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आपदा के पुराने जख्मों को ना कुरेदें रमेश पोखरियाल: राज बब्बर

राज्यसभा सांसद राजबब्बर ने हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री  <a>डॉ. </a>रमेश पोखरियाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डाॅ. निशंक एक विद्वान एवं साहित्यकार व्यक्ति हैं उन्हें आपदा के पुराने जख्मों को कुरेदना नहीं चाहिए.

राज्यसभा सांसद राजबब्बर ने हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री  <a>डॉ. </a>रमेश पोखरियाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डाॅ. निशंक एक विद्वान एवं साहित्यकार व्यक्ति हैं उन्हें आपदा के पुराने जख्मों को कुरेदना नहीं चाहिए.

राज्यसभा सांसद राजबब्बर ने हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री  <a>डॉ. </a>रमेश पोखरियाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डाॅ. निशंक एक विद्वान एवं साहित्यकार व्यक्ति हैं उन्हें आपदा के पुराने जख्मों को कुरेदना नहीं चाहिए.

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    राज्यसभा सांसद राजबब्बर ने हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री  डॉ. रमेश पोखरियाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डाॅ. निशंक एक विद्वान एवं साहित्यकार व्यक्ति हैं उन्हें आपदा के पुराने जख्मों को कुरेदना नहीं चाहिए.

    रमेश पोखरियाल आपदा पर राजनीति करने के बजाय उत्तराखण्ड के विकास की राजनीति करें तो अच्छा होगा. वे चुने हुए जनप्रतिनिधि है और उन्हें अपनी आवाज लोकसभा में राज्य के हक को दिलाने के लिए बुलंद करनी चाहिए.

    राज्य के हक और विकास के लिए अगर वे लोकसभा में अपनी आवाज बुलंद करते हैं, या केन्द्र सरकार से उत्तराखण्ड के हक की लड़ाई लड़ते हैं तो उस लड़ाई में मैं उनके पीछे चलने को तैयार हूं.

    राज्यसभा सांसद ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्वतीय राज्य है. यहां की आर्थिकी पर्यटन पर आधारित है. ऐसे में यदि राजनीतिक पार्टियां आपदा व यात्रा को लेकर राजनीति करेंगे तो उसका नुकसान राज्य की जनता को ही उठाना पड़ेगा.

    इसलिए उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध किया है कि प्रदेश के विकास की राजनीति करें. डॉ. निशंक जब स्वयं मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने राज्यहित से जुड़े अनेक मसलों पर तत्कालीन केन्द्र सरकार पर दबाव डाला था. उनमें से अभी भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जो केन्द्र सरकार के स्तर पर लंबित हैं.

    डॉ. निशंक को चाहिए कि वह अपनी दक्षता और ऊर्जा का उपयोग केंद्र के समक्ष राज्य के हित से जुड़े मुद्दों को उठाने में लगाएं. ग्रीन बोनस की मांग अभी भी लंबित है.

    कुछ और न सही कम से कम अब केन्द्र में उनकी ही सरकार है. राज्य को ग्रीन बोनस के रूप में मिलने वाली राशि तो वह दिला ही सकते हैं. डॉ. निशंक को अपनी इस मुहिम में अपने अन्य साथियों को भी साथ लेना चाहिए क्योंकि उत्तराखण्ड की जनता ने उन्हें चुन कर लोक सभा में बड़ी आशाओं के साथ भेजा था कि राज्यहित में उनके सांसद उनकी समस्याओं को उठाएंगे.

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