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पहाड़ी रास्तों पर 15 घंटे कंधे पर उठाकर घायल महिला को अस्पताल ले गए ITBP जवान

ITBP के बहादुर जवानों ने 15 घंटे और 40 किलोमीटर लगातार चलकर महिला को सड़क मार्ग तक पहुंचाया जहां से उन्हें वाहन से अस्पताल पहुंचाया जा सका

ITBP के बहादुर जवानों ने 15 घंटे और 40 किलोमीटर लगातार चलकर महिला को सड़क मार्ग तक पहुंचाया जहां से उन्हें वाहन से अस्पताल पहुंचाया जा सका

आईटीबीपी के 25 जवानों (ITBP Jawans) ने घायल महिला को लगभग 40 किलोमीटर फिसलन, उफनते नालों, भूस्खलन और खतरों से भरे मार्ग पर पैदल चलकर मोटर मार्ग तक पहुंचाया. जहां से उन्हें अस्पताल (Hospital) में भर्ती करवाया गया

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नई दिल्ली. भारत-चीन के सीमावर्ती इलाकों (India-China Border) में तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के हिमवीर अपने हिम्मत और साहस के लिए जाने जाते हैं. लेकिन कई बार ऐसा मामला देखने को मिलता है कि जिस सीमावर्ती इलाकों में इनकी तैनाती होती है, उस इलाके में रहने वालों के लिए यह जवान किसी वरदान से कम नहीं होते. उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ों पर ऐसा ही एक मामला देखने को मिला है. ITBP के जवानों ने एक घायल महिला को 40 किलोमीटर अपने कंधों पर उठाकर रेस्क्यू (Rescue Operation) किया, 15 घंटे चलकर उसे सड़क मार्ग तक पहुंचाया. ग्रामीणों ने इसके लिए सीमाओं के इन प्रहरियों का दिल खोलकर शुक्रिया अदा किया.

मिली जानकारी के मुताबिक पिथौरागढ़ जिले की अग्रिम चौकी के नजदीक सीमांत लास्पा गांव में एक स्थानीय महिला पहाड़ से गिरकर घायल हो गई थी. आईटीबीपी के जवानों ने घायल महिला को लगभग 40 किलोमीटर फिसलन, उफनते नालों, भूस्खलन और खतरों से भरे मार्ग पर पैदल चलकर मोटर मार्ग तक पहुंचाया. जहां से उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

पहाड़ी से नीचे गिर जाने से घायल हुई थी महिला

बीते 20 अगस्त को यह महिला अपने घर से कुछ दूर अचानक एक पहाड़ी से नीचे गिर गई थी. इस हादसे में उसका पैर टूट गया और उसकी स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी. खराब मौसम होने की वजह से हेलीकॉप्टर देहरादून से बरेली तक ही आ सका. आईटीबीपी के जवानों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय मिलम से पीड़ित महिला को मुनस्यारी मोटर मार्ग तक पहुंचाने की कोशिशें शुरू कर दीं. जवानों ने घायल महिला को स्ट्रेचर की मदद से अपने कंधों पर 22 अगस्त को देर रात तक मुंसियारी मोटर मार्ग तक पहुंचाया. जहां से उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है. इलाज के बाद महिला की स्थिति अब स्थिर है.



इस अभियान में आईटीबीपी के 25 जवानों ने लगातार पहाड़ी ढलानों और उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलते हुए घायल महिला को स्ट्रेचर के सहारे सुरक्षित सड़क मार्ग तक पहुंचाया. बरसात के चलते मोटर मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने से वाहनों के चलने योग्य सड़क मार्ग तक पहुंचाने में जवानों को दिन भर से ज्यादा का समय लग गया. पहले यह जवान अपनी चौकी से 22 किलोमीटर दूर पैदल चलकर लास्पा गांव पहुंचे और फिर स्ट्रेचर में महिला को उठाकर देर शाम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुनस्यारी पहुंचे जहां उसका इलाज संभव हो सका.

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Pithoragarh: भारत और नेपाल के बीच शुरू हुआ सैन्य अभ्यास, पहाड़ों पर दिखेगी सेना की ताकत

Indo Nepal Joint Training Exercise : भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास पिथौरागढ़ में शुरू हो गया है. 14 दिनों तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में दोनों मुल्कों के 650 जवान शिरकत कर रहे हैं. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल ने सैन्य अभ्यास को हरी झंडी दिखाई.

Indo Nepal Joint Training Exercise : भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास पिथौरागढ़ में शुरू हो गया है. 14 दिनों तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में दोनों मुल्कों के 650 जवान शिरकत कर रहे हैं. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल ने सैन्य अभ्यास को हरी झंडी दिखाई.

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पिथौरागढ़. भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में शुरू हो गया है. 14 दिनों तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में दोनों मुल्कों के 650 जवान शिरकत कर रहे हैं. कोरोना संकट के बाद दोनों देशों के बीच ये पहला सैन्य अभ्यास है. भारत और नेपाल के बीच 2006 में सूर्य किरण अभियान के तहत सैन्य अभ्यास का आगाज हुआ था. बीते साल कोरोना के कारण सैन्य अभ्यास नहीं हो पाया था. लेकिन कोरोना से हालात काबू में आने के बाद सूर्य किरण अभियान फिर शुरू हो गया है. पिथौरागढ़ में 6 गढ़वाल रेजीमेंट के मैदान में संयुक्त सैन्य अभ्यास का शानदार आगाज किया गया. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल ने सैन्य अभ्यास को हरी झंडी दिखाई. दोनों मुल्कों के बीच रिश्ते होंगे और अधिक मजबूत.

सूर्य किरण अभियान के तहत भारत और नेपाल के बीच बारी-बारी से सैन्य अभ्यास होता है. दोनों मुल्कों के बीच अब तक 14 सैन्य अभ्यास हो चुके हैं. 15 वें सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के जवान आंतकवाद और आपदा से लड़ने के गुर तो साझा करेंगे ही, साथ ही युद्द की आधुनिक तकनीक भी एक-दूसरे से सीखेंगे. यही नहीं सैन्य हथियारों के बारे में भी दोनों मुल्कों के सैनिक अपनी जानकारियां सांझा करेंगे. भारतीय सेना का मानना है कि इस तरह के सैन्य अभ्यास से दोनों मुल्कों के रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच रिश्तों की डोर पारम्परिक तौर पर जुड़ी है, लेकिन इस तरह से संयुक्त सैन्य अभ्यासों से रिश्तों में मजबूती आएगी. साथ ही महल का कहना है कि दोनों देशों की सेनाओं को इस अभ्यास से काफी कुछ जानने को मिलेगा.

पहाड़ी इलाके में होने वाला सैन्य अभ्यास दोनों मुल्कों के जवानों लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है. 14 दिनों तक चलने वाले सैन्य अभ्यास में दोनों मुल्कों के जवानों को काफी कुछ नया सीखने को मिलेगा, जिसका सीधा फायदा दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र को मिलेगा.

Uttarakhand: मॉडल बनेंगी वन पंचायतें, देंगी यूथ को काम, जीबी पंचायत को मिले 60 लाख

पहाड़ों पर मॉडल वन पंचायतों को सरकार की हरी झंडी.

Uttarakhand News: जीबी वन पंचायत को मॉडल पंचायत में तब्दील करने के लिए पहले चरण में 60 लाख की धनराशि भी जारी कर दी गई है. 44 हेक्टेयर की वन पंचायत में ईको पार्क, हट, चाल-खाल और पारम्परिक रास्तों का निर्माण होना है.

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पिथौरागढ़. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest Department) पलायन रोकने के लिए अब वन पंचायतों की मदद ले रहा है. डिपार्टमेंट ने मॉडल वन पंचायत बनाकर बॉयो डाईवर्सिटी को संरक्षित करने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का प्लान तैयार किया है. डिपार्टमेंट के प्लान को सरकार से भी हरी झंडी मिल गई है. पहले चरण में मुख्यालय से सटी जीबी वन पंचायत को मॉडल पंचायत बनाया जाएगा.

पिथौरागढ़ को मिनी कश्मीर कहा जाता है. यहां प्रकृति ने हर तरफ अपना खजाना बिखेरा है, लेकिन सही प्लानिंग नहीं होने से प्रकृति का ये सौन्दर्य लोगों को वो फायदा नहीं दे पा रहा है, जिसकी दरकार सभी को है. मगर अब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने पहली बार वन पंचायतों को मॉडल पंचायत में तब्दील करने का प्लान बनाया है. डिपार्टमेंट के प्लान को सरकार से भी हरी झंडी मिल गई है. पहले चरण में मुख्यालय से सटी जीबी वन पंचायत को मॉडल पंचायत बनाया जाएगा.

डीएफओ विनय भार्गव ने बताया कि जीबी वन पंचायत के सरपंच प्रदीप चंद ने मॉडल वन पंचायत का प्रस्ताव दिया था, जिसे विभाग ने शासन को भेजा. आखिरकार शासन ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.

