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ऐसा क्या हुआ जो इन गांवों से अपना बसेरा छोड़ कर पलायन कर रहे हैं लोग?

ऐसा क्या हुआ जो इन गांवों से अपना बसेरा छोड़ कर पलायन कर रहे हैं लोग?

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लोग कर रहे पलायन, नहीं मिल रहीं जरुरत की चीजें -

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लोग कर रहे पलायन, नहीं मिल रहीं जरुरत की चीजें -

New Tension in Uttrakhand : चीन (China) और नेपाल (Nepal) बॉर्डर (Border) से सटे पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में तो पलायन (Migration) का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. पलायन आयोग की रिपोर्ट पहले ही साफ कर चुकी है कि यहां 41 गांवों में 50 फीसदी से ज्यादा पलायन हो चुका हैं.

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पिथौरागढ़. लाख दावों के बाद भी पिथौरागढ़ जिले में पलायन थमने का नाम नही ले रहा है. पलायन आयोग की रिपोर्ट पहले ही साफ कर चुकी है कि यहां 41 गांवों में 50 फीसदी से अधिक पयालन हो चुका है. लेकिन अब जल-जीवन मिशन की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कई गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं.
हुक्मरान भले कुछ कहें, लेकिन पलायन की रफ्तार कम होने का नाम नही ले रही है. चीन और नेपाल बॉर्डर से सटे पिथौरागढ़ में तो पलायन का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. पलायन आयोग की रिपोर्ट पहले ही साफ कर चुकी है कि यहां 41 गांवों में 50 फीसदी से ज्यादा पलायन हो चुका हैं. लेकिन अब जो रिपोर्ट जल-जीवन मिशन के सर्वे में निकली है, उससे हर कोई हैरान है. इस रिपोर्ट के मुकाबिक जिले के 1542 गांव ही आबाद हैं जबकि पंचायत चुनावों के वक्त जिले में 16 सौ अधिक गांव आबाद थे.

जल निगम के अधिशासी अभियंता रंजीत धर्मसत्तू ने बताया कि बीते 3 सालों में उन्होनें जो गांवों में सर्वे किया था. इस आधार पर ये आंकड़ा निकला है. उनका कहना है कि जल-जीवन मिशन के तहत सिर्फ उन्हीं गांवों में कनेक्शन नहीं दिया जाता है, जहां कोई नही रहता है.

बेरीनाग तहसील में सबसे अधिक 24 गांव हो गए हैं खाली
इस लिहाज के देखें तो वर्तमान में 60 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां इंसानी जिंदगी की कोई आहट नजर नही आ रही है. लगातार बढ़ रहे पलायन के पीछे बिजली, पानी, रोड, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली है. पलायन की सबसे अधिक मार बेरीनाग तहसील पर पड़ी है. बेरीनाग में 24 गांव मानव विहीन हो चुके हैं जबकि गंगोलीहाट तहसील में 13 गांव खाली हो चुके हैं. खाली हो चुके गांवों में रिवर्स पलायन के लिए सरकार कई योजनाओं को भी संचालित कर रही है. जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी का कहना है कि जिन गांवों में पलायन बढ़ रहा है, वहां खास योजनाएं संचालित की जा रही हैं ताकि लोग अपने घरों को लौट सकें.

बीते 3 सालों में जिस तेजी से पिथौरागढ़ में पलायन बढ़ा है, उससे साफ साबित हो रहा है कि लोगों की जरूरतें गांव के भीतर पूरी नहीं हो पा रही हैं. ऐसे में सरकार को अब गंभीर कदम उठाने की भी जरूरत है. पिथौरागढ़ जिले में बढ़ता पलायन देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है क्योंकि ये जिला नेपाल के साथ ही चाइना से भी सटा है.

Tags: Pithoragarh news, Rural Migration, Uttrakhand, Uttrakhand ki news, Village

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