'चीन और नेपाल बॉर्डर को जोड़ने वाले रास्ता बंद कर देंगे', आपदा राहत न मिलने पर विधायक ने दी धमकी
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'चीन और नेपाल बॉर्डर को जोड़ने वाले रास्ता बंद कर देंगे', आपदा राहत न मिलने पर विधायक ने दी धमकी
आलम तो ये है कि अब तक सरकार की ओर से सिर्फ एक बार प्रभारी मंत्री अरविंद पांडे ही तांगा गांव जा पाए हैं.

विधायक हरीश धामी (MLA Harish Dhami) ने साफ शब्दों में कहा कि जौलजीबी से आगे सुरक्षा बलों को भी नहीं जाने दिया जाएगा. यही नहीं आपदा प्रभावित मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा भवन में भी धरना देंगे.

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पिथौरागढ़. आसमानी आफत का जो तांडव इस बार देखने को मिला है, वैसा शायद ही कभी दिखने को मिला होगा. अब तक बादल फटने की घटनाओं में 22 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों घर जमीदोंज हो गए हैं. धारचूला (Dharchula), मुनस्यारी और बंगापानी तहसील (Bangapani Tehsil) को जोड़ने वाली अधिकांश सड़कें तबाह हो गई हैं. यही नहीं बड़े- बड़े पुलों को भी बारिश का पानी अपने साथ बहा ले गया है. हजारों की आबादी इन दिनों खासी दिक्कत में है. लेकिन सूबे की सरकार से अभी भी आपदा प्रभावितों को वो मदद नहीं मिल पाई है, जिसकी दरकार उन्हें है.

आलम तो ये है कि अब तक सरकार की ओर से सिर्फ एक बार प्रभारी मंत्री अरविंद पांडे ही तांगा गांव जा पाए हैं. तांगा में बादल फटने से 11 लोगों की मौत हुई थी. मुख्यमंत्री ने आपदा आने के एक पखवाड़ा गुजरने के बाद भी प्रभावितों का दर्द जानने की जहमत नहीं उठाई है. सरकार की उपेक्षा से गुस्साए क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने ऐलान किया है कि जल्द ही प्रभावितों के साथ बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसके तहत जौलजीबी से आगे किसी भी बाहरी व्यक्ति को नहीं आने दिया जाएगा. जौलजीबी ही वो इलाका है जहां से सेना, आइटीबीपी और एसएसबी के जवान चीन और नेपाल के बॉर्डर पर जाते हैं.

जौलजीबी से आगे सुरक्षा बलों को भी नहीं जाने दिया जाएगा



विधायक धामी ने साफ शब्दों में कहा कि जौलजीबी से आगे सुरक्षा बलों को भी नहीं जाने दिया जाएगा. यही नहीं भारी संख्या में आपदा प्रभावित मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा भवन में भी धरना देंगे. ऐसे में तय है कि अगर विधायक की चेतावनी धरातल पर उतरी तो खासी परेशानी होनी तय है. सरकारी उपेक्षा से तीनों तहसीलों के लोग भी खासे नाराज हैं. यही वजह है कि आए दिन विभिन्न संगठन सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं. ये तीनों तहसीलें आपदा के नजरिए से खासी संवेदनशील हैं. हर बरसात यहां के लोगों पर भारी पड़ती है, लेकिन ये पहला मौक़ा है जब सरकारी तंत्र लोगों की मदद के बजाय चुपचाप सोया है. अब तक प्रभावितों को सिर्फ ज़िला प्रशासन के स्तर पर ही मदद मिल पाई है. सरकार ने आपदा राहत के नाम पर किसी भी प्रकार के पैकेज तक का ऐलान नहीं किया है.
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