60 लाख की धनराशि जारी

जीबी वन पंचायत को मॉडल पंचायत में तब्दील करने के लिए पहले चरण में 60 लाख की धनराशि भी जारी कर दी गई है. 44 हेक्टेयर की वन पंचायत में ईको पार्क, हट, चाल-खाल और पारम्परिक रास्तों का निर्माण होना है. यही नहीं बर्ड वॉचिंग और साहसिक खेलों के लिए भी इसे तैयार किया जाएगा. अगर ये सब हुआ तो तय है कि युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे. डिपार्टमेंट ने स्थानीय लोगों को ही मॉडल वन पंचायत के संचालन का जिम्मा दिया है. वन पंचायत के सरपंच प्रदीप चंद का कहना है कि उनकी पंचायत इसके लिए चयनित हुई है, ये गर्व की बात है. उनकी पूरी कोशिश होगी कि प्लान के मुताबिक वन पंचायत विकसित हो.

जड़ी-बूटी के साथ लगेंगे फलदार पेड़

जीबी वन पंचायत ट्यूलिप लैंडस्केप के करीब है, जिससे यहां पर्यटन सर्किल आसानी से बन सकता है. इस वन पंचायत को पर्यटन केन्द्र के रूप में तो विकसित किया ही जाएगा साथ ही इसमें तेज पत्ता, तिमूर, जड़ी-बूटी के साथ ही कई फलदार और छायादार पेड़ भी लगाए जाएंगे. इससे ग्रामीणों की आजीविका में खासा सुधार आएगा. अब देखना ये है कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का ये प्लान कब परवान चढ़ता है.

Pithoragarh News : सैलरी मिली नहीं उल्टे एक झटके में गई JOB, सड़कों पर उतरे सैकड़ों हेल्थ वर्कर

विरोध प्रदर्शन करते स्वास्थ्यकर्मी.

उत्तराखंड सरकार नहीं चाहेगी कि चुनाव से पहले सैकड़ों 'कोरोना योद्धा' परिवारों को नाराज़ करे. एक तरफ ये परिवार सड़कों पर न्याय मांग रहे हैं तो सवाल ये भी है कि क्यों सिर्फ पिथौरागढ़ में हेल्थ वर्कर के साथ यह अन्याय हुआ!

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पिथौरागढ़. सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हेल्थ वर्करों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि रातों-रात उनकी नौकरी चली जाएगी. कोरोना संकट के दौरान काम कर कोरोना वॉरियर कहलाने वाले कर्मचारियों की नौकरी हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक झटके में खत्म कर दी. चुनाव में जबकि कुछ ही महीने बाकी हैं, तब उत्तराखंड सरकार के इस तरह के फैसले ने सबको चौंका ज़रूर दिया है और विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा दे दिया है. साल में सैकड़ों लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने पर सियासत भी तेज़ हो चुकी है जबकि सरकार को भरोसा है कि जल्द ही सभी को बहाल कर इस मुद्दे को संभाल लिया जाएगा.

असल में कोरोना की सेकेंड वेव में हेल्थ डिपार्टमेंट ने 284 लोगों को कॉंट्रेक्ट के तहत रखा था, जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और वॉर्ड बॉय शामिल हैं. लगातार 4 महीने तक काम करने पर भी इन्हें सैलरी तो नही मिली, लेकिन नौकरी से छुट्टी ज़रूर हो गई. ऐसे में सैकड़ों की संख्या में बेरोज़गार हुए युवाओं ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है. जॉब से हटाईं गईं रेनू सामंत कहती हैं कि विभाग ने उनके साथ ‘मजाक किया. 4 महीनों तक मानदेय भी नहीं दिया गया.

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अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखते नौकरी से हटाए गए स्वास्थ्यकर्मी.

सिर्फ पिथौरागढ़ में ही हटाए गए हेल्थ वर्कर
सूबे के अन्य ज़िलों में हेल्थ वर्कर पहले की तरह काम कर रहे हैं लेकिन पिथौरागढ़ के हेल्थ वर्करों के साथ ही यह ज़्यादती की गई. कोराना संकट के बीच जिनकी सेवाएं ली गईं, उन कर्मियों को सीएम केयर फंड से सैलरी मिलनी थी, लेकिन यहां न तो 4 महीने की सैलरी मिल पाई और न ही नौकरी बची. वहीं, सरकार की मानें तो हटाए गए सभी हेल्थ वर्करों की बहाली के लिए युद्धस्तर पर कोशिशें जारी हैं.

क्या कह रहे हैं ज़िम्मेदार?
सीएमओ डॉ. एचसी पंत का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्थानीय स्तर पर तय समय के लिए इन हेल्थ वर्करों को अस्थायी तौर पर ही रखा गया था. जब कोरोना के मामले नहीं के बराबर हो गए हैं, तो इनका हटाया जाना जायज़ कदम है. वहीं, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि हटाए गए हेल्थ वर्करों को बहाल करने का रास्ता तलाशा जा रहा है.

उत्तराखंड : चीन बॉर्डर की तीनों घाटियों का बुरा हाल, 75 दिनों से कटा है संपर्क

उत्तराखंड में कई रास्ते भूस्खलन के कारण ठप हैं.

Uttarakhand Monsoon : पिथौरागढ़ की व्यास, दारमा और चौंदास घाटियों में इस बार बरसात ने जमकर कहर ढाया है. दारमा घाटी को जोड़ने वाली रोड 75 दिनों से बंद है. यहां हज़ारों की आबादी के​ लिए कैसे संकट खड़ा हो गया है, जानिए.

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पिथौरागढ़. चाइना बॉर्डर को जोड़ने वाली तीनों घाटियों का शेष दुनिया से सम्पर्क लम्बे समय से कटा हुआ है. हालात ये हैं कि दारमा घाटी को जोड़ने वाली रोड ढाई महीने से बंद है जबकि ब्यास और चौंदास घाटियों का भी बुरा हाल है. अब चिंता की बात ये है कि इन घाटियों में रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें भी खत्म होने लगीं हैं और नागरिकों के लिए सप्लाई तकरीबन ठप है. हज़ारों की आबादी बेहद मुश्किल स्थितियों में फंसी हुई है और बदतर हाल उनकी है, जो इन कठिन हालात में बीमारी की चपेट में हैं. यही नहीं, बॉर्डर की सुरक्षा पर तैनात जवानों को भी सप्लाई प्रभावित होने के चलते अब दिक्कतें पेश आ रही हैं.

बीते 16 जून को आई आसमानी आफत ने दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली रोड तबाह कर डाली थी. बॉर्डर की इस अहम रोड पर दर्जनों जगह इतना भारी लैंडस्लाइड हुआ कि उसे हटाना भी आसान नहीं था. कई स्थानों पर बैली ब्रिज भी बरसात की भेंट चढ़ गए हैं. कुछ ऐसा ही हाल ब्यास घाटी का भी है. ब्यास घाटी से होकर ही लिपुलेख बॉर्डर की रोड निकलती है. लेकिन इस बरसात ने बीआरओ की इस रोड की पोल खोल दी. यहां भी एक नहीं, दर्जनों स्पॉट ऐसे हैं, जहां पूरी रोड ही बारिश ने निगल ली.

ये भी पढ़ें : 2018 में भारत आए 4 चीनियों ने मांगी चीन लौटने की इजाज़त, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा ‘रुको ज़रा’

तीनों घाटियों की बंद सड़कें सामरिक नज़रिये से भी अहम हैं. इन्हीं सड़कों से बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बल भी सीमाओं की सुरक्षा के लिए जाते हैं. दारमा घाटी के रहने वाले जयेन्द्र फिरमाल बताते हैं कि पूरी घाटी के लोग खासी दिक्कतों में हैं. धारचूला से लोग अपने गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन रोड और पैदल रास्तों का नामोनिशां तक नहीं है.

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उत्तराखंड में घाटियों के रास्ते खोले जाने के लिए काम जारी है, लेकिन हालात मुश्किल बताए जा रहे हैं.

कैसे संकट से जूझ रहे हैं लोग?
रोड बंद होने से तीनों घाटियों के 90 से अधिक गांवों का शेष दुनिया से सम्पर्क कटा है. कई गांवों के तो हालात इस कदर खराब हैं कि गांव की छोटी दुकानों में जो बचा-खुचा सामान है, उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई है. सबसे अधिक संकट में वो लोग हैं, जो बीमारी की चपेट में हैं. कहने को तो सरकार ने बॉर्डर की तीनों घाटियों के लिए एक हेलीकॉप्टर भी दिया है लेकिन हजारों की आबादी के लिए वो नाकाफी ही साबित हो रहा है.

