उत्तराखंड की शीतल ने कंचनजंघा चोटी फतह कर रचा नया इतिहास

शीतल ने अपना अभियान को शीतल ने अपना अभियान शुरू किया और 21 अप्रैल को कंचनजंघा फतह कर 3 जून को वापस लौटी है. इस अभियान को खत्म करने के बाद शीतल ने कहा कि उसका विश्व की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का सपना है.

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2018, 10:21 AM IST
उत्तराखंड की शीतल ने कंचनजंघा चोटी फतह कर रचा नया इतिहास
कंचनजंघा के शिखर पर पहुंची पिथौरागढ़ की शीतल
satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2018, 10:21 AM IST
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के सल्मोड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय शीतल ने देश की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा (8586 मीटर) फतह कर नया इतिहास रचा है. शीतल एनसीसी की कैडेट है. ओनएनजीसी ने स्कॉलरशिप देकर शीतल को कंचनजंघा अभियान पर भेजा था.

शीतल ने अपना अभियान को शीतल ने अपना अभियान शुरू किया और 21 अप्रैल को कंचनजंघा फतह कर 3 जून को वापस लौटी है. इस अभियान को खत्म करने के बाद शीतल ने कहा कि उसका विश्व की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का सपना है.

कंचनजंघा चोटी देश की सबसे ऊंची चोटी है और पर्वतारोही के लिए सबसे मुश्किल अभियानों में से एक है. कंचनजंघा चोटी दार्जिलिंग में स्थित है, साथ ही यह सिक्किम व नेपाल की सीमा से लगती हुई हिमालय पर्वत श्रेणी का एक हिस्सा है. माना जाता है कि इस अभियान को पूरा करने के लिए कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन शीतल और उसकी पूरी टीम ने दो माह में इस अभियान को पूरा किया है, वहीं टीम के लीडर्स भी मानते हैं कि उनको पर्वतारोहण करने में काफी दिक्कतें हुई लेकिन टीम कें हौंसले से इस अभियान को पूरा किय जा सका.

शीतन ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर न सिर्फ उत्तराखंड का नाम रोशन किया है, बल्कि प्रदेश की युवतियों के लिए भी एक नई प्रेरणा बनकर सामने आई है.
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