शिक्षक ही नहीं स्कूल में, पढ़ेंगे कैसे? 50 किमी दूर आकर बच्चों ने DM से पूछा

कहने को तो सरकार ने पहाड़ों पर टीचर तैनात करने के लिए ट्रांसफर एक्ट भी लागू कर दिया है लेकिन फिर भी यहां के स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 24, 2018, 5:12 PM IST
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 24, 2018, 5:12 PM IST
शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के बार-बार सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के दावों के विपरीत राज्य में शिक्षा की स्थिति बदतर होती जा रही है. पिथौरागढ़ में बच्चों को ज़िला मुख्यालय आकर नारेबाज़ी इसलिए करनी पड़ी क्योंकि उनके स्कूल में शिक्षक ही नहीं हैं. इससे भी चिंताजनक बात यह है कि ऐसा इन बच्चों ने पहली बार नहीं किया है, ये बच्चे पहले भी ज़िला मुख्यालय आकर कई बार स्कूल में शिक्षक नियुक्त करने की मांग कर चुके हैं लेकिन अधिकारी उन्हें आश्वासन देकर टरका देते हैं.

पिथौरागढ़ के पीपली इंटर कॉलेज के छात्र 50 किलोमीटर दूर ज़िला मुख्यालय पहुंचे और ज़िलाधिकारी से स्कूल में शिक्षक नियुक्त करने की मांग की. छात्र-छात्राओं का कहना है कि स्कूल में न विज्ञान के शिक्षक हैं और न ही कला विषयों के. बच्चे पूछ रहे हैं कि वह स्कूल जाकर करेंगे क्या जब शिक्षक ही नहीं है.

इन विद्यार्थियों की तकलीफ़ यह भी है कि वह कई बार शिक्षक नियुक्त करने की अपनी फ़रियाद लेकर ज़िला मुख्यालय आ चुके हैं लेकिन हर बार अधिकारी उन्हें ‘उचित कार्रवाई’ करने का आश्वासन देकर लौटा देते हैं. यह ‘उचित कार्रवाई’ चाहे जो भी होती हो लेकिन उससे इनके स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाती और कुछ दिन बाद ये बच्चे फिर ज़िला मुख्यालय पहुंच जाते हैं.

दरअसल पीपली इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी के चलते पिछले कुछ सालों से साइंस की पढ़ाई ठप है. अब तो आलम ये है कि आर्ट्स की क्लास भी बमुश्किल चल पा रही है. इस कॉलेज में ढाई सौ से ज्यादा बच्चे अपना भविष्य संवारने की उम्मीद में जा रहे हैं लेकिन शिक्षकों का टोटा नौनीहालों की उम्मीदों पर ग्रहण लगा रहा है.

ज़िलाधिकारी इस दिक्कत को स्वीकार करते हैं और बताते हैं कि स्कूल से एक और शिक्षक का स्थानांतरण कर दिया गया है, उसे रोकने की कोशिश की जा रही है. लेकिन वह भी कोई ठोस आश्वासन देने की स्थिति में नज़र नहीं आते.

पिथौरागढ़ में पीपली जैसे दुर्गम इलाकों में कई विद्यालय हैं, जहां शिक्षकों की भारी कमी है. कहने को तो सरकार ने पहाड़ों पर टीचर तैनात करने के लिए ट्रांसफर एक्ट भी लागू कर दिया है लेकिन फिर भी यहां के स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं और पढ़ने के बजाय नई पीढ़ी को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

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