एडीएम फिंचाराम चौहान का कहना है कि सड़कों को खोलने के लिए बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और सीपीडब्ल्यूडी तीनों एंजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं लेकिन तबाही इतनी ज्यादा हुई है कि कम समय में सड़कों को खोल पाना आसान नही है. इस साल की बरसात ने सबसे ज्यादा तांडव बॉर्डर के इलाकों में मचाया है. अधिकारियों और स्थानीय लोगों की बातों से अंदेशा यही है कि तीनों घाटियों को जोड़ने वाली अवरुद्ध सड़कों के जल्द खुल पाने के आसार नहीं हैं.

आपदाग्रस्त धारचूला में एक और आफत, एक गैस सिलेंडर के लिए चुकाने पड़ रहे 2500 रुपये

कॉंसेप्ट इमेज.

Uttarakhand News : आप धारचूला से चीन बॉर्डर से सटे गांवों तक जाते हैं, तो प्रति यात्री जितना खर्च होता है, एक एलपीजी सिलेंडर के लिए भी उतना ही भाड़ा लग रहा है. जानिए कैसे तीन गुनी कीमत में सिलेंडर लेने पर ग्रामीण मजबूर हैं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 02, 2021, 10:46 IST
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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत गांवों में ‘गरीबी में आटा गीला होने’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. पिथौरागढ़ ज़िले ने हाल में बादल फटने के चलते प्राकृतिक आपदा का दंश झेला है. हादसों में जानो माल का नुकसान होने के साथ ही यहां कई संपर्क मार्ग तक ध्वस्त हो चुके हैं. इसका असर यह है कि चीन सीमा से सटे गांवों तक एक रसोई गैस सिलेंडर पहुंच पाना या तो असंभव हो गया है या फिर ग्रामीणों को एक सिलेंडर के लिए 2500 से 3000 रुपये तक का खर्च उठाना पड़ रहा है. आपदा और महंगाई से पहले ही जूझ रहे ग्रामीणों के लिए ये नई आफत किस तरह खड़ी हो गई है, जानिए.

भौगोलिक परिस्थितयों को पहले समझिए कि धारचूला से चीन सीमा से सटे अंतिम गांव कुटी तक की दूरी करीब 120 किलोमीटर की है. एक यात्री को धारचूला से कुटी तक जाने के लिए 1200 रुपये करीब खर्च करने पड़ते हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो अब एक यात्री जितना ही किराया सिलेंडर का देना पड़ रहा है. कई जगहें चूंकि सड़कें बंद पड़ी हैं, तो सिलेंडर ढोने के लिए मज़दूरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसका शुल्क अलग है.

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पिथौरागढ़ समेत उत्तराखंड के कई इलाकों में अनेक रास्ते बंद पड़े होने की खबरें हैं.

कैसे तीन गुना हो जाती है कीमत?
पिथौरागढ़ में भारी बारिश और भूस्खलन जैसी घटनाओं के चलते कई रास्ते बंद हैं यानी दूरस्थ सीमांत गांव संपर्क से तकरीबन कटे हुए हैं. एक स्थानीय व्यक्ति के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि 14 गांवों में यह आलम है कि एक सिलेंडर 2500 रुपये में पड़ रहा है. वहीं कुटी के एक निवासी की मानें तो सात गांवों में तो 900 रुपये के सिलेंडर के लिए 3000 रुपये तक की कीमत भी देनी पड़ रही है. सोबला के एक निवासी के अनुसार सिलेंडर ही नहीं, अन्य चीज़ें और खाद्य सामग्री के दाम भी तिगुने हो गए हैं.

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इस समस्या के समय में एक तरफ ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को कम से कम ​दो सिलेंडर सरकार मुफ्त दे, तो वहीं, प्रशासन इसे कुछ समय की दिक्कत बता रहा है. धारचूला के एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला के हवाले से अमर उजाला की खबर में लिखा गया कि ‘सड़कें खुलने के बाद यह दिक्कत नहीं होगी.’ लेकिन यह क्या इतनी आसान बात है? इसका अंदाज़ा इस फैक्ट से लगाइए कि तवाघाट-सोबला सड़क करीब ढाई महीने से बंद है.

सीएम धामी ने किया धारचूला के आपदाग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वे, केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट भी लेंगे जायजा

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी. (File Photo : ANI)

Uttarakhand Calamity : पिथौरागढ़ में दो दिन पहले भारी बारिश के चलते जो तबाही हुई, उसका दर्द अभी कम नहीं हुआ है. यहां जनजीवन सामान्य नहीं हुआ है और ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीड़ितों से मिलने पहुंचे.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 01, 2021, 14:41 IST
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देहरादून. पिथौरागढ़ ज़िले के धारचूला में सोमवार को बादल फटने के बाद हुई तबाही का जायज़ा लेने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हवाई दौरा किया. हवाई सर्वे के माध्यम से धामी ने आपदा प्रभावित इलाकों में नुकसान का आंकलन किया. इस सर्वे के बाद धामी ने माना कि प्राकृतिक आपदा के चलते इलाके में जानो माल का भारी नुकसान हुआ और उन्होंने पुष्टि की कि सात लोगों का कोई पता नहीं है. धामी ने कहा कि ‘हम इस इलाके में जीवन के सामान्य गति पकड़ने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं.’

हवाई सर्वे के दौरान विमान से धारचूला के प्रभावित एलागाढ़ इलाके का दौरा करने के बाद जुम्मा एयरबेस पर उतरे धामी ने पीड़ितों से मुलाकात भी की. एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उन्होंने ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि तत्काल पीड़ितों को राहत देने के उपाय किए जाएं. जिन परिवारों के लोग मारे गए हैं, उन्हें 4 लाख रुपये की मुआवज़ा देने का ऐलान भी धामी ने किया. जुम्मा गांव से लौटकर धामी ने धारचूला में पीड़ितों से मुलाकात की. यहां उन्होंने पीड़ितों को 1 लाख रुपये की मदद का आश्वासन दिया.

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केंद्रीय मंत्री भट्ट भी करेंगे दौरा
पिथौरागढ़ में भारी बारिश से हुई तबाही का जायज़ा लेने के लिए रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट का भी कार्यक्रम है. खबरों के मुताबिक बुधवार को सांसद अजय टम्टा व सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ जीएम के साथ भट्ट को निरीक्षण करना है. बताया जाता है कि इस दौरे से पहले पिथौरागढ़-तवाघाट रोड के बारे में भट्ट मंगलवार को जानकारी लेकर चर्चा कर चुके थे.

पिथौरागढ़ में भारी बारिश से 3 मकान ढहे, मलबे में दबने से 3 बच्चों समेत 5 लोगों की मौत

पिथौरागढ़ के धारचूला में पिछले कुछ समय से लगातार बारिश जारी है जिससे इलाके के कई गांवों में भारी तबाही हुई है

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि लापता दोनों लोगों के मिलने तक तलाशी अभियान जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि हादसे में मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है. क्योंकि प्रभावित गांव दूरस्थ क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला (Dharchula) क्षेत्र में भारी बारिश (Heavy Rain) से के एक गांव में तीन मकान ढह गए. इस हादसे में तीन बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई. जबकि दो अन्य लापता हो गए. घटनास्थल पर बचाव और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के जिलाधिकारी (डीएम) आशीष चौहान ने बताया कि रविवार देर रात जुम्मा गांव में यह हादसा हुआ.

सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट एम.पी सिंह ने बताया कि प्रभावित स्थल से तीन बच्चों समेत पांच व्यक्तियों के शव बरामद किए गए हैं. जबकि दो अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है. उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए एक हैलीपैड और एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है. साथ ही घायलों के इलाज के लिए एक चिकित्सकीय टीम भेजी गयी है.

डीएम आशीष चौहान ने कहा कि लापता लोगों के मिलने तक तलाशी अभियान जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि हादसे में मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है. क्योंकि प्रभावित गांव दूरस्थ क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है.  उन्होंने कहा, ‘हमने हैलीकॉप्टर से गांव का हवाई सर्वेक्षण किया है और पुलिस और राजस्व टीमों के साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ टीमों को भी गांव में भेजा गया है जिससे वहां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा सके.’

जिलाधिकारी ने जिला आपातकालीन केंद्र में अधिकारियों के साथ एक बैठक कर ग्रामीणों तक राहत सामग्री पहुंचाने के बारे में भी चर्चा की.

CM पुष्कर धामी ने अधिकारियों से हादसे के बारे में जानकारी ली

उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जुम्मा गांव में भारी वर्षा से हुए नुकसान के बारे में कुमाऊं के आयुक्त सुशील कुमार और मौके पर मौजूद जिलाधिकारी आशीष चौहान से फोन पर जानकारी ली. सरकारी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, उनके रहने, खाने के साथ ही दवाइयों और बच्चों के लिए दूध की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय की प्रभावित क्षेत्र में कोई न फंसे.

