बॉर्डर पर अब नेपाली नेटवर्क से नहीं बजेगी घंटियां, गांवों में पहुंचे सैटेलाइट फोन
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बॉर्डर पर अब नेपाली नेटवर्क से नहीं बजेगी घंटियां, गांवों में पहुंचे सैटेलाइट फोन
शनिवार को नेपाल के नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखा दिया गया है

लिपुलेख पास (Lipulekh Pass) के नजदीक भारत के जिन इलाकों को नेपाल अपना बता रहा है, वहां अभी तक भारतीय संचार सेवा नहीं थी. सैटेलाइट फोन से एक मिनट बात करने के लिए 12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के बॉर्डर इलाके में स्थित कई गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिली है. लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) तक सड़क पहुंचाने के बाद चीन और नेपाल सीमा (Nepal Border) से लगे इन इलाकों में रहने वालों को अब फोन के नेटवर्क के लिए नेपाल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. लिपुलेख पास के नजदीक भारत के जिन इलाकों को नेपाल अपना बता रहा है, वहां अभी तक लोग संचार सेवाओं के लिए नेपाल पर ही निर्भर थे. लेकिन अब यहां सैटेलाइट फ़ोन (Satellite Phone) दिए गए हैं, ताकि नेपाली मोबाइल सर्विस नेटवर्क पर निर्भर रहने की मजबूरी न रहे. SDRF (स्टेट डिज़ास्टर रिलीफ फ़ोर्स) ने बॉर्डर के इलाकों के गांवों को 49 GSPS (ग्लोबल सैटेलाइट फ़ोन सर्विस) सेट दिए हैं. ये GSPS फ़ोन उन गांवों को दिए गए हैं, जो नेपाली मोबाइल सर्विस के ज़रिए खुद को शेष दुनिया से जोड़ने को मजबूर थे, क्योंकि यहां अभी तक भारतीय संचार सेवा नहीं पहुंच पाई है.

इन्हें मिलेगा फ़ायदा 

पिथौरागढ़ के धारचूला तहसील की दारमा, ब्यास और चौदास घाटियों तक अब भी भारतीय संचार सेवा नही पहुंच पाई है. इसकी वजह से लिपुलेख मोटरमार्ग में छियालेख तक के भारतीय नागरिक नेपाली मोबाइल सेवा पर निर्भर थे. छियालेख से आगे गर्ब्यांग, नपलच्यु, गुंजी, कुटी, नाभी, रोंगकोंग जैसे गांव तो नेपाली मोबाइल सिग्नल की पहुंच से भी कोसों दूर हैं. एसडीआरएफ़ के सैटेलाइट फोन देने से धारचूला तहसील की ब्यास घाटी के 7 गांवों को सीधा फ़ायदा होगा. इनके अलावा दारमा के 19, चौदास के 3 गांवों के अलावा जिप्ति, खुमती, पांगला और जयकोट को भी सीधा लाभ होगा. यही नहीं मुनस्यारी तहसील में चीन सीमा से जुड़े 15 गांवों को भी सैटेलाइट फोन सेवा दी गई है.



खुशी का माहौल 
उच्च हिमालयी इलाकों में बसे इन गांवों को 2017 तक डीएसटीपी फोन सेवा से जोड़ा गया था लेकिन संचार उपग्रह में आई खराबी के कारण बॉर्डर के ये गांव 3 साल से संचार से पूरी तरह कटे थे या फिर नेपाली संचार सेवा का इस्तेमाल करने को मजबूर थे. सैटेलाइट फोन सेट मिलने से इन गांवों में खासा खुशी का माहौल है. स्थानीय निवासी कृष्णा गर्ब्याल का कहना है कि बॉर्डर के गाँवों में सेटेलाइट फोन मिलने से लोगों को बहुत सहूलियत होगी. ख़ासकर बरसात के सीजन में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं की सूचना समय पर दी जा सकेगी.

एक मिनट के 12 रुपये 

बता दें कि जिन इलाकों में सैटेलाइट फ़ोन सेट दिए गए हैं, उनमें अधिकांश आपदा प्रभावित हैं. हालांकि सैटेलाइट फोन से कॉल आम मोबाइल के मुकाबले काफी महंगी हैं. जहां आप और हम काफ़ी कम पैसे में अनलिमिटेड बातचीत का मज़ा ले रहे हैं सैटेलाइट फ़ोन से एक मिनट बात करने के लिए 12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. पिथौरागढ़ के डीएम विजय जोगदंडे ने बताया कि सैटेलाइट फोन सेवा पूरी तरह पेड सर्विस है जो भी ग्रामीण इसके ज़रिए फोन करेगा उसे निर्धारित दरों में भुगतान भी करना होगा. सैटेलाइट फोन का जिम्मा राजस्व निरीक्षक और ग्राम प्रधानों को दिया गया है.

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