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उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में तेंदुए के आतंक के खात्मे के लिए नया दांव, हायर किया गया शिकारी

उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में तेंदुए के आतंक के खात्मे के लिए नया दांव, हायर किया गया शिकारी

उत्तराखंड वन विभाग ने तेंदुए के​ शिकार के लिए शिकारी को हायर किया है.

उत्तराखंड वन विभाग ने तेंदुए के​ शिकार के लिए शिकारी को हायर किया है.

Uttarakhand Wildlife : राज्य के वन विभाग ने अब आदमखोर तेंदुए के शिकार के लिए शिकारी को हायर किया है. इससे पहले इतिहास में पहली बार हुआ था, जब पिथौरागढ़ ज़िले में गुलदार के आतंक के कारण कर्फ्यू लगाना पड़ा था.

    पिथौरागढ़. उत्तराखंड के ​वन विभाग के लिए तेंदुए का आतंक कितना बड़ा सवाल बन चुका है, इसकी मिसाल यह है कि प्रभावित इलाकों में नाइट कर्फ्यू के आदेश के बाद अब पिथौरागढ़ ज़िले में आदमखोर तेंदुए के लिए ट्रेंड और अनुभवी शिकारी हरीश धामी को हायर किया गया है. शिकारी इस तेंदुए को बजेटी, पापदेव, पौन इलाकों में खोजने में लगे हैं. वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बजेटी इलाके में आठ वर्षीय बच्ची को शिकार बनाने वाले इस तेंदुए को बीते 25 सितंबर को आदमखोर घोषित किया गया था और आसपास के तमाम इलाकों को सतर्क रहने की हिदायतें दी गई थीं.

    पिथौरागढ़ ज़िले में आतंंक मचाने वाले इस तेंदुए के शिकार के लिए अपनी शिकारियों की मदद लेने वाले वन विभाग के विनय भार्गव ने बताया कि कैसे आदमखोर को पकड़ने के चलते एक अन्य तेंदुए को पकड़ा गया था. भार्गव के हवाले से एक खबर में कहा गया, ‘हमने एक पिंजरा रखा था, जिसमें एक तेंदुआ फंसा था, लेकिन उसके स्टूल और यूरिन टेस्ट से पता चला कि वह तेंदुआ कोई और था. उसे बाद में रामनगर के जंगलों में छोड़ दिया गया.’

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    कितने तेंदुए घूम रहे हैं यहां?
    भार्गव की मानें तो कम से कम दो और इससे ज़्यादा तेंदुए भी हो सकते हैं, जिन्हें बजेटी की घटना के बाद स्पॉट किया जा चुका है. इससे पहले 23 सितंबर को पिथौरागढ़ ने आदमखोर तेंदुए से बचाव के लिए नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया था. ज़िले के इतिहास में पहली बार इस तरह का कदम उठाया गया था.

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    अब तक मारे जा चुके हैं 800 लोग!
    तेंदुओं या जंगली जानवरों के इंसानी बस्तियों में हमले या इंसानों और जानवरों के संघर्ष की समस्या उत्तराखंड के राज्य बनने से ही रही है. इस तरह के एनकाउंटरों में अब तक 800 से ज़्यादा इंसानी जानें जा चुकी हैं. वन विभाग के आंकड़ों की मानें तो इनमें से करीब आधी मौतें तेंदुओं के हमले में हुई हैंं. गौरतलब है कि राज्य भर में कितने तेंदुए हैं, इसे लेकर 2008 में आखिरी गणना हुई थी, जिसके मुताबिक इनकी संख्या उत्तराखंड में 2335 थी.

    Tags: Leopard hunt, Pithoragarh district, Uttarakhand news

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