मुख्यमंत्री ने आयुक्त को प्रभावित क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के भी निर्देश दिए हैं. सीएम धामी ने कहा कि मौसम साफ होते ही वह प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे. (भाषा से इनपुट)

Pithoragarh Cloud Burst Video: पिथौरागढ़ के जुम्मा में बादल फटने से 3 लोगों की मौत और 7 लापता, दर्जनों घर जमींदोज

पिथौरागढ़ में बादल फटने के बाद हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है. स्‍थानीय प्रशासन ने हादसे में 7 लोगों के लापता होने की बात कही है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Pithoragarh Cloud Burst: प्राकृति आपदा से स्थानीय लोग दहशत में हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ (NDRF And SDRF) टीम मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई है.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां के धारचूला स्थित जुम्मा गांव (Jumma Village) में बादल फट गया. बादल फटने (Cloud Burst) से व्‍यापक पैमाने पर नुकसान की सूचना है. दर्जनों घर जमीदोंज हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक, मलबे की चपेट में आने से 3 लोगों की मौत हो गई है, जबिक 7 लोग अभी भी लापता हैं. वहीं, इस घटना से स्थानीय लोग दहशत में हैं. जानकारी के मुताबिक, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंच कर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई है.

इससे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद ट्वीट कर इस घटना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया था कि पिथौरागढ़ जनपद के जुम्मा गांव के पास भूस्खलन की वजह से 2 लोगों की दुखद मौत हो गई एवं 5 अन्य की मलबे में दबे होने की खबर है. इस विषय में जिलाधिकारी से बात कर रेस्क्यू मिशन तेज करने का निर्देश दिया गया है. मैं वहां फंसे लोगों की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं.

पिछले हफ्ते भी पिथौरागढ़ जिले की बॉर्डर तहसीलों में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई थी. बारिश की वजह से हो रहे लैंडस्लाइड के कारण कई रास्ते बंद हो गए थे. वहीं, आमलोगों को भी खतरों का सामना करना पड़ रहा था. बलुआकोट में एक महिला भारी मलबे में दब गई थी. धारचूला तहसील के अलघारा में भारी लैंडस्लाइड हुआ था, जिस कारण चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली तवाघाट रोड बंद हो गया था. लैंडस्लाइड में आए भारी मलबे के कारण निचले इलाकों के 20 मकानों पर खतरा मंडरा रहा था. स्थानीय प्रशासन ने 12 मकानों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया था.

बलुआकोट में इलाके में भी भूस्खलन हुआ था. जोशी गांव (Joshi Village) में हुए भूस्खलन के कारण 13 मकान खतरे की जद में आ गए थे. इसकी चपेट में आने से एक महिला लापता थी. महिला को खोजने के लिए एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन मलबा बहुत ज्यादा होने के कारण महिला को खोज पाना आसान नहीं था.

Pithoragarh Weather Update: भारी बारिश से धारचूला में कई जगह भूस्खलन, चीन सीमा से लगती सड़कों का बुरा हाल

जगह-जगह हुए लैंडस्लाइड के कारण दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क 68 दिनों से बंद है.

Uttarakhand News: लगातार मूसलाधार बारिश और भूस्‍खलन के चलते चीन सीमा तक जाने वाली कई सड़कें क्षतिग्रस्‍त हो चुकी हैं. कई इलाकों का तो सड़क संपर्क तक टूट गया है.

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पिथौरागढ़. उत्‍तराखंंड के पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh District) की बॉर्डर तहसीलों में लगातार आफत की बारिश बरस रही है. मूसलाधार बारिश से रास्ते तो बंद हैं ही साथ ही कई जगहों पर हो रहे लैंडस्लाइड (Landslide) के कारण आमलोगों को भी खतरों का सामना करना पड़ रहा है. बलुआकोट में एक महिला भारी मलबे में दब गई. धारचूला तहसील के अलघारा में भारी लैंडस्लाइड हुआ है, जिस कारण चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली तवाघाट रोड बंद है. लैंडस्लाइड में आए भारी मलवे के कारण निचले इलाकों के 20 मकानों पर खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय प्रशासन ने 12 मकानों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया है. बलुआकोट में इलाके में भी भूस्खलन हुआ है. जोशी गांव (Joshi Village) में हुए भूस्खलन के कारण 13 मकान खतरे की जद में आ गए हैं. इसकी चपेट में आने से एक महिला लापता है. महिला को खोजने के लिए एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन मलबा बहुत ज्यादा होने के कारण महिला को खोज पाना आसान नहीं है.

बॉर्डर की सड़कों का हो चुका बुरा हाल
मुनस्यारी के जैंती गांव में एक नाले में कार फंस गई. स्थानीय लोगों की मदद से जैसे-तैसे कार को निकाल गया. वहीं, टिमटिया में भी भारी लैंडस्लाइड हुआ है. पहाड़ से भरभराकर मलबा गिरने के कारण सड़क पूरी तरह से बोल्डर्स में दब गई है. खैरियत इस बात की थी कि जिस समय पहाड़ी भरभराकर गिरी, उस वक्त कोई वहां नहीं था. लगातार बारिश और भूस्‍खलन से चीन की सीमा से लगती सड़कें खस्‍ता हाल हो गई हैं.

चीन सीमा से लगते इलाकों में जीना मुहाल
जगह-जगह हुए लैंडस्लाइड के कारण दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क 68 दिनों से बंद हैं, जबकि चाइना बॉर्डर को जोड़ने वाली लिपुलेख रोड भी कई जगह लैंडस्लाइड होने से हफ्ते भर से बंद है.आसमान से बरस रही आफत ने बॉर्डर की तहसीलों में रहने वालों की जिंदगी पटरी से उतार दी है. आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेन्द्र महर का कहना है कि सभी तहसीलों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है. साथ ही एसडीआऱएफ को भी एक्टिव रहने को कहा गया है. सड़कों को खोलने काम युद्ध स्तर पर चल रहा है.

Uttarakhand News : युवक की संदिग्ध मौत पर हंगामा, रास्ता जाम, पत्नी पर हत्या का आरोप

पिथौरागढ़ में युवक की मौत के बाद परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया.

जिस स्वास्थ्यकर्मी की मौत को आत्महत्या माना जा रहा था, उसके परिजनों ने इसे हत्या का मामला करार दिया है. पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम बनाई है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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पिथौरागढ़. अस्पताल में काम करने वाले एक युवक की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया. पहले इस मामले को आत्महत्या के एंगल से देखा जा रहा था, लेकिन परिजनों के आरोप के बाद इसमें हत्या का एंगल भी जुड़ गया है और आरोप किसी और पर नहीं बल्कि मृतक की गर्भवती पत्नी पर लगा है. मृतक के परिजनों ने हत्या का केस बताते हुए शव को रखकर पुलिस थाने के आगे प्रदर्शन किया. काफी देर तक चले इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने आरोपी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया, तब जाकर परिजन शांत हुए.

मामले के मुताबिक सुमित सिंह एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब करता था. हॉस्पिटल के पास ही उसने कमरा किराए पर लिया था. सोमवार को अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को जांच के लिए गांव से लाया था. जांच के बाद पति-पत्नी किराए के कमरे में ही थे, लेकिन सुबह सुमित का शव मिला. पहले माना जा रहा था कि आपसी झगड़े के चलते सुमित ने हाथ की नसों को काट दिया, लेकिन सुमित के परिजनों के सड़कों पर उतरने के बाद हत्या का एंगल सामने आया.

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पत्नी पर कैसे लगा आरोप?
मृतक के परिजनों ने शव के साथ घंटों थाने के सामने की रोड पर जाम लगाए रखा. सुमित की बुआ सुमित्रा सिंह का आरोप है कि सुमित की पत्नी मनीषा ने हत्याकांड को अंजाम दिया. सुमित्रा का ये भी कहना है कि पहले भी उन्होंने मनीषा के मायके वालों को कई बार फोन किए थे, लेकिन उन्होंने मायके पक्ष से कभी कोई सुलह समझाइश नहीं की गई. और सुमित की मौत के बाद मनीषा की मां उसे अपने साथ ले गई. बताया जाता है कि मनीषा फिलहाल बागेश्वर के बागनाथ में अपनी मां के साथ है.

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विरोध प्रदर्शन के बाद मृतक के परिजनों के साथ बातचीत करते पुलिस अधिकारी.

क्या पत्नी की गिरफ्तारी होगी?
इस केस में मृतक सुमित के परिजनों के हंगामे के बाद सीओ आरएस रौतेला ने बताया कि मनीषा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है. साथ ही, उसकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम भी बनाई गई है. पुलिस इस केस को सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है. गौरतलब है कि सुमित के शव पर चोटों के कई निशान मिले हैं. इसके अलावा हाथ की नसें कटी हुईं मिली हैं.

