हर रोज जिंदगी जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं बॉर्डर के छात्र, कांग्रेस-BJP ने कही ये बात

पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में बीते दिनों मुनस्यारी तहसील के घटगाड़ नाले में पुल नहीं होने के कारण दो छात्राएं स्कूल से वापसी के दौरान पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गईं थीं, जिनमें एक छात्रा की मौके पर ही मौत भी हो गई, तो दूसरी छात्रा जिला अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 15, 2019, 11:28 PM IST
हर रोज जिंदगी जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं बॉर्डर के छात्र, कांग्रेस-BJP ने कही ये बात
पिथौरागढ़ स्‍टूडेंट्स के सामने हैं स्‍कूल पहुंचने की चुनौती.
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 15, 2019, 11:28 PM IST
पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों ऐसे विद्यालय हैं जहां पहुंचने के लिए छात्र-छात्राओं को हर रोज खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है. नतीजा ये है कि कई नौनिहालों को विद्यालय आने-जाने में दौरान ही अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है. बीते दिनों मुनस्यारी तहसील के घटगाड़ नाले पर पुल नहीं होने के कारण दो छात्राएं स्कूल से वापसी के दौरान पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गईं थीं, जिनमें एक छात्रा की मौके पर ही मौत भी हो गई, तो दूसरी छात्रा जिला अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है.

एक साल में नहीं बन सका पुल
घटगाड़ में बीते साल आई प्राकृतिक आपदा में पुल टूट गया था, लेकिन साल भर गुजरने पर भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया. हालांकि ये इकलौता मामला नही है, जब शिक्षा प्राप्त करने जा रहे नौनिहालों की जान खतरे में पड़ी हो.

बीते दिनों मुनस्यारी तहसील में तेज बहाव की चपेट आने से एक लड़की मौत हो गई, तो दूसरी अस्‍पताल में भर्ती है.


जिले के धारचूला, मुनस्यारी, बेरीनाग, डीडीहाट, और बंगापानी तहसील में करीब 120 से अधिक विद्यालयों में जाने के लिए छात्रों को हर रोज खतरनाक रास्तों को पार करना होता है. कहीं रास्ते भयावह हैं तो कहीं नालों के ऊपर पुल तक नहीं बना है. हालांकि ऐसे में कुछ स्थानों में ग्रामीणों ने लकड़ी के पुल बनाएं हैं, जिनसे गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यालय के दूर-दराज के इलाकों में कुछ ऐसे ही हालात हैं.

कांग्रेस और भाजपा ने लगाए एक-दूसरे पर आरोप
घटगाड़ जैसी घटनाओं के सामने आने पर राजनीति भले ही गरमा रही हो, लेकिन स्थाई समाधान कहीं नजर नहीं आता. भाजपा नेता जगत मर्तोलिया ऐसे हादसों के लिए जहां विभागों को जिम्मेदार ठहराते हैं, वहीं कांग्रेस के मनोहर टोलिया की मानें तो उनकी सरकार ने दुर्गम इलाकों में पुल और सुरक्षित रास्तों के लिए एक प्लान तैयार किया था, लेकिन भाजपा सरकार के आते ही सबकुछ ठंडें बस्ते में चला गया.
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उत्तराखंड बनने के बाद कांग्रेस और भाजपा को लगातार सरकार बनाने का मौका मिला है, लेकिन दुर्गम इलाकों में विकास कोई नहीं पहुंचा पाया. यही वजह है कि छात्र हों या फिर आम ग्रामीण आए दिन हादसों का शिकार होने को मजबूर हैं.

जबकि क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल के केन्द्रीय संरक्षक काशी सिंह ऐरी का कहना है कि उत्तराखंड बनने के बाद सरकार बनाने का मौका उन दलों को मिला है, जो पर्वतीय राज्य की अवधारणा के खिलाफ थे. नतीजा ये रहा कि 19 सालों में सरकार का पूरा फोकस मैदानी इलाकों के विकास में रहा और पहाड़ी इलाकों में लोग अभी भी आदिम युग में जीने को विवश हैं.

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First published: August 15, 2019, 11:17 PM IST
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