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पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणा! पिता और खुद के जूनून से यशस्वी ने भारत को एशियाई शूटिंग में दिलाया गोल्ड

उत्तराखंड की यशस्वी जोशी ने शियन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.

उत्तराखंड की यशस्वी जोशी ने शियन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.

Uttarakhand News: सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ की रहने वाली यशस्वी जोशी ने शूटिंग वो कर दिखाया जो अभी तक उत्तराखंड में कोई ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

पिथौरागढ़ की यशस्वी जोशी ने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता.
10 मीटर शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली पहाड़ की ये पहली बेटी यशस्वी जोशी.

पिथौरागढ़. कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कुछ भी असंभव नहीं. ये बात सही साबित की है पिथौरागढ़ की यशस्वी जोशी ने. यशस्वी ने अपने नाम के अनुरूप ही एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता और अपने देश व प्रदेश को यश दिलाया. बीते दिनों साउथ कोरिया में हुई शूटिंग चैंपियनशिप में यशस्वी ने टीम इवेंट में गोल्ड हासिल किया. 10 मीटर शूटिंग में गोल्ड हासिल करने वाली पहाड़ की ये पहली बेटी है.

खास बात ये है कि यशस्वी ने शूटिंग में ये मुकाम अपने पिता व स्यवं के जूनून की बदौलत पाया है. यशस्वी को निशानेबाजी का शौक अपने पिता मनोज जोशी से लगा. यशस्वी के पिता शूटिंग के शौकीन हैं और अपने शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने घर के करीब ही शूटिंग रेंज भी बनाई है. इस शूटिंग रेंज ने यशस्वी की दूनिया ही बदल डाली. यशस्वी जोशी ने बताया कि अपने पिता को खेलते हुए देखकर उनमें शूटिंग का शौक पैदा हुआ. लेकिन, इस शौक को मुकाम तक पहुंचाने में उनके पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

यशस्वी को इस मुकाम तक पहुंचाने में पिता और कोच मनोज जोशी की तपस्या भी है. मनोज जोशी ने यशस्वी को निशानेबाजी के वो सभी गुर सिखाए, जिससे वो इंटननेशनल लेबल पर आसानी से अपना लोहा मनवा रही है. पिता और कोच मनोज जोशी का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी के शौक को पहचाना और उसे पूरी मदद की. लेकिन, अपनी कमाई से ही उन्होंने पिस्टल खरीदी और शूटिंग रेंज तैयार की.

अब यशस्वी का टारगेट है ओलम्पिक में गोल्ड लाना
टीम इवेंट में गोल्ड हासिल करने वाली पहाड़ की ये बेटी अब ओलम्पिक में देश के लिए गोल्ड लाना चाहती है. यशस्वी ने जिस तेजी से निशानेबाजी में खुद को साबित किया है, उसे देखकर लगता है कि ओलम्पिक में गोल्ड भी एक दिन देश की झोली में जरूर आएगा.

पहाड़ की बेटियों के लिए ‘प्रेरणा’ को मिले सरकारी मदद
यशस्वी ने गोल्ड दिलाकर उत्तराखंड के साथ ही देश का गौरव तो बढ़ाया है. लेकिन ये मुकाम पाने में सरकारी स्तर पर उसे कोई सहयोग नहीं मिला है. यशस्वी के पिता मनोज ने ही अपनी बेटी को वो सबकुछ महैय्या करवाया जो निशानेबाजी के लिए जरूरी है. अपनी लगन और पिता के सहयोग यशस्वी ने वो कर दिखाया, जो पहाड़ बेटियों के प्रेरणा है. अब उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकारी तंत्र भी आम घर की इस बेटी की भविष्य राह आसान बनाने में मदद करेगा.

Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand news

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