पिथौरागढ़: भारी बारिश से चीन बॉर्डर को जोड़ने वाला थल-मुनस्यारी रोड बर्बाद, जगह-जगह दरक रही सड़क

लगातार हो रही बारिश के चलते 70 किलोमीटर लंबी थल-मुनस्यारी सड़क जगह-जगह जमींदोज हो गई है

Uttarakhand News: थल से मुनस्यारी तक 70 किलोमीटर की यह सड़क इस बार बरसात में लगभग बंद रही. इस रोड पर एक नहीं बल्कि दर्जनों ऐसे डेंजर पॉइंट बन गए हैं, जो आए दिन दरक रहे हैं. हरड़िया नाले से जारी कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालात यह है कि हरड़िया नाला ने चार किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह प्रभावित किया है

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में भारी बरसात के कारण चीन बॉर्डर (China Border) को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क (Thal-Munsyari Road) पूरी तरह बर्बाद हो गई है. इस रोड के जगह-जगह जमींदोज होने से जहां हजारों की आबादी परेशान है, वहीं, पर्यटन नगरी मुनस्यारी का पर्यटन (Tourism) भी प्रभावित हो रहा है.

पिछले वर्ष थल-मुनस्यारी सड़क पर बरसी आसमानी आफत के जख्म भरे भी नहीं थे कि रही सही कसर जारी बरसात ने पूरी कर दी है. थल से मुनस्यारी तक 70 किलोमीटर की यह सड़क इस बार बरसात में लगभग बंद रही. इस रोड पर एक नहीं बल्कि दर्जनों ऐसे डेंजर पॉइंट बन गए हैं, जो आए दिन दरक रहे हैं. हरड़िया नाले से जारी कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालात यह है कि हरड़िया नाला ने चार  किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय निवासी जीवन दानू कहते हैं कि हरड़िया नाला का तेज बहाव इस सड़क के लिए अभिशाप बन गया है. यही नहीं, दरक रहे रोड से सफर करना भी आसान नहीं है.

दो दशक से दरक रहा है हरड़िया नाला, लेकिन नहीं निकला समाधान
हरड़िया के पास बीते दो दशकों से पहाड़ी का दरकना जारी है. अब तक यहां पहाड़ी से गिरा मलबा कई पुलों को अपनी चपेट में ले चुका है. बावजूद इसके स्थाई समाधान नहीं खोजा जा सका है. नतीजा यह है कि हजारों की आबादी हर दिन अपनी जिंदगी दांव पर लगातार सफर करने को मजबूर है. खस्ताहाल हो चुकी इस सड़क से मुनस्यारी का पर्यटन कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. हर साल हजारों सैलानी मुनस्यारी घूमने आते हैं. पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता ई गुप्ता कहते हैं कि बरसात के दिनों में डेंजर जोन में जेसीबी मशीन रखी गई है, सड़क बंद होने पर इसे दुरुस्त कर दोबारा खोलने का काम शुरू कर दिया जाता है.

मुनस्यारी से आगे यही रोड चीन बॉर्डर को जोड़ती है. आम लोगों की लाइफलाइन होने के साथ-साथ चीन सीमा पर तैनात जवानों के लिए जरूरी साजो-सामान भी इसी सड़क के जरिए उन तक पहुंचता है. बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी इस महत्वपूर्ण रोड की कोई सुध नहीं ले रहा है. जबकि अब हालात यह है कि हल्की बारिश में भी सड़क जगह-जगह जमींदोज हो जा रही है.

उत्तराखंड: नए जिलों के गठन को लेकर प्रदेश में तेज हुई सियासत, जानें कब से उठ रही है मांग

चुनावी साल में हुई इस घोषणा का शासनादेश भी जारी कर दिया गया था. लेकिन गजट नोटिफिकेशन नहीं हुआ है.

डीडीहाट (Didihat) को जिला बनाने के सवाल पर बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के दामन पर भी दाग है. 2005 में 36 दिनों तक चले अनशन के बाद तब के सीएम एनडी तिवारी ने जिला बनाने का ऐलान किया था. लेकिन ये ऐलान भी हवाहवाई रहा.

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 पिथौरागढ़.  उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Elections) का समय नजदीक आने के साथ ही अब डीडीहाट (Didihat) को जिला बनाने की मांग तेज होने लगी है. विपक्षी दल जहां इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं  कैबिनेट मंत्री और 5 बार के एमएलए बिशन सिंह चुफाल के लिए ये मुद्दा गले की फांस से कम नहीं है. 1962 से ही पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से अलग डीडीहाट जिला बनाने की मांग उठती रही है. लगातार उठती मांग को देखते हुए 90 के दशक में तत्कालीन मुलायम सरकार ने जिले को लेकर दीक्षित आयोग बनाया था. यही नहीं निशंक सरकार में 15 अगस्त 2011 को डीडीहाट सहित रानीखेत, यमनोत्री और कोटद्वार को भी जिला बनाने की घोषणा हुई थी.

चुनावी साल में हुई इस घोषणा का शासनादेश भी जारी कर दिया गया था. लेकिन गजट नोटिफिकेशन नहीं हुआ है. नतीजा ये रहा कि जीओ जारी होने के 10 साल बाद भी चारों जिले अस्तित्व में नहीं आ पाए. ऐसे में एक फिर चुनावी साल में ये मुद्दा गरमाने लगा है. डीडीहाट से कांग्रेसी नेता और पूर्व दर्जाधारी मंत्री रमेश कापड़ी का आरोप है कि क्षेत्रीय विधायक बिशन सिंह चुफाल जिले के मुद्दे पर लगातार चुनाव तो जीतते आए हैं. लेकिन जिला अभी तक नहीं बना पाए. साथ ही कापड़ी का कहना है कि बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे पर जनता के साथ धोखा किया है.

जिले के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर सवाल
डीडीहाट को जिला बनाने के सवाल पर बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के दामन पर भी दाग है. 2005 में 36 दिनों तक चले अनशन के बाद तब के सीएम एनडी तिवारी ने जिला बनाने का ऐलान किया था. लेकिन ये ऐलान भी हवाहवाई रहा. डीडीहाट से बिशन सिंह चुफाल लगातार पांचवीं बार विधायक हैं. ऐसे में विपक्षी जिला नहीं बनने पर उन्हें ही कठघरे में खड़ा करने की जुगत में रहते हैं. कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि चारों जिलों के गठन को लेकर सरकार गंभीर है. इंतजार है तो बस जिला पुर्नगठन आयोग की रिपोर्ट का. असल में उत्तराखंड में जिलों का गठन इतना आसान भी नहीं है. नए जिलों का जनभावनाओं के अनुरूप परिसीमन करना सबसे बड़ी चुनौती है. बावजूद इसके इतना तय है कि डीडीहाट के साथ ही रानीखेत जिले का मुद्दा भी विधानसभा चुनावों तक सियासत के केन्द्र में रहेगा.

Uttarakhand: पिता चलाते हैं टैक्सी, बेटी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिंरगा

यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिंरगा के साथ शीतल.

उत्तराखंड की बेटी शीतल (Mountaineer Sheetal) ने यूरोप में देश का नाम रौशन किया है. 15 अगस्त के दिन शीतल ने  यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (mount elbrus) पर तिरंगा फहराने में सफलता हासिल की है.

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पिथौरागढ़. क्लाइंबिंग बियोंड द समिट( Climbing Beyond the Summit CBTS) द्वारा आयोजित अभियान में शीतल ने एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है. शीतल (Sheetal) ने रूस-जार्जिया बॉर्डर पर मौजूद माउंट एल्ब्रुस (mount elbrus) चोटी पर तिरंगा लहराने में सफलता पाई है. शीतल इससे पहले एवरेस्ट, कंचनजंगा और अन्नपूर्णा जैसी दुर्गम चोटियों पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं. शीतल ने बताया कि फ्लाइट रद्द होने के कारण उनका अभियान 3 दिन की देरी से शुरू हुआ. 13 सितंबर को मास्को पहुंचकर उनकी टीम ने 36 सौ मीटर की ऊंचाई पर अपना बैस कैंप बनाया. फिर अगले दिन 14 अगस्त की रात को समिट के लिए निकल पड़े.

शीतल ने बताया कि आखिरकार 15 अगस्त की दोपहर में उन्हें एल्ब्रुस चोटी पर तिंरगा फहराने में सफलता मिली. एल्ब्रुस चोटी 5 हजार 6 सौ 42 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है. 48 घंटे के भीतर बेस कैंप से समिट करना काफी मुश्किल होता है. अभी तक बहुत कम पर्वतारोही इतने कम समय में एल्ब्रुस चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचे हैं.

