने का ऐलान किया था. लेकिन ये ऐलान भी हवाहवाई रहा. डीडीहाट से बिशन सिंह चुफाल लगातार पांचवीं बार विधायक हैं. ऐसे में विपक्षी जिला नहीं बनने पर उन्हें ही कठघरे में खड़ा करने की जुगत में रहते हैं. कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि चारों जिलों के गठन को लेकर सरकार गंभीर है. इंतजार है तो बस जिला पुर्नगठन आयोग की रिपोर्ट का. असल में उत्तराखंड में जिलों का गठन इतना आसान भी नहीं है. नए जिलों का जनभावनाओं के अनुरूप परिसीमन करना सबसे बड़ी चुनौती है. बावजूद इसके इतना तय है कि डीडीहाट के साथ ही रानीखेत जिले का मुद्दा भी विधानसभा चुनावों तक सियासत के केन्द्र में रहेगा.

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