सैटेलाइट फोन पर 1 मिनट के लिए 30 रुपये देने पड़े तो लोग करने लगे नेपाली सिम का इस्तेमाल
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सैटेलाइट फोन पर 1 मिनट के लिए 30 रुपये देने पड़े तो लोग करने लगे नेपाली सिम का इस्तेमाल
पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ के माध्यम से नेपाल-चीन सीमा के लोगों के लिए सैटेलाइट फोन मुहैया कराए थे.

उत्तराखंड में नेपाल बॉर्डर (India-Nepal Border) से सटे इलाकों में सैटेलाइट फोन (Satellite Phone) देते समय कहा गया कि एक मिनट की कॉल के लिए 12 रुपये देने होंगे, लेकिन कॉल रेट महंगी देख लोगों ने दोबारा नेपाली सिम का शुरू कर दिया इस्तेमाल.

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पिथौरागढ़. दुनिया 5जी की तैयारी कर रही है और चीन इस रेस में आगे निकल रहा लेकिन चीन और नेपाल सीमा (China-Nepal Border) पर रहने वाले भारतीय आज भी एक अदद फ़ोन कॉल के लिए विदेशी संचार माध्यमों पर निर्भर हैं. इसे देखते हुए पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ (SDRF) के माध्यम से इन इलाकों के लिए सैटेलाइट फोन (Satellite Phone) मुहैया कराए थे. लेकिन जहां पूरा देश लगभग मुफ़्त में फ़ोन पर बात करता है वहीं इन लोगों को एक मिनट की कॉल के लिए 25 से 30 रुपये देने पड़ रहे हैं. इससे परेशान ग्रामीण फिर से नेपाली मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल शुरू कर रहे हैं. उधर स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या पर हाथ खड़े कर दिए हैं.

12 नहीं, 25-30 रुपये की एक कॉल

पिथौरागढ़ के नेपाल-चीन सीमा से लगते इलाकों में आज भी भारतीय फ़ोन कंपनियां नहीं पहुंची हैं. इसलिए धारचूला से गूंजी तक ब्यास घाटी के ग्रामीण शेष दुनिया तक जुड़ने के लिए नेपाली मोबाइल सिग्नलों का सहारा लेते हैं. दारमा, चौदास और जोहार की घाटियों में नेपाली सिग्नल भी नहीं पहुंच पाते हैं जिसे देखते हुए ही बीते दिनों यहां सैटेलाइट फ़ोन दिए गए थे.



अब सैटेलाइट फोन की आसमान छूती दर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी की वजह बन गई है. फ़ोन देते वक्त दावा किया जा रहा था कि एक मिनट की कॉल के लिए 12 रुपये देने होंगे लेकिन जब बॉर्डर के ग्रामीणों ने इसका इस्तेमाल शुरू किया तो पता चला कि यह एक मिनट की कॉल 25 से 30 रुपये की पड़ रही है.
बहुत महंगा पड़ रहा है

दारमा घाटी के दुग्तु गांव के सैटेलाइट फोन संचालक वीरेंद्र दुग्ताल ने बताया कि 1771 रुपये का रिचार्ज कराने पर टॉक टाइम सिर्फ 600 रुपये का मिला. यही नहीं सैटेलाइट फोन को रिचार्ज कराने के लिए 500 रुपये का किराया देकर पिथौरागढ़ मुख्यालय भी जाना पड़ा.

सोशल वर्कर शकुंतला दताल ने इस पूरे मामले से एसडीआरएफ और सरकार को अवगत कराया है. दताल कहती हैं कि बॉर्डर इलाकों में रहने वालों की आर्थिक स्थिति पहले ही कमज़ोर है. ऐसे में सैटेलाइट फोन की महंगी दर लोगों की कमर तोड़ रही है.

प्रशासन ने किए हाथ खड़े 

हालात यह हैं कि जिन इलाकों में नेपाली सिग्नल पहुँच रहे हैं वहां ग्रामीणों ने भारतीय सैटेलाइट फोन के बजाय नेपाली सिम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. नेपाली सिम से एक मिनट की कॉल के 12 रुपये खर्च होते हैं. जिन गाँवों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं वहाँ लोग अब मुफ्त कॉल की डिमांड कर रहे हैं.

धारचूला के एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला का कहना है कि यह मामला एसडीआरएफ और भारत सरकार के बीच का है. इसकी वजह से वे उपभोक्ताओं की समस्या को दूर करने में सक्षम नहीं हैं. साथ ही उनका कहना है कि सैटेलाइट फोन संचार विहीन गांवों तक संपर्क करने के लिए दिए गए हैं.
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