कड़ी मेहनत से शीतल ने हासिल की सफलता

एल्ब्रुस पर्वत एक सुप्त ज्वालामुखी है, जो कॉकस पर्वत श्रृखंला में मौजूद है. इसके दो शिखर हैं. कॉकस पर्वत श्रृखंला का पश्चिमी शिखर 5 हजार 6 सौ 42 मीटर ऊंचा है, जबकि पूर्वी शिखर 5 हजार 6 सौ 21 मीटर की ऊंचाई पर है. सीबीटीएस के संस्थापक सदस्य योगेश गर्बयाल ने बताया कि शीतल गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. शीतल के पिता पिथौरागढ़ टैक्सी चलाते हैं, लेकिन कड़ी मेहनत से उसने ये मुकाम हासिल किया है.

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शीतल का टॉरगेट दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों में तिंरगा फहराना है.

जुड़वा भाईयों ने एल्ब्रुस चोटी पर तिरंगा फहराने का बनाया रिकॉर्ड

शीतल का टॉरगेट दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों में तिंरगा फहराना है. एल्ब्रुस पर तिंरगा फहराने वाली इस टीम में राजस्थान के दो जुड़वा भाई भी हैं. तरूण और तपन नाम के जुड़वा भाई बीते साल सीबीटीएस से जुड़े थे. एल्ब्रुस चोटी पर तिंरगा फहराने वाले तरूण और तपन पहले जुड़वा भारतीय भाई हैं. तरूण और तपन ने पिथौरागढ़ की दारमा घाटी में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया है. इन दोनों जुड़वा भाईयों की टारगेट एवरेस्ट में एक साथ तिरंगा फहराना है. एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने वाली 4 भारतीय सदस्यों की टीम में लद्दाख के जिगमित थरचिन भी थे. सीबीटीएस का 4 सदस्यीय दल 11 अगस्त को दिल्ली से यूरोप के लिए रवाना हुआ था.

पिथौरागढ़: चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क 2 महीने से बंद, दर्जनों गांव के लोग कैद

इसी साल 16 जून में आई प्राकृतिक आपदा से चीन सीमा को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क तबाह और बर्बाद हो गई

Uttarakhand News: धारचूला तहसील में सोबला-ढाकर रोड सड़क बंद होने से दोनों घाटियों के 50 गांवों का बाकी देश-दुनिया से संपर्क कट गया है. कई गांवों के हालात इस कदर खराब हैं कि यहां रोजमर्रा की चीजें खत्म हो गईं हैं. गांव की छोटी दुकानों में जो भी बचा-खुचा सामान है उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई है

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले के धारचूला तहसील में चीन बॉर्डर (China Border) को जोड़ने वाली सड़क बीते दो महीने से बंद है. इससे इलाके के दर्जनों गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट सा गया है. सोबला-ढाकर रोड के बंद होने से दारमा और चौंदास घटियों के इन गांवों के लोग कैद होकर रह गए हैं. अब हालात यह है कि इन गांवों में रोजमर्रा की चीजें खत्म होने लगी हैं.

बीते 16 जून को आई आसमानी आफत से दारमा और चौंदास घाटी को जोड़ने वाली सड़क तबाह और बर्बाद हो गई थी. हालात यह है कि बॉर्डर को जोड़ती यह महत्वपूर्ण सड़क दर्जनों जगह बंद पड़ी है. कई पुल भी जमींदोज हुए हैं. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी सीपीडब्ल्यूडी सड़क नहीं खोल पाई है. यह सड़क बंद होने से भारत-चीन सीमा पर तैनात सुरक्षाबलों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, साथ ही दर्जनों गांव के लोग भी कैद हो गए हैं. क्षेत्र के विधायक हरीश धामी का कहना है कि वो इस मुद्दे को विधानसभा के मॉनसून सत्र में उठाएंगे. अगर सरकार ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की तो वो विधानसभा में ही धरना शुरू कर देंगे.

हजारों लोगों की लाइफलाइन है बॉर्डर की यह रोड
सड़क बंद होने से दोनों घाटियों के 50 गांवों का बाकी देश-दुनिया से संपर्क कट गया है. कई गांवों के हालात इस कदर खराब हैं कि यहां रोजमर्रा की चीजें खत्म हो गईं हैं. गांव की छोटी दुकानों में जो भी बचा-खुचा सामान है उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई है. कहने को तो सरकार ने यहां एक हेलीकॉप्टर तैनात किया है. लेकिन खराब मौसम ने हेलीकॉप्टर को सफेद हाथी बना दिया है. ऐसे में सबसे अधिक संकट बीमार लोगों पर मंडरा रहा है. इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर एक पीएससी भी नहीं है.

जिलाधिकारी (डीएम) आशीष चौहान ने सीपीडब्ल्यूडी को मलबा हटाकर सड़क को जल्द खोलने के निर्देश दिए हैं. साथ ही पूरे मामले से शासन को भी अवगत करा दिया गया है. उन्होंने कहा कि शासन से जो भी निर्देश मिलेंगे उन पर गंभीरता से अमल किया जाएगा.

दो महीने गुजरने पर भी आसान नही रोड का खुल पाना
सीमा को जोड़ने वाली इस सड़क के जो हालात हैं, उसे देखते हुए कहा जा रहा है कि निकट भविष्य में भी इसके खुलने के आसार नहीं है. ऐसे में तय है कि सीमांत क्षेत्र में रहने वालों को जल्द राहत नहीं मिलने वाली है. बेहतर होता कि किसी अन्य प्लान पर गंभीरता से अमल किया जाए, ताकि हजारों लोगों की बेपटरी हो चुकी जिंदगी दोबारा पटरी पर आ सके.

पिथौरागढ़ को एप्पल बेल्ट के रूप में विकसित करने की कवायद तेज, यहां की जलवायु सेब उत्पादन के अनुकूल

उत्तरकाशी के सेब उत्पादकों की मानें तो पिथौरागढ़ की जलवायु सेब उत्पादन के अनुकूल है.

Pithoragarh News: उत्तरकाशी की तर्ज पर अब पिथौरागढ़ को भी ऐप्पल बेल्ट (Apple Belt) की रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो रही है. पिथौरागढ़ के किसानों को सेब पैदा करने की आधुनिक तकनीक की जानकारी दी जा रही है.

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पिथौरागढ़. पिथौरागढ़ बॉर्डर जिले (Pithoragarh Border District) में सेब उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं. जिसे देखते हुए अब उद्यान विभाग ने ऊंचाई वाले इलाकों को एप्पल बेल्ट के रूप में विकसित करने की कोशिशें तेज कर दीं हैं. एप्पल बेल्ट (Apple Belt) को तैयार करने के लिए बकायदा उत्तरकाशी के सेब उत्पादकों की मदद भी ली जा रही है.

उत्तराखंड में उत्तरकाशी में सबसे अधिक सेब का उत्पादन होता है. हाई क्वालिटी का सेब पैदा करने के कारण उत्तरकाशी में हजारों लोगों को रोजगार तो मिला ही है, साथ ही एक पहचान भी मिली है. उत्तरकाशी की तर्ज पर ही अब पिथौरागढ़ को भी ऐप्पल बेल्ट के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो रही है. पिथौरागढ़ के किसानों को सेब पैदा करने की आधुनिक तकनीक उत्तरकाशी के सेब उत्पादक दे रहे हैं. उत्तरकाशी के सेब उत्पादक मिंटू राणा का कहना है कि पिथौरागढ़ में सेब उत्पादन की सबसे अधिक सम्भावनाएं हैं. इस दिशा में अगर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए तो कुछ सालों में ही बेहतर नतीजे सामने आ जाएंगे.

उत्तराकाशी भेजे जाएंगे चुनिंदा कास्तकार
उत्तरकाशी के सेब उत्पादकों की मानें तो पिथौरागढ़ की जलवायु सेब उत्पादन के अनुकूल है. यही नहीं बर्फीले इलाके तो ए ग्रेड का सेब आसानी से पैदा कर सकते हैं. पिथौरागढ़ के कुछ इलाकों में कास्तकारों ने निजी प्रयासों से सेब उगाने में सफलता भी पाई है. लेकिन अब पहली बार सरकारी स्तर पर इस दिशा में कुछ हलचल दिखाई दे रही है. उद्यान विभाग चुनिंदा सेब उत्पादकों को उत्तरकाशी भेजने का प्लान भी बना रहा है. पिथौरागढ़ के जिला उद्यान अधिकारी आरएस वर्मा ने बताया कि जिले में अभी तक सेब उत्पादन के क्षेत्र में नहीं के बराबर काम हुआ है. लेकिन अब जो कोशिशें की जा रही हैं, उससे उम्मीद दिखाई दे रही है.

पहाड़ों में बिखरी जोत भी है बड़ी समस्या
पहाड़ों में बड़े स्तर पर सेब उत्पादन की राह में बिखरी जोत सबसे बड़ा रोड़ा है. ऐसे में जरूरी है कि सरकारी तंत्र को सबसे पहले इस समस्या का समाधान खोजना होगा. अगर ये सम्भव हुआ तो, तय है कि पिथौरागढ़ में बेहिसाब सेब तो पैदा होगा ही, साथ लोगों को अपने घर पर ही रोजगार भी मिल सकेगा.

