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Uttrakhand Rainfall: इस मई में रिकॉर्डतोड़ बरसे बादल, कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश? जानें अपने जिले का हाल

उत्तराखंड में इस बार मई में सामान्य से 58 फीसदी ज़्यादा बारिश हो चुकी है.

उत्तराखंड में इस बार मई में सामान्य से 58 फीसदी ज़्यादा बारिश हो चुकी है.

उत्तराखंड में इस बार मौसम का मिज़ाज पूरी तरह बदला हुआ है. मार्च के महीने में एकदम सूखा पड़ा रहा तो अप्रैल में भी बारिश न के बराबर हुई, पर अब मई के महीने में बादलों की मेहरबानी इतनी है कि छाते ही नहीं, गर्म कपड़ों और कंबल की ज़रूरत तक पड़ गई.

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पिथौरागढ़. ऐसा बहुत कम होता है कि मई के महीने में सर्दियों जैसा एहसास हो लेकिन इस बार उत्तराखंड में मई में बदरा जमकर बरसे. आलम ये है कि मई के महीने में पूरे राज्य में सामान्य से 58 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है जबकि करीब एक हफ्ता अभी शेष है. चार धाम समेत पहाड़ों के कई इलाकों में तो इस महीने में माइनस 5 डिग्री तक तापमान जा पहुंचा. हालांकि आज 25 मई से मौसम खुलने के बाद से लोगों को ठंड से राहत मिलना शुरू हुई है और पारा सामान्य की तरफ बढ़ रहा है.

उत्तराखंड में इस बार मार्च और अप्रैल की गर्मी ने रिकॉर्ड बनाए थे, तो मई के महीने में पड़ी ठंड ने भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पिथौरागढ़ और बागेश्वर में इस बार मई में सबसे अधिक बारिश हो रही है. बागेश्वर में जहां सामान्य से 160 फीसदी अधिक बारिश हो गई है, वहीं पिथौरागढ़ में 135 फीसदी. गर्मियों में हो रही इस बरसात को जानकार खेती और बागबानी के लिए खतरनाक बता रहे हैं.

मैदानों में हो रही जमकर बारिश
पहाड़ों में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के मैदानी ज़िलों में गर्मियों में बारिश का रिकॉर्ड टूटा है. सामान्य से कितनी अधिक बारिश किस ज़िले में हुई है, एक नज़र में देखें.

बागेश्वर में 160%
पिथौरागढ़ में 135%
ऊधमसिंह नगर में 97%
हरिद्वार में 67%
देहरादून में 34%
चमोली में 9%

बारिश से बागबानी पर असर?
यानी मई में सबसे कम बारिश चमोली ज़िले में हुई है, लेकिन यहां भी सामान्य से 9 फीसदी ज्यादा ही दर्ज की गई है. विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत का कहना है कि खेतों में खड़ी रबी की फसलों को बारिश व ओलों से नुकसान हो सकता है. इसी संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जेएस बिष्ट ज्यादा बारिश को रबी की फसलों से अलग खरीफ की फसलों के लिए फायदेमंद बता रहे हैं.

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बीते कुछ सालों में मौसम चक्र में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसकी सबसे अधिक मार खेती और बागबानी पर पड़ी है. जानकार कहते हैं कि अब ज़रूरत इस बात की है कि बदलते मौसम चक्र का बारीक अध्ययन कर खेती और बागबानी का नया टाइम टेबल तय किया जाए, ताकि नुकसान से बचा जा सके.

Tags: Uttarakhand Rains, Weather news

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