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पिथौरागढ़ का जिला अस्पताल खुद बीमार, डॉक्टरों की कमी के चलते बन गया 'रेफर सेंटर'

पिथौरागढ़ का जिला अस्पताल खुद बीमार, डॉक्टरों की कमी के चलते बन गया 'रेफर सेंटर'

जिला

जिला अस्पताल से मरीज को हायर सेंटर ले जाती एम्बुलेंस.

चिकित्सकों के नहीं होने के कारण गंभीर मामलों में अस्पताल महज रेफर सेंटर बनकर रह जाता है.

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं किसी से छुपी नहीं हैं, जहां मरीजों का इलाज कम होता है और उन्हें हायर सेंटर ज्यादा रेफर किया जाता है. पिथौरागढ़ का जिला अस्पताल लंबे समय से डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है. 5.5 लाख की आबादी वाले जिले पिथौरागढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं एकमात्र जिले के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल और महिला अस्पताल पर टिकी हुई हैं, जहां पर पिथौरागढ़ के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं.

    गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञों की कमी के चलते ज्यादातर मरीजों को अपना इलाज कराने के लिए बड़े शहरों की ओर मजबूरन रुख करना पड़ता है. कई मामलों में रेफर किए गए मरीजों ने आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया है, जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि मरीजों का इलाज करने वाला जिला अस्पताल खुद ही बीमार पड़ा है, जोकि कहीं न कहीं पिथौरागढ़ की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

    सीमांत जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में लंबे समय से कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट सहित कई अन्य पदों पर चिकित्सक नहीं होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. चिकित्सकों के नहीं होने के कारण गंभीर मामलों में अस्पताल महज रेफर सेंटर बनकर रह जाता है. हृदय रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से हृदय रोग से ग्रसित मरीजों को फिजिशियन देख रहे हैं. गंभीर लगने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है.

    जिले के सबसे बड़े अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट कार्यरत हैं, जिसके ऊपर जिला अस्पताल के मरीजों के साथ ही महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी भी है. रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने से गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं. पिथौरागढ़ की जनता लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की मांग करते हुए आई है, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल के रिक्त पदों को नही भरा गया है.

    पूरे जनपद में प्रथम श्रेणी में कुल 12 पद खाली हैं, जिसमें वरिष्ठ विशेषज्ञ सहित मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद भी शामिल है. द्वितीय श्रेणी की बात करें तो महिला चिकित्सक और विशेषज्ञ चिकित्सक समेत कुल 67 पद खाली है, जिनमें 31 पदों पर संविदा में डॉक्टर तैनात हैं. तृतीय श्रेणी की बात करें तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 397 महत्वपूर्ण पद अभी तक रिक्त पड़े हैं, जोकि पिथौरागढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को बदहाल करने के प्रमुख कारण हैं.

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