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उच्च हिमालयी इलाकों में सक्रिय होने लगे तस्कर, वन्यजीवों पर संकट
Pithoragarh News in Hindi

Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 22, 2016, 1:42 PM IST
उच्च हिमालयी इलाकों में सक्रिय होने लगे तस्कर, वन्यजीवों पर संकट
File Photo

जाड़ों का सीजन आने के साथ ही उच्च हिमालयी इलाकों में तस्कर सक्रिय होने लगे हैं. दुर्लभ वन्यजीवों को अपने जाल में फंसाने के लिए शिकारी ऊंचे इलाकों में आये दिन आग लगा रहे हैं. सर्दियों का सीजन शुरू होने के साथ ऊंचे इलाकों के वन्यजीव संकट में आ गये हैं.भारी बर्फबारी से बचने के लिए इन दिनों हिमालयी जीव निचले इलाकों को आने लगते हैं.

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जाड़ों का सीजन आने के साथ ही उच्च हिमालयी इलाकों में तस्कर सक्रिय होने लगे हैं. दुर्लभ वन्यजीवों को अपने जाल में फंसाने के लिए शिकारी ऊंचे इलाकों में आये दिन आग लगा रहे हैं.
सर्दियों का सीजन शुरू होने के साथ ऊंचे इलाकों के वन्यजीव संकट में आ गये हैं.

भारी बर्फबारी से बचने के लिए इन दिनों हिमालयी जीव निचले इलाकों को आने लगते हैं. ऐसे में ये वक्त शिकारियों के लिए सबसे अधिक मुफीद होता है. हिमालयी वन्यजीवों को अपना शिकार बनाने के लिए तस्कर आग को हथियार बना रहे हैं.

निचले इलाकों में आग लगाकर ये तस्कर अपने शिकार की आसानी से घेराबंदी में जुट गये हैं. तस्करों की सक्रियता को देखते हुए वन महकमें ने भी तैयारियां तेज कर दीं हैं. पिथौरागढ़ के डीएफओ डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि तस्करों को रोकने के लिए विभाग मुस्तैद है.

साथ ही नई रणनीति के तहत तस्करों की घेराबंदी की योजना भी बन रही है. तस्करों के निशाने पर कस्तूरी मृग और काला भालू सबसे अधिक हैं. इन दोनों जानवरों का एक-एक अंग इंटरनेशनल मार्केट में भारी कीमतों पर बिकता है.

पिथौरागढ़ जिले में ब्यास, दारमा चौंदास और मिलम घाटी तस्करों के निशाने पर हैं. वन विभाग ने तस्करों पर नकेल कसने के लिए जहां लॉंग रेंज पेट्रोलिंग शुरू की है, वही एसटीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और पुलिस से भी सम्पर्क साधा हुआ है.

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First published: November 22, 2016, 1:42 PM IST
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