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पिथौरागढ़ का महिला अस्पताल बदहाल, 9 डॉक्टरों पर लाखों की आबादी का जिम्मा

पिथौरागढ़ का महिला अस्पताल बदहाल, 9 डॉक्टरों पर लाखों की आबादी का जिम्मा

पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ का एकमात्र महिला जिला अस्पताल.

गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे कई मामलों में देखा गया है कि उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. 

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ (Pithoragarh Women Hospital) में स्वास्थ सेवाएं बदहाल हैं. जिले में हरगोविंद पंत महिला चिकित्सालय एकमात्र महिला अस्पताल है, जहां पड़ोसी देश नेपाल से भी मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन बेहतर स्वास्थ सुविधाओं के अभाव में यहां गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं हो पाता है. कई बार गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे कई मामलों में देखा गया है कि उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. गंभीर मामलों में मरीजों को यहां से हल्द्वानी भेजा जाता है. पहाड़ी रास्ता और 7 घंटे से ज्यादा का सफर, मरीजों के लिए असहनीय बना रहता है.

    वर्तमान में अस्पताल में 9 डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. रोजाना यहां 80 से ज्यादा महिलाएं इलाज और प्रसव के लिए पहुंचती हैं. लगभग 10 प्रसव यहां पर हर रोज होते हैं. इतनी बड़ी जनसंख्या मात्र इन 9 डॉक्टरों के भरोसे है. डॉक्टरों की कमी के चलते दूरदराज से आए मरीजों को अपनी जांच कराने के लिए काफी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. अगर अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ जाए, तो उपचार के लिए आईं महिलाओं को बरामदे में ही भर्ती कर लिया जाता है.

    महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, पर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद ही नहीं है. अस्पताल एक अन्य रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है. इस वजह से दूरस्थ क्षेत्रों से आए लोगों को अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. जिला अस्पताल के आसपास तमाम प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं. मरीजों को मजबूरन वहां का रुख करना पड़ता है. इस साल अप्रैल माह से अभी तक, 10 नवजातों की बेहतर इलाज न मिल पाने से मौत हो चुकी है. पिछले साल 30 नवजातों की मौत हुई थी.

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