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water crisis in seri kanda and many villages of pithoragarh localuk

Pithoragarh: पीठ पर 40 लीटर पानी और खड़ी चढ़ाई, कुछ ऐसा है पहाड़ की महिलाओं का दर्द

हम पिथौरागढ़ के ग्रामीण इलाके सेरी कांडा की बात कर रहे हैं, जहां अभी तक सरकार की तमाम पेयजल योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं. नतीजा यह है कि यहां की महिलाओं को थोड़े-बहुत पानी के लिए भी दो किलोमीटर दूर पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ती है.

    (रिपोर्ट- हिमांशु जोशी)

    पिथौरागढ़. ऊंचे-नीचे और पथरीले रास्ते पर्यटकों के लिए भले ही सौंदर्य की कल्पना रचते हों, लेकिन यहां जीने वालों के लिए ये रोज़ की कठिनाई ही होते हैं. उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, जहां की खूबसूरती देखने लोग (Uttarakhand Tourism) विदेशों तक से पहुंचते हैं. यहां के ऊंचे पहाड़ जितने खूबसूरत लगते हैं, उससे कई ज्यादा यहां रहने वाले लोग कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिताते हैं. टेढ़े-मेढ़े रास्तों के साथ पहाड़ों की कठिन चढ़ाई और संसाधनों की कमी से यहां के लोगों की समस्याएं भी काफी बड़ी हैं, जिसे अपनी मजबूरी और अपनी जीवनशैली का हिस्सा मानकर लोग जीवनयापन करते हैं. पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी ज़िलों में ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी काफी कठिन है, जिनके ऊपर पहाड़ जैसी जिम्मेदारियां होती हैं.

    राज्य के सीमांत जिले पिथौरागढ़ (Water Crisis in Pithoragarh Villages) में कई ऐसे गांव हैं, जहां सरकार की तमाम पेयजल योजनाएं आज तक नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे यहां महिलाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों की तलाश करनी पड़ती है जो काफी दूर होते हैं. वहां से पानी पीठ पर ढोने में ही महिलाओं का सारा दिन निकल जाता है. पहाड़ी रास्तों पर 40 लीटर के बर्तन में पानी ढोने की कल्पना शायद ही कोई शहरी व्यक्ति कर पाए.

    हम पिथौरागढ़ के ग्रामीण इलाके सेरी कांडा की बात कर रहे हैं, जहां अभी तक सरकार की तमाम पेयजल योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं. नतीजा यह है कि यहां की महिलाओं को थोड़े-बहुत पानी के लिए भी दो किलोमीटर दूर पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ती है और इसी पानी से पूरे घर के काम होते हैं. पीठ पर पानी ढोने में महिलाओं का पूरा दिन निकल जाता है. महिलाओं ने अपनी मजबूरी वीडियो के माध्यम से News 18 Local को बताई है.

    सेरी कांडा के स्थानीय युवक पेयजल की समस्या को लेकर कई बार जिला मुख्यालय पहुंच चुके हैं. इस गांव जैसे पिथौरागढ़ में अनेक ऐसे गांव हैं, जहां पेयजल की आपूर्ति अभी तक नहीं हो पाई है, जबकि सरकार की ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाने की तमाम योजनाएं चल रही हैं, लेकिन धरातल पर पहाड़ों की एक बड़ी आबादी अभी भी प्राकृतिक स्रोतों पर ही निर्भर है. जल निगम के एई पीयूष डिमरी ने 2024 तक ‘जल जीवन मिशन’ के तहत सभी ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति की बात कही.

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