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Politics of Uttarakhand : क्या प्रियंका गांधी का फॉर्मूला नहीं मानते उत्तराखंड के कांग्रेसी?

Politics of Uttarakhand : क्या प्रियंका गांधी का फॉर्मूला नहीं मानते उत्तराखंड के कांग्रेसी?

प्रियंका गांधी के चुनावी फॉर्मूले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस में चर्चा ज़ोरों पर है.

प्रियंका गांधी के चुनावी फॉर्मूले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस में चर्चा ज़ोरों पर है.

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान जबसे किया है, कांग्रेस से जुड़ी महिला नेताओं में हर जगह भारी उत्साह है. उत्तराखंड में भी महिलाएं (Uttarakhand Women Leaders) आस लगाए हुए हैं कि अब चुनाव में उन्हें टिकट मिलने का प्रतिशत बढ़ेगा. हरीश रावत (Harish Rawat) भी महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कहकर ये भी कह चुकी हैं कि जीतने की संभावना ही कैंडिडेट चयन (Candidate Screening) का बड़ा आधार होगी. इधर, उत्तराखंड आईं नेटा डिसूज़ा (Neta D'Souza) ने कह दिया कि उत्तराखंड के प्रभारी नेता तय करेंगे कि महिलाओं को किस हिसाब से टिकट दिए जाएंगे.

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पिथौरागढ़. यूपी में भले ही कांग्रेस विधानसभा चुनाव में टिकट देने में 40 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं को देने जा रही हो, लेकिन उत्तराखंड में प्रियंका गांधी का ये फार्मूला लागू होने में संदेह ही बना हुआ है. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेटा डिसूजा उत्तराखंड के दौरे पर आईं तो उन्होंने एक बयान ​देकर यह साफ कर दिया कि प्रियंका गांधी के फैसले को कांग्रेस की नीति के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए. गांधी ने उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियान के लिहाज़ से उस राज्य के लिए यह फैसला लिया है. नेटा के मुताबिक हर राज्य की स्थितियां अलग हैं और हर राज्य के प्रभारी इस बारे में तय करेंगे.

नेटा का कहना है कि यूपी में 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने का फैसला गांधी ने बतौर यूपी चुनाव प्रभारी लिया, लेकिन उत्तराखंड में जो भी फैसला होगा, वो यहां के प्रभारी नेता अन्य शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर लेंगे. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भरोसा ज़रूर जताया कि महिलाओं को उत्तराखंड में पार्टी अधिक से अधिक सीटों पर टिकट देने के लिए प्रतिबद्धता दिखाएगी. नेटा ने ये भी कहा कि उत्तराखंड में यूपी वाला फार्मूला भले लागू न हो, लेकिन यहां भी प्रियंका गांधी का नारा ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ विधानसभा चुनावों में ज़ोरशोर से उठाया जाएगा.

उत्तराखंड में महिलाओं की ताकत और स्थिति?
वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा में सिर्फ 6 महिला विधायक हैं. इनमें भी 2 महिला विधायकों को उनके विधायक पति के निधन होने पर उपचुनावों में जीत मिली थी, जबकि पहाड़ की अधिकांश सीटों पर महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों की मुकाबले ज्यादा है. यही नहीं, चिपको से लेकर उत्तराखंड आंदोलन में भी महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई. इसके बावजूद प्रमुख राजनीतिक दलों ने महिलाओं को वांछित तवज्जो नहीं दी.

इस बारे में राजनीतिक मामलों के जानकार प्रेम पुनेठा का मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल का फोकस सिर्फ चुनाव जीतने पर रहता है. ऐसे में हर पार्टी चाहती है कि टिकट मज़बूत नेता को दिया जाए. इस लिहाज़ से महिला नेता पुरुष नेताओं के मुकाबले कई बार कमज़ोर साबित हो जाती हैं. अब बात उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं के पाले में है कि वो प्रियंका गांधी की बात मानेंगे या नहीं!

जनरल रावत के गांव पहुंची कांग्रेस की यात्रा
उत्तराखंड कांग्रेस ने वीर ग्राम प्रणाम यात्रा का आगाज़ किया और शहीदों व सैनिकों के सम्मान के लिए शुरुआती चरण में यात्रा पौड़ी के सैंण गांव पहुंची, जो दिवंगत जनरल बिपिन रावत का पैतृक गांव है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ जनरल को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें प्रदेश का गौरव करार दिया. भाजपा की शहीद सम्मान यात्रा के जवाब में कांग्रेस ने इस यात्रा का आगाज़ किया है, जिसका लक्ष्य राज्य के उन ज़्यादा से ज़्यादा गांवों में पहुंचना है, जहां शहीदों या सैनिकों के परिवार ज़्यादा हैं.

Tags: Priyanka gandhi, Uttarakhand Assembly Election, Uttarakhand Congress, Uttarakhand news

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