सैलानियों को भा रहा पिथौरागढ़ के भुरमुनी का वॉटरफॉल, लॉकडाउन में स्थानीय युवाओं ने की खोज, देखें Video
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सैलानियों को भा रहा पिथौरागढ़ के भुरमुनी का वॉटरफॉल, लॉकडाउन में स्थानीय युवाओं ने की खोज, देखें Video
भुरमुनी के वॉटरफॉल तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर की कच्ची सड़क पर गाड़ी चलानी पड़ती है. साथ ही एक किलोमीटर का पैदल रास्ता भी तय करना पड़ता है

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान भुरमुनी (Bhurmuni Waterfall) के कुछ उत्साही युवाओं ने इसकी तलाश की. इसे खोज निकालने के बाद इन युवाओं ने ही यहां तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया. इसके बाद ही प्रकृति की इस अनमोल धरोहर से लोग परिचित हो सके

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड (Uttarakhand) के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) यूं तो प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है लेकिन इन दिनों इसकी सुंदरता पर भुरमुनी का वॉटरफॉल (Bhurmuni Waterfall) चार चांद लगा रहा है. मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर असल में यह वॉटरफॉल वजूद में तो सदियों से था. मगर अब कोरोना काल (Corona Virus) में लोगों की निगाहों में चढ़ा है. तपती गर्मी में इन नजारों को देखकर कोई भी गदगद हो सकता है. दक्षिण अमेरिका (South America) के अमेजन जंगलों की तरह दिखाई देने वाले घने जंगलों की बीच मौजूद यह वॉटरफॉल हर किसी को लुभा रहा है.

असल में इस झरने की खोज का किस्सा काफी दिलचस्प है. लॉकडाउन के दौरान भुरमुनी के कुछ उत्साही युवाओं ने इसकी तलाश की. इसे खोज निकालने के बाद इन युवाओं ने ही यहां तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया. इसके बाद ही प्रकृति की इस अनमोल धरोहर से लोग परिचित हो सके.

मेहनताने के रूप में युवाओं ने बकायदा 30 रूपये फीस मुकर्रर की



इस झरने में डुबकी लगाने के लिए अब हर रोज हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं. यह बात अलग है कि अभी भी यहां तक पहुंचना आसान नहीं है. बावजूद इसके युवा हो या बच्चे या फिर महिलाएं सभी इन खूबसूरत नजारों को अपनी आंखों में कैद करना चाहते हैं. स्थानीय युवाओं ने काफी मेहनत कर इस झरने को इस लायक बनाया है कि लोग यहां आकर इसका आनंद उठा सकें. इस काम के मेहनताने के रूप में इन युवाओं ने बकायदा 30 रूपये की फीस मुकर्रर की है.


अब तक जंगलों के बीच छिपे इस खूबसूरत झरने को सबके सामने लाकर स्थानीय युवाओं ने अपना रोल निभाया है. अब जरूरत है कि आगे का जिम्मा सरकारी तंत्र उठाए और इसका सौंदर्यीकरण करे. यहां पहुंचने के लिए चार किलोमीटर की कच्ची सड़क पर गाड़ी चलानी पड़ती है. यही नहीं एक किलोमीटर का पैदल रास्ता भी खतरों से भरा है. बावजूद इसके यहां पहुंचने पर नजारे देखते ही बनते हैं.
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