चीन-नेपाल से तनाव बना उत्तराखंड के सीमांत इलाकों के लिए वरदान! अब हो रही मूलभूत सुविधाएं देने तक की तैयारी

उत्तराखंड में पिथौरागढ़ इकलौता ऐसा ज़िला है जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से सटी हैं लेकिन इन दोनों मुल्कों के बॉर्डर आज भी विकास से कोसों दूर हैं.
उत्तराखंड में पिथौरागढ़ इकलौता ऐसा ज़िला है जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से सटी हैं लेकिन इन दोनों मुल्कों के बॉर्डर आज भी विकास से कोसों दूर हैं.

बॉर्डर के इन रखवालों की मूलभूत ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं इस वजह से हज़ारों लोग पलायन कर चुके हैं.

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पिथौरागढ़. चीन और नेपाल से साथ जारी तनातनी के बीच अब भारत भी उन सीमांत इलाकों की तरफ़ ध्यान दे रहा है जो अब तक उपेक्षित रहे हैं. पिथौरागढ़ के बॉर्डर इलाकों में आजादी के सात दशक बाद भी ज़रूरी सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पाईं हैं. ऐसे में सीमा के पहले प्रहरियों का भारी संख्या में पलायन भी हुआ है. उत्तराखंड में पिथौरागढ़ इकलौता ऐसा ज़िला है जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से सटी हैं लेकिन इन दोनों मुल्कों के बॉर्डर आज भी विकास से कोसों दूर हैं. हज़ारों की आबादी अर्से से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार से महरूम है. बॉर्डर के इन रखवालों की मूलभूत ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं इस वजह से हज़ारों लोग पलायन कर चुके हैं. हालात ये है कि सुनसान पड़े गांवों में अधिकांश घरों में ताले लटके पड़े हैं.

अब मिलेंगी संचार, स्वास्थ्य सुविधाएं 

11,000 फ़ीट की ऊंचाई पर बसे गुंजी के निवासी कुलदीप गुंज्याल कहते हैं कि आजादी के सात दशक बाद भी वह आदम युग में जीने को मजबूर हैं. गांव तक रोड तो पहुंच गई हैं लेकिन अन्य सुविधाओं का अब भी इंतज़ार ही है. हालांकि अब स्थितियां बदलती दिखने लगी हैं.



चीन और नेपाल ने जिस तरह भारत के खिलाफ मोर्चा खोला है उससे प्रशासनिक तंत्र के साथ सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्नी हैं. लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद अब बॉर्डर के गांवों को सोलर प्लांट से जगमग करने का प्लान तैयार हो रहा है. यही नहीं गुंजी में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने का भी सरकार प्लान बना रही है जबकि संचार के लिए हर गांव को सैटेलाइट फोन दिए जा रहे हैं.
सुरक्षा के लिए ज़रूरी

पिथौरागढ़ के प्रभारी डीएम आरडी पालीवाल ने बताया कि बॉर्डर के गांवों में विकास के लिए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान के तहत भी कार्य हो रहे हैं. यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बीएडीपी की सौ फीसदी धनराशि बॉर्डर में ही खर्च हो. इसके अलावा भी अन्य योजनाएं तैयार की जा रही हैं.

असल में सुरक्षा एजेंसियों ने भी सरकार से बॉर्डर इलाकों में सुविधाओं का ज़रूरी ठांचा खड़ा करने को कहा है. मौजूदा परिस्थितियों की वजह से भी इस बार इन प्रयासों में कुछ हद तक गंभीरता नजर आ रही है. अगर सिस्टम नए प्लान को धरातल में उतारने में सफल रहा तो तय है कि सुरक्षा तंत्र को खासी मजबूती मिलेगी.
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