Uttarakhand Monsoon : कहीं बेतहाशा तो कहीं बहुत कम क्यों बरस रहे बादल, क्या होगा असर?

उत्तराखंड में कहीं भारी तो कहीं सामान्य से कम बारिश हो रही है.

मानसून में जिस तरह से इस बार उत्तराखंड में बरसात हो रही है, उससे खेती और बागबानी खासी प्रभावित होगी. वहीं ज्यादा बारिश वाले इलाकों में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ेगा तो कम बारिश वाले इलाकों में सूखे जैसे हालात भी बनेंगे.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड में इस साल मानसून के तेवर खासे बदले हुए दिख रहे हैं. हालात ये हैं कि सूबे के दो ज़िलों में बेतहाशा बारिश हो रही है, तो वहीं शेष नौ ज़िले सामान्य बारिश को भी तरस रहे हैं. मौसम के इस बदलाव से खेती पर अच्छा खासा असर पड़ ही रहा है, पर्यटकों के आवागमन के साथ ही दूरदराज़ के इलाकों तक कोविड टीकाकरण अभियान की पहुंच भी प्रभावित हो रही है. राज्य के तमाम हिस्सों में बारिश किस तरह बेतरतीब हो रही है और खेती किसानी को किस तरह नुकसान हो रहा है, जानिए.

उत्तराखंड में इस साल मौसम चक्र में खासे बदलाव देखने को मिले हैं. सर्दियों का सीज़न जहां बिना बारिश के गुज़र गया, वहीं रबी की फसलों की कटाई के वक्त जमकर बारिश हुई. ऐसा ही कुछ बदलाव अब बरसात के सीज़न में दिख रहा है. जुलाई के अंत तक उत्तराखंड के बागेश्वर और चमोली ज़िलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई जबकि शेष नौ ज़िलों में ज़रूरी बारिश तक नहीं हो सकी. आंकड़ों के मुताबिक सबसे कम बरसात पौड़ी ज़िले में हुई है.

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खेती और बागबानी पर असर
बेतरतीब हो रही बारिश से खेती के साथ ही बागबानी पर भी असर पड़ रहा है. विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत का कहना है कि जिस तरह इस बार बारिश हो रही है, उससे किसानों के साथ ही काश्तकारों की दिक्कतें बढ़ेंगी. उन्होंने इस बात को भी माना कि इस साल के शुरू से ही मौसम चक्र में बदलाव दिखाई दिया है. जानकार ये भी कह रहे हैं कि जिन इलाकों में बारिश कम हो रही है, वहां सूखे जैसे हालात की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

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उत्तराखंड के ज़्यादातर ज़िलों में जुलाई में सामान्य से कम बारिश हुई है.

कहां कैसे रहे बारिश के आंकड़े?
बागेश्वर में मानसून सीज़न में 160 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि चमोली में 90 फीसदी अधिक. अल्मोड़ा में भी 22 फीसदी अधिक बारिश हुई लेकिन हैरानी की बात ये है कि पौड़ी में सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश हुई. हरिद्वार में 12, उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर में 11, नैनीताल और चम्पावत 6 फीसदी, पिथौरागढ़ में 4, रुद्रप्रयाग में 3 और देहरादून में 1 फीसदी कम बारिश हुई. जानकार इसके लिए ग्लोबल वॉर्मिंग का बड़ी वजह मान रहे हैं. मौसम के बदलाव पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डॉ. जेएस बिष्ट का कहना है कि कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश होना पर्यावरण में बड़े बदलाव की तरफ साफ संकेत कर रहा है.

अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की नजर, जीत को लेकर पूरा विश्वास

कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि हरीश रावत का अब कोई प्रभाव नहीं है. (सांकेतिक फोटो)

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव करीब है. ऐसे में हर राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतरने के लिए खुद को तैयार कर रहा है. सबकी नजर अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र (Almora-Pithoragarh Lok Sabha Constituency) में आने वाली विधानसभा सीटों पर है.

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पिथौरागढ़. अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र (Almora-Pithoragarh Lok Sabha Constituency) से कांग्रेस विधानसभा चुनाव में खासी उम्मीद लगाई बैठी है. राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत (Harish Rawat) को इलेक्शन कैम्पेन कमेटी की कमान मिलने से यह उम्मीद और परवान चढ़ रही है. यह बात अलग है कि बीजेपी (BJP) इससे रत्ती भर भी इत्तेफाक नहीं ऱख रही है. अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ कांग्रेस नेता हरीश रावत गृह क्षेत्र है. कभी रावत ने इसी लोकसभा सीट पर बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी को हराया था. तभी से इस लोकसभा क्षेत्र में हरीश ऱावत का दबदबा कायम है. पार्टी में विधायकों के टिकट हो या फिर सांसद के उम्मीदवार का चयन हर चुनाव में वही हुआ जो हरीश रावत ने चाहा.

दरअसल, रावत को इलेक्शन कैम्पेन कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने से इस लोकसभा के कांग्रेसी खासे उत्साहित हैं. कांग्रेस को भरोसा ही नहीं बल्कि पूरा यकीन है कि इसका लाभ विधानसभा चुनावों में मिलेगा. कांग्रेसी विधायक हरीश धामी का कहना है कि 2017 के चुनावों में जनता डबल इंजन के झांसे में आ गई थी, लेकिन डबल इंजन ने विकास के बजाय जनता का खून चूसा है. यही नहीं लोगों को अब अपनी गल्ती का एहसास हो गया है. इस लोकसभा ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेश चाहता है कि हरीश रावत फिर से सीएम बनें.

2017 विधानसभा चुनावों में हुई थी कांग्रेस की करारी हार  
बता दें कि अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 14 सीटे हैं. बात अगर बीते विधानसभा चुनावों की करें तो यहां कांग्रेस के सिर्फ 3 विधायक जीते थे. राज्य बनने के बाद ये कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन था. लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि 2017 में अधिकांश कांग्रेसी उम्मीदवार बीजेपी से कांटे के मुकाबले में हारे थे. ऐसे में कांग्रेस भले ही हरीश रावत को चेहरा बनाए जाने से खुश हो, लेकिन बीजेपी को इससे कोई मतलब नहीं है. बीजेपी का कहना है बीते विधासभा चुनावों में भी हरीश रावत ही चेहरा थे.  फिर भी कांग्रेस चारो खाने चित्त हुई थी. कुछ ऐसा ही इस बार भी होगा.

रावत के इर्द-गिर्द ही सिमटती नजर जरूर आएगी
कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि हरीश रावत का अब कोई प्रभाव नहीं है. बीजेपी पिछले बार से भी ज्यादा सीटें इस लोकसभा में जीतेगी. हरीश रावत को चेहरा बनाए जाने का कितना फायदा कांग्रेस को मिलेगा ये तो चुनाव के बाद ही साफ हो पाएगा. लेकिन इतना जरूर है कि  चुनावों तक इस लोकसभा की राजनीति रावत के इर्द-गिर्द ही सिमटती नजर जरूर आएगी.

उत्तराखंड: बॉर्डर पार कर रहे नेपाली नागरिक की नदी में गिरने से हुई मौत ने पकड़ा तूल, नेपाल ने बनाई जांच टीम

पिथौरागढ़ में उत्तराखंड बॉर्डर पार कर रहे नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी. इस मामले में एक जांच टीम बनाई गई है.

Indo-Nepal Border News: कुछ दिन पहले पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के गस्कू में एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी. बताया जाता है कि नेपाली नागरिक तार की मदद से भारत आ रहा था, इस दौरान वह तारों में फंस गया और नदी में गिरने से उसकी मौत हो गई.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड की बॉर्डर तहसील धारचूला के गस्कू में एक नेपाली नागरिक तारों की मदद से भारत में प्रवेश कर रहा था. लेकिन इसी दौरान काली नदी में गिरने से उसकी मौत हो गई. घटना के बाद नेपाल में विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शन तेज होने लगे. नेपाली संगठन इसके लिए सीमा सुरक्षा बल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. मुद्दे के तूल पकड़ने के पर नेपाल सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई है. जांच कमेटी ने नेपाल के दार्चूला के साथ ही भारत के गस्कू भी पहुंचकर हर पहलू की जांच की है.

30 जून को नेपाल के दार्चुला जिले के रहने वाले के जय सिंह धामी गस्कू में तार की मदद से भारत आने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन उसी दौरान काली नदी में गिरने से उनकी मौत हो गई. धामी के साथ 5 अन्य नेपाली नागरिक भी थे. जिन्होंने एसएसबी को घटना की सूचना दी थी. एसएसबी का कहना है कि उनके जवानों ने जय सिंह की तलाश की, लेकिन काली के तेज बहाव में उसका कहीं पतना नही लगा.

