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पिथौरागढ़: कभी देखा है बाजार-स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालना, अगर नहीं तो देखें ये VIDEO

Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में भारी बारिश के चलते कालिका खुमती गाड़ में 2020 में चार सीसी पुल बह गए थे, तब से ग्रामीण यहां पर लकड़ी के बने चार अस्थायी पुल से आवाजाही कर रहे थे, जो इस बार की बारिश की भेंट चढ़ गए. जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ग्रामीणों ने बारिश में नदी पार न करने की अपील की है.

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    रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

    पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ग्राम कालिका खुमती गाड़ में लकड़ी के चार पुल बहने से पिछले तीन दिनों से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं. पुल बहने से 700 से 800 की आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यहां के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द पक्के पुलों का निर्माण करने की मांग की है. खुमती के ग्राम प्रधान गोपाल सिंह धामी ने प्रशासन से कालिका खुमती गाड़ में वैकल्पिक पुल अथवा ट्रॉली लगाने और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों की सुरक्षा के लिए पीआरडी जवान नियुक्त करने की मांग की है. उन्‍होंने बताया कि कालिका खुमती की 20 किलोमीटर की सड़क भी पिछले तीन से बंद होने से एक हजार की आबादी 15 से 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने को मजबूर है.

    दरअसल 2020 में भारी बारिश के चलते कालिका खुमती गाड़ में चार सीसी पुल बह गए थे, तब से ग्रामीण यहां पर लकड़ी के बने चार अस्थायी पुल से आवाजाही कर रहे थे, जो इस बार की बारिश की भेंट चढ़ गए. इसके बाद ग्राम पंचायत खुमती ग्राम के दुमौलिया, रोलाताली, घटखोला, गरुडिया, थोड़ा, सुयालथौड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों के 700 से 800 ग्रामीण पिछले पांच दिनों से एक दूसरे के सहारे उफनाती हुई कालिका खुमती गाड़ पार करने के लिए मजबूर हैं. उन्होंने वीडियो के माध्यम से प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है.

    स्‍कूल जाने के लिए बच्‍चों को पार करनी होती है नदी
    अब बच्चों के स्कूल खुलने का समय भी नजदीक है, ऐसे में बिना पुल बरसात में नदी पार करना जान जोखिम में डालना है. इसी गांव के दसवीं में पड़ने वाले छात्र हिमांशु सिंह ने बताया कि गांव से 60 बच्चे स्कूल पढ़ने के लिए इसी नदी को पार करके जाते हैं. अब 6 जुलाई से स्कूल खुलने हैं, ऐसे में उनके सामने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए काफी संघर्ष है. वहीं, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने ग्रामीणों की समस्या का जल्द ही समाधान करने की बात करते हुए बरसात में नदी पार न करने की अपील की है.

    पिथौरागढ़ में अभी भी कई इलाके ऐसे हैं, जहां पुल न होने से ट्रॉली के सहारे ग्रामीण नदी पार करने को मजबूर हैं. बरसात में उफनाई नदी की लहरों में एक ट्रॉली के सहारे नदी पार कर रहे इन ग्रामीणों को खतरे के खिलाड़ी कहें या मजबूरी में अपनी जान से खेलना, जो कहीं न कहीं विकास के दावों को आईना दिखाने का काम कर रहा है.

    Tags: Pithoragarh district, Pithoragarh hindi news, Uttarakhand weather

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