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पिथौरागढ़ में हंगामा, तीन महीने से आंदोलन कर रहे गंगोलीहाट के ग्रामीणों ने विधायक को बनाया बंधक!

गंगोलीहाट से विधायक मीना गंगोला. (File Image:Twitter)

गंगोलीहाट से विधायक मीना गंगोला. (File Image:Twitter)

उत्तराखंड में बुनियादी विकास न होने से नाराज़ 24 से ज़्यादा गांवों के लोगों के सब्र का बांध तब टूट गया, जब वह विधायक क्षेत्र में एक कार्यक्रम में पहुंचीं, जिन्होंने ग्रामीणों की मांग और समस्या को सुनने में महीनों से दिलचस्पी नहीं ली.

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    पिथौरागढ़. उत्तराखंड में चुनाव की सरगर्मियां बढ़ने के साथ ही विकास से वंचित लोगों की नाराज़गी भी आंदोलन का रूप लेने लगी है. ताज़ा मामले के मुताबिक सड़क न बनने से नाराज़ ग्रामीणों ने ज़िले के गंगोलीहाट की विधायक को घंटों तक बंधक बनाकर रखा. ये ग्रामीण तीन महीनों से अपनी मांग को लेकर क्रमिक अनशन और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इनका आरोप था कि विधायक बनने के बाद मीना गंगोला ने गांवों के विकास पर ध्यान देना तो दूर, ग्रामीणों की बात तक सुनने का समय नहीं निकाला. दो दर्जन से ज़्यादा गांवों की करीब 10 हज़ार की आबादी एक छोटी सी सड़क न होने से मुख्यधारा से वंचित है.

    घटनाक्रम कुछ इस तरह हुआ कि मड़कनाली-सुरखाल सड़क के लिए आंदोलन तेज़ करते हुए पिछले तीन महीनों में ग्रामीणों ने न केवल धरना प्रदर्शन किया बल्कि तहसील मुख्यालय पर जुलूस भी निकाला और विधायक मीना गंगोला के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी भी की. विधायक पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विधायक ने उनकी बात नहीं सुनी और गुमराह करने की कोशिश की. इसी बीच, एक कार्यक्रम के लिए विधायक जब गंगोलीहाट पहुंचीं तो ग्रामीणों को खबर मिली और उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर जाकर हंगामा खड़ा कर दिया.

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    विधायक का बचाव करती पुलिस और ग्रामीणों के बीच भी नोकझोक हुई.

    भारी पुलिस बल तैनात किया गया
    खबरों की मानें तो ग्रामीणों को पता चला था कि गंगोला गैस के दफ्तर में उज्ज्वला योजना के तहत वितरण करने पहुंची थीं. वहां ग्रामीणों के आक्रोश के कारण ऐसे हालात बन गए कि विधायक मीना गंगोला गैस के दफ्तर में ही कैद होकर रह गईं. घंटों के हंगामे के दौरान पुलिस और प्रशासन का भारी दल मौके पर पहुंचा. पुलिस ने जब विधायक का पक्ष लिया तो ग्रामीणों और पुलिस के बीच भी झड़प हुई.

    बताया जाता है कि विधायक के आश्वासन पर भी ग्रामीण नहीं माने और उन्होंने साफ कहा कि जब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं होगा, आंदोलन तीव्र गति से चलता रहेगा. गौरतलब है कि मड़कनाली से सुरखाल तक की सड़क के निर्माण का वादा 2014-15 में उत्तराखंड सरकार ने किया था, लेकिन छह साल बाद भी यह सड़क नहीं बनी. अब जबकि उत्तराखंड में चुनावी माहौल बन रहा है, तो ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ जैसे अवामी नारे भी कई जगह सुनाई दे रहे हैं.

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