घटना के बाद नेपाल में तेज हुआ भारत विरोधी अभियान
नेपाल के विभिन्न संगठनों ने घटना के लिए भारत की सीमा सुरक्षा बल को जिम्मेदार ठहराया। नेपाली संगठनों का आरोप है कि एसएसबी ने तार काट दिया, जिससे जय सिंह नदी में जा गिरा. नेपाल में ये मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. नेपाल सरकार ने मामले की जांच के लिए होम मिनिस्ट्री के सहायक सचिव जनार्दन गौतम के अगुवाई में जांच टीम बनाई है.

टीम में नेपाल प्रहरी के उपमहानिरीक्षक, राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग के निदेशक एवं सशस्त्र प्रहरी बल के सीनियर एसपी और दार्चुला जिले सहायक डीएम मौजूद हैं. जांच टीम ने दार्चुला में विभिन्न लोगों से मुलाकात की. साथ ही नेपाली मीडिया और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से भी घटना के बारे में जानकारी हासिल की. नेपाली जांच टीम भारत से इजाजत मिलने के बाद भारत के गस्कू भी पहुंची. जहां ये घटना हुई थी. जांच टीम ने घटनास्थल का बारीक अध्ययन किया है.

तार के जरिए भारत प्रवेश करना है अवैध
एसएसबी की 11 वीं वाहिनी के कमाडेंट महेन्द्र प्रताप का कहना है कि दोनों मुल्कों के लोगों को तार के जरिए नदी को पार करने से मना किया गया था. उन्होनें कहा कि तार के जरिए आवाजाही पूरी तरह अवैध है. दोनों मुल्कों के बीच आवाजाही के लिए झूलापुल बनाएं गए हैं. साथ ही एसएसबी कमाडेंट ने साफ किया कि अगर कोई व्यक्ति तार की मदद से काली नदी पार करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

पिथौरागढ़: 1200 करोड़ की लागत वाला ऑल वेदर रोड फ्लॉप, पहली बरसात में नहीं रहा चलने लायक

150 किलोमीटर लंबे पिथौरागढ़-टनकपुर ऑल वेदर नेशनल हाईवे पर एक नहीं बल्कि दर्जनों डेंजर जोन बन गए हैं जो आए दिन दरक रहे हैं

Uttarakhand News: उम्मीद थी कि बारह सौ करोड़ रुपये की लागत से बनी ऑल वेदर रोड पिथौरागढ़ के साथ चंपावत के लोगों के लिए भी वरदान साबित होगी. लेकिन पहली बरसात में इस राष्ट्रीय राजमार्ग का जो हाल है, उससे लगता है कि वरदान अभिशाप में तब्दील हो गया है. हालात यह है कि बरसात शुरू होने के बाद चीन और नेपाल को जोड़ने वाला यह एनएच खुला कम है, बंद ज्यादा रहा है

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पिथौरागढ़. पिथौरागढ़-टनकपुर ऑल वेदर रोड (All Weather Road) प्रोजेक्ट पूरी तरह फेल साबित हो रहा है. हालत यह है कि सामरिक नजरिए से अहम यह नेशनल हाईवे (National Highway) पहली बरसात में ही जगह-जगह जमींदोज हो चुका है. सड़क की खस्ता हालत को लेकर अब इस पर सियासत शुरू हो गई है.

ऑलवेदर रोड पर सफर करना कितना खतरनाक है यह वो ही जान सकता है, जिसने इस पर सफर किया हो. उम्मीद थी कि बारह सौ करोड़ रुपये की लागत से बनी ऑल वेदर रोड पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के साथ चंपावत के लोगों के लिए भी वरदान साबित होगी. लेकिन पहली बरसात में इस राष्ट्रीय राजमार्ग का जो हाल है, उससे लगता है कि वरदान अभिशाप में तब्दील हो गया है. हालात यह है कि बरसात शुरू होने के बाद चीन और नेपाल को जोड़ने वाला यह एनएच खुला कम है, बंद ज्यादा रहा है. ऑल वेदर रोड निर्माण के दौरान ही इसकी कटिंग पर सवाल उठ रहे थे, जो अब सही साबित हो रहे हैं.

सत्ताधारी बीजेपी इस ऑल वेदर रोड को आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताने वाली थी. लेकिन घटिया काम ने उसे कठधरे में खड़ा कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष मयूख महर का कहना है कि गुणवत्ता को दरकिनार कर ऑल वेदर रोड का निर्माण हुआ है. जिसका नतीजा है कि लोगों के लिए इस पर सफर करना आसान नहीं रहा.

आम जनता के साथ-साथ जवान भी हो रहे परेशान
डेढ़ सौ किलोमीटर के इस एनएच पर एक नहीं बल्कि दर्जनों डेंजर जोन बन गए हैं जो आए दिन दरक रहे हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि सफर के दौरान यात्री जगह-जगह फंस जा रहे हैं. यही नहीं, डेंजर जोन को पार करना यात्रियों के लिए मौत को मात देने से कम नहीं है. इस एनएच पर आठ लाख की आबादी के साथ-साथ चीन और नेपाल बॉर्डर पर तैनात होने वाले सुरक्षाबल भी निर्भर हैं. बावजूद इसके निर्माणदायी संस्थाओं ने ऑल वेदर रोड के सपने को तार-तार कर डाला.

एनएच के एई पी.एल वर्मा का कहना है कि डेंजर जोन का टीएचडीसी ने सर्वे कर लिया है. सर्वे के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, शासन से धनराशि मिलने के बाद डेंजर जोन का ट्रीटमेंट किया जाएगा.

पिथौरागढ़: चुनावी साल में नैनी-सैनी एयरपोर्ट से रेगुलर फ्लाइट पर सियासी घमासान तेज, जानें कांग्रेस का प्लान

ऐसे में अब विपक्ष इस मुद्दे पर जमकर सियासत गर्मा रहा है.

बीजेपी सरकार (BJP Government) नियमित उड़ान का दावा तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर दावे को हकीकत में तब्दील करने की कोई भी कवायद नजर नहीं आ रही है.

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पिथौरागढ़. चुनावी साल में  नैनी-सैनी एयरपोर्ट (Naini-Saini Airport) से रेगुलर फ्लाइट के मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है. कांग्रेस जहां इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव तक हर कीमत पर जिंदा रखना चाहती है तो वहीं, सरकार की कोशिश है कि चुनाव से पहले किसी भी हालत में हवाई सेवा शुरू हो. दरअसल,  पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से नियमित उड़ान का मुद्दा यहां की सियासत का सबसे बड़ा केन्द्र है. इस मुद्दे ने किसी राजनेता को फर्स पर पटका तो किसी को अर्स पर भी पहुंचाया है. दो दशकों के लम्बे इंतजार के बाद  2019 में दिल्ली और देहरादून के लिए फ्लाइट (Flight) शुरू हुई थी. लेकिन ये फ्लाइट यहां के लोगों को बिलकुल भी रास नही आई. कभी प्लेन का दरबाजा हवा में खुला तो कभी रन-वे पर ही प्लेन फिसल गया. नतीजा ये रहा कि बीते साल मार्च से हवाई सेवा पूरी तरह ठप है.

ऐसे में अब विपक्ष इस मुद्दे पर जमकर सियासत गर्मा रहा है. कांग्रेस के पूर्व विधायक मयूख महर का कहना है कि 5 साल गुजरने के बाद भी बीजेपी की सरकार नियमित हवाई सेवा शुरू नही कर पाई है. ऐसे में कांग्रेस को सड़कों में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. साथ ही महर ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नियमित हवाई सेवा शुरू नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.

3 जिलों की 8 विधानसभाओं को प्रभावित कर सकता है ये मुद्दा
रेगुलर फ्लाइट का मुद्दा पिथौरागढ़ के साथ ही चम्पावत और बागेश्वर को भी प्रभावित करता है. ऐसे में चुनावी नजरिए देखें तो 8 विधानसभा सीटों का गणित नैनी-सैनी हवाई सेवा पर टिका है. यही वजह है कि चुनावी साल में कांग्रेस हर हाल में इसकी तपिश को जिंदा रखे हुए है. वहीं,  सरकार सितम्बर से नियमित उड़ान शुरू करने का दावा पहले ही कर चुकी है. कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल की मानें तो हर हाल में जल्द ही दिल्ली-देहरादून के साथ ही पंतनगर के लिए भी नियमित फ्लाइट शुरू होगी.

दावे को हकीकत में उतारने की नहीं हो रही है कोई कोशिश
सरकार नियमित उड़ान का दावा तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर दावे को हकीकत में तब्दील करने की कोई भी कवायद नजर नहीं आ रही है. अब देखना ये है कि नियमित उड़ान शुरू कर सरकार विपक्ष को करारा जवाब देती है या फिर विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे से जुझती नजर आती है.

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