चट्टान से दब गई थी महिला, 45 KM पैदल चलकर गांव वालों ने पहुंचाया अस्पताल, देखें तस्वीरें
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चट्टान से दब गई थी महिला, 45 KM पैदल चलकर गांव वालों ने पहुंचाया अस्पताल, देखें तस्वीरें
दुर्गम रास्ते से होकर महिला को अस्पताल ले जाते गांव वाले.

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (Indo-Tibetan Border Police) के कुछ जवानों ने भी ग्रामीणों की मदद की. आईटीबीपी के जवानों की मदद से आखिरकार 45 किलोमीटर का खतरनाक पैदल रास्ता तय कर रेखा देवी को मुनस्यारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया.

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पिथौरागढ़. चाइना बॉर्डर (China Border) के करीब बसे लास्पा (Laspa) में 18 अगस्त को रेखा देवी (Rekha Devi) नाम की एक महिला भारी बोल्डर की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गई थी. महिला को इलाज के लिए अस्पताल तक लाना जरूरी था. दुर्गम पैदल रास्तों से महिला को प्राथमिक इलाज के लिए भी मुनस्यारी पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था.

लास्पा से मुनस्यारी (Munsiyari) की दूरी 45 किलोमीटर है. तमाम राजनीतिक संगठनों के साथ कई स्थानीय संगठनों ने रेखा देवी को हेलीकॉप्टर के जरिए हायर सेंटर इलाज के लिए पहुंचाने की गुहार सरकार से  लगाई. लेकिन जब सरकार की कुम्भकर्णी नींद नहीं टूटी तो ग्रामीणों ने महिला को खुद ही मुनस्यारी पहुंचाने का निर्णय लिया.

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कुछ जवानों ने भी ग्रामीणों की मदद की




भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कुछ जवानों ने भी ग्रामीणों की मदद की. आईटीबीपी के जवानों की मदद से आखिरकार 45 किलोमीटर का खतरनाक पैदल रास्ता तय कर रेखा देवी को मुनस्यारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. रेखा देवी बोल पाने की स्थिति में भी नहीं है. बहुत ही सीमित संसाधनों में रेखा का मुनस्यारी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है. जोहार समिति के अध्यक्ष राम धर्मसत्तू ने प्रदेश सरकार के उदासीन बर्ताव पर बहुत ही गुस्सा जाहिर किया है. धर्मसत्तू का कहना है कि गंभीर घायल महिला को हायर सेंटर पहुंचाने के लिए 6 दिन पहले सरकार से मदद मांगी गई थी, लेकिन सरकार को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा.
प्रदेश सरकार को लेकर उनकी नाराजगी सातवें आसमान पर है
प्रदेश सरकार को लेकर उनकी नाराजगी सातवें आसमान पर है


आइटीबीपी के जवानों के साथ ही ग्रामीणों का भी तहे दिल से आभार जताया
वहीं, लास्पा की ग्राम प्रधान चंद्रा देवी ने आइटीबीपी के जवानों के साथ ही ग्रामीणों का भी तहे दिल से आभार जताया है. लेकिन प्रदेश सरकार को लेकर उनकी नाराजगी सातवें आसमान पर है. चंद्रा कहती हैं कि उनका गांव चीन बॉर्डर के करीब है. पूर्व की सरकारें बोर्डर के लोगों को लेकर गंभीर नजर आती थी. लेकिन ये पहला मौका है जब उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. मुनस्यारी के जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया कहते हैं कि उन्होंने जिला प्रशासन के साथ ही सरकार से घायल महिला को हेली से लिफ्ट कराने की हजार गुहार लगाई, लेकिन सभी ने उनकी फरियाद अनसुनी कर दी.
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