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वादों और इरादों में फंसे रानीखेत के लोग, 1954 से जारी नए जिले की मांग अब तक नहीं हुई पूरी

वादों और इरादों में फंसे रानीखेत के लोग, 1954 से जारी नए जिले की मांग अब तक नहीं हुई पूरी

रानीखेत के बिनसर में श्री स्वर्गाश्रम बिनसर महादेव मंदिर (Binsar Mahadev Temple Ranikhet) आदिकाल का बताया जाता है. (प्रतीकात्मक)

रानीखेत के बिनसर में श्री स्वर्गाश्रम बिनसर महादेव मंदिर (Binsar Mahadev Temple Ranikhet) आदिकाल का बताया जाता है. (प्रतीकात्मक)

Ranikhet District Demand: 15 अगस्त 2011 को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 4 नए जिलों की घोषणा के साथ रानीखेत को भी जिला बनाने का ऐलान किया. हालांकि इतने साल बीत जाने के बाद भी रानीखेत जिला अस्तिव में नहीं आ पाया. अब विधानसभा चुनाव (Uttarakhan Assembly Election 2022) नजदीक आते ही जिला बनाने को लेकर वादों और दावों की चर्चा फिर से होने लगी है.

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अल्मोड़ा. उत्तराखंड में अल्मोड़ा से अलग रानीखेत जिले (Ranikhet District Demand) की मांग 1954 से चली आ रही है. 15 अगस्त 2011 को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 4 नए जिलों की घोषणा के साथ रानीखेत को भी जिला बनाने का ऐलान किया. हालांकि इतने साल बीत जाने के बाद भी रानीखेत जिला अस्तिव में नहीं आ पाया. अब विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2022) नजदीक आते ही जिला बनाने को लेकर वादों और दावों की चर्चा फिर से होने लगी है.

रानीखेत से कांग्रेस के विधायक करन मेहरा ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही सबसे पहला काम रानीखेत को जिला बनाने का करेगी. उन्होंने कहा कि रानीखेत जिले को नैनीताल की तर्ज पर जिला बनाया जाएगा. एक मुख्यालय रानीखेत और दूसरा मुख्यालय रामगंगा को बनाया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने गैरसैँण को राजधानी बनाने पर भी काम करने का वादा किया.

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वहीं रानीखेत के व्यापारी मोहन सिंह नेगी का कहना है कि रानीखेत के लोगों को सिर्फ यूपी से लेकर उत्तराखंड तक आश्वासन ही मिला. जिले की मांग अब भी जस की जस है. चुनावों में एक बार फिर उम्मीद है कि लोगों को जिले की सौगात मिल जाए या फिर सिर्फ राजनीति होगी.

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वहीं स्थानीय निवासी त्रिभुवन कहते है कि जिला बनाने के लिए यूपी के समय से लेकर आज तक कई बार बड़े-बड़े आंदोलन हुए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. सारी सरकारें सिर्फ आश्वासन देती रहीं.

बता दें कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना को 20 साल पूरे हो गए हैं. इस दौरान तहसीलों की संख्या तो तेजी से बढ़ी, लेकिन जिलों को लेकर सिर्फ राजनीति ही होती रही. पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने हिम्मत दिखाकर 4 नए जिले बनाने का आदेश जारी किया, लेकिन सीएम की कुर्सी जाते ही जिलों का शासनादेश ठंडे बस्ते में चला गया. अब देखना होगा कि क्या चुनाव में जनता को लुभाने के लिए कौन सी पार्टी क्या दाव खेलती है.

Tags: Congress, Ranikhet News, Uttarakhand Assembly